
बीसीसीआई के रुख से खुश नही हैं पूर्व चयनकर्ता
विराट कोहली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि वनडे प्रारूप की कप्तानी से हटाने का फैसला पूरी तरह से चयनकर्ताओं की ओर से लिया गया जिसके बारे में उन्हें टीम सेलेक्शन से महज डेढ़ घंटे पहले बताया गया। कोहली ने इस बातचीत के दौरान सौरव गांगुली के उस बयान को भी झूठा ठहराया जिसमें बीसीसीआई अध्यक्ष ने दावा किया था कि टी20 प्रारूप की कप्तानी न छोड़ने के लिये उन्होंने पर्सनल रूप से बात की थी और जब कोहली नहीं माने तो चयनकर्ता सीमित ओवर्स प्रारूप के लिये सिर्फ एक ही कप्तान रखने पर राजी हुए।
विराट कोहली के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर काफी विवाद देखने को मिला और बीसीसीआई अधिकारी गुस्से में नजर आये। जहां कई रिपोर्ट में दावा किया गया कि बीसीसीआई इस मामले को लेकर विराट कोहली से टेस्ट सीरीज के बाद बात करेगी, तो वहीं पर सौरव गांगुली ने मीडिया से इस मामले को छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि बोर्ड इसे आंतरिक रूप से हैंडल करेगा।

अपने अनुभव से गांगुली को लेना चाहिये था सबक
हालांकि भारतीय टीम के पूर्व हरफनमौला खिलाड़ी और चयनकर्ता कीर्ति आजाद को सौरव गांगुली की यह बात पसंद नहीं आयी। कीर्ति आजाद उस समय भारतीय टीम में चयनकर्ता की भूमिका अदा कर रहे थे जब सौरव गांगुली और पूर्व कोच ग्रेग चैपल के बीच विवाद देखने को मिला था और अंत में सौरव गांगुली से कप्तानी छोड़ने के लिये कहा गया। कीर्ति आजाद ने पुराने विवाद को याद करते हुए कहा कि अपने पुराने दिनों को याद कर गांगुली कप्तान कोहली के मुद्दे को बेहतर तरीके से सुलझा सकते थे।
कीर्ति आजाद का मानना है कि कोहली और बोर्ड के बीच का विवाद गांगुली और चैपल के विवाद से काफी मिलता-जुलता है, ऐसे में बोर्ड उनसे ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकता था।

जब गांगुली को हटाया गया तो मैंने किया था बचाव
कीर्ति आजाद का मानना है कि विराट कोहली से वनडे टीम की कमान छीनने में कुछ गलत नहीं है, हालांकि बोर्ड प्रेजिडेंट होने के नाते वो इस मसले को अलग तरीके से सुलक्षा सकते थे। उन्हें कोहली को इस बारे में बताने की टाइमिंग को सुधारना चाहिये था।
न्यूज 18 के साथ बात करते हुए एजाज ने कहा,'मुझे याद है कि कैसे बिशन सिंह बेदी और सुनील गावस्कर को कप्तानी से हटाया गया था। वेंकटराघवन फ्लाइट में थे और जब वो उससे उतरे तो उन्हें कप्तान बना दिया गया था। सौरव गांगुली को कम से कम अपने अनुभव से यह बात समझनी चाहिये थी। मुझे याद है कि जब ग्रेग चैपल कोच थे और उन्हें कप्तानी से हटाया गया तो मैंने उनका बचाव किया। उन्हें अपने अनुभव से सीखना चाहिये था और विराट से इस बारे में थोड़ा पहले बात करनी चाहिये थी। मैं यह नहीं कह रहा कि विराट कोहली कोई खास केस हैं, हालांकि वो खास बल्लेबाज और क्रिकेटर हैं। वह खुद उदाहरण देकर सभी का नेतृत्व करते हैं।'

अहजर के ट्वीट के बाद रखना चाहिये था ज्यादा ध्यान
कीर्ति आजाद का मानना है कि यह पूरा मामला लोगों तक पहुंचना ही नहीं चाहिये था और गांगुली को इस पूरे मामले को बेहतर तरीके से संभालना चाहिये था, खासतौर से तब जब पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने ट्वीट कर भारतीय टीम में विवाद की खबरों को तेज कर दिया।
उन्होंने कहा,'मुझे लगता है कि इस मामले को बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता है, बीसीसीआई को इस मामले में ज्यादा प्रोफेशनल तरीके से काम करना चाहिये था और सौरव की निगरानी में इसे बेहतर काम करना चाहिये था। खासतौर से पूर्व कप्तान की ओर से विवाद की खबरों पर ट्वीट किये जाने के बाद इसमें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिये थी। ऐसी चीजें लोगों के बीच पहुंचनी ही नहीं चाहिये थी और एक कप्तान जिसने अपना सबकुछ दिया उसे इस बारे में थोड़ा पहलने बताना चाहिये था।'


Click it and Unblock the Notifications
