B'day Spcl:जब सहवाग के सपनों की जिद ने जीत लिया था पिता का गुस्सा, जानिए कुछ अनसुनी बातें
नई दिल्ली। क्रिकेट जगत में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने क्रिकेट की महानता और उसकी लोकप्रियता को न सिर्फ बढ़ाया है बल्कि एक नई परिभाषा गढ़ी है। अगर भारत की बात करें तो इस देश ने क्रिकेट के कुछ ऐसे दिग्गज पैदा किए हैं जिन्होंने इस खेल के माध्यम से अपने देश की एक अलग साथ पूरी दुनिया में बनाई है। अगर क्रिकेट का भगवान इसी देश में है तो वहीं इस देश में एक ऐसे खिलाड़ी ने भी अपना जलवा बिखेरा जिसने इस खेल को खेलने का अंदाज ही बदल दिया। छोटे कद का ये खिलाड़ी जब हाथ में बल्ला लिए मैदान में उतरता था तो दिग्गज गेंदबाज और विपक्षी टीम उस वक्त तक अपने को हारा समझती थी जब तक कि वो क्रीज पर अपने पांव जमाए रखता था। जी हां, हम बात कर रहे हैं मुल्तान के सुल्तान या नजफगढ़ के नवाब के नाम से मशहूर वीरेंद्र सहवाग की। वीरू आज यानी कि 20 अक्टूबर को अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। आइए जानते हैं उनके जीवन और करियर से जुड़ी कुछ सुनी-अनसुनी बातें......
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वो चेतक स्कूटर जिसके सफर ने वीरू को दिलाई पहचानः
जुनून एक ऐसी 'बीमारी' है जो अगर किसी इंसान के अंदर घर कर जाए तो फिर महानता के उस शीर्ष पर ले जाती है जहां से सभी के कद बौने नजर आते हैं। ऐसा ही कुछ किस्सा था वीरू का ही जिनको बचपन से ही क्रिकेटर बनने का जुनून था। प्लास्टिक के बल्ले से कभी गली-मोहल्लो में धमाल मचाने वाले सहवाग का वो स्कूटर आज भी लोगों के जेहन में है जब वो उसपर सवार होकर दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम जाया करते थे। वहीं बचपन में जब उनके दांत में चोट लगी तो उनके पिता ने उनके इस सपने पर बैन भी लगाया था लेकिन बेटे के सपनों की जिद ने पिता के गुस्से को जीत लिया और सहवाग अपने इस सफर में आगे बढ़ते रहे और बुलंदियों को छूते रहे।

वनडे में दोहरा शतक और टेस्ट में तिहरा शतक जमाने वाले इकलौते भारतीयः
1999 में सहवाग ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना पदार्पण किया था। सहवाग क्रिकेट जगत के शायद इकलौते खिलाड़ी हैं जो परिस्थितियों के हिसाब से नहीं खेलते थे बल्कि वो अपने अंदाज के हिसाब से ही परिस्थियों को बनाते थे, गेंदबाज चाहे कोई भी हो, टीम की स्थिति चाहे कुछ भी हो लेकिन सहवाग का अंदाज ही निराला था। दूसरी छोर पर खड़े खिलाड़ी उन्हें समझाते थे कि वीरू थोड़ा आराम से लेकिन वीरू का अंजाद ही शायद ऐसा था कि वो बल्ले से गेंद को छूते थे तो गेंद आराम शब्द का मतलब ही भूल जाती थी। पाकिस्तान की सरजमीं पर नजफगढ़ के इस छोरे ने पहले ही टेस्ट में तिहरा शतक जड़कर एक इतिहास रचा और एक उपाधि हासिल की जिसे कहते हैं मुल्तान का सुल्तान। वहीं इसके 4 साल बाद फिर चेन्नई में सबसे तेज तिहरा शतक जड़कर फिर से वीरू ने धमाल मचाया और वनडे में भी दोहरा शतक जड़कर पूरी दुनिया को ये बताया कि जब आप अपने अंदाज में खेलते हैं तो क्या होता है।

'बाप-बाप होता है' सहवाग का वो मशहूर डॉयलागः
जब भी मैदान में भारत-पाक आमने-सामने हो तो क्रिकेट का रोमांच ही अलग होता है लेकिन आप जरा कल्पना कीजिए कि एक छोर पर सचिन हों और दूसरे पर वीरू और गेंदबाज हों शोएब अख्तर तो क्या होगा। दरअसल ऐा ही एक वाकया 2002 का है जब सहवाग बल्लेबाजी कर रहे थे और शोएब उन्हें बार-बार शॉट गेंद फेंक रहे थे और इशारे कर रहे थे कि वो उसे पुल या हुक करें इसपर सहवाग ने कहा कि मुझे नहीं ये गेंद उनको यानी सचिन को फेंकना। जब सचिन आए तो शोएब ने उनको ये गेंद फेंकी और सचिन ने उसे छक्का जड़ दिया। इसपर सहवाग ने कहा कि बाप-बाप होता है और बेटा-बेटा।

नर्वस 90 का भी अजब कनेक्शनः
बेधड़क और बेपरवाह क्रिकेट खेलने होने वाले सहवाग जब बल्लेबाजी करते थे तो उन्हें इस बात की फिक्र नहीं होती थी कि वो शतक के करीब हैं या दोहरे शतक के । उनकी इसी आदत के वजह से कई बार उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ा लेकिन भला उन्हें कहां किसी बात की फिक्र। बता दें कि हवाग पांच बार 90s (90,90,92,96 और 99), एक बार 190s (195) और एक बार 290s (293) में आउट हुए हैं।

आईपीएल में भी है उनके नाम एक शानदार रिकॉर्डः
फटाफट रन बनाने वाले वीरेंद्र सहवाग के नाम टी-20 क्रिकेट में एक अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। सहवाग ने आईपीएल में अपने 1000 रन 604 गेदों में और 2000 रन 1251 गेंदों में पूरे कर लिए थे। यह सबसे तेज 1000 और 2000 रन का रिकॉर्ड है। यहां तक की क्रिस गेल और विराट कोहली ने भी इससे ज्यादा गेंदे खेल कर यह मुकाम हासिल किया है।
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