
नहीं पता था चैपल का मकसद
हरभजन ने बताया कि कोच के रूप में चैपल का मकसद स्पष्ट नहीं था। उन्होंने कहा, ''इससे पहले बहुत कुछ हुआ था। जब ग्रेग चैपल हमारे पक्ष के कोच के रूप में आए, तो उन्होंने पूरी टीम को बाधित कर दिया, कोई नहीं जानता कि उनका कोच बनने के दौरान उनका मकसद क्या था, कोई नहीं जानता कि उनसे बेहतर टीम को कैसे बाधित किया जाए, वह जो कुछ भी चाहते थे करते थे।''

नहीं लगता था खेलने में मन
पंजाब के ऑफ स्पिनर ने 2007 के विश्व कप को अपने करियर का सबसे बुरा दाैर बताया। हरभजन ने यहां तक बताया कि चैपल के कोच के पद पर होने के कारण वह टीम को छोड़ना चाहते थे। हरभजन ने कहा, "2007 का 50 ओवर का विश्व कप मेरे करियर का सबसे बुरा टूर्नामेंट है, मुझे लगा कि हम इतने कठिन समय से गुजर रहे हैं और मैंने यह भी सोचा कि शायद भारत के लिए खेलने का यह सही समय नहीं है, क्योंकि गलत लोग अब भारतीय क्रिकेट चला रहे हैं। ग्रेग चैपल कौन हैं और वह क्या करने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रेग चैपल की फूट डालो और राज करो की नीति थी।''
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कमजोर टीम से हारे
स्पिनर ने कहा कि भारतीय टीम उस विश्व कप में काफी मजबूत थी।2003 में सौरव गांगुली की कप्तानी में एक समान टीम 2003 विश्व कप में फाइनल में पहुंची थी। 2007 टीम में वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, गांगुली, युवराज सिंह, एमएस धोनी, राहुल द्रविड़, हरभजन, जहीर खान और कई अन्य सितारे थे। हरभजन ने कहा, "हमारे पास 2007 के 50-ओवर के विश्व कप के लिए एक ठोस टीम थी, हम सिर्फ प्रदर्शन करने में सक्षम नहीं थे, क्योंकि कोई भी मन के सही फ्रेम में नहीं था, कोई भी एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करता था, जब टीम खुश नहीं होती है तो परिणाम नहीं आते हैं। हम श्रीलंका और बांग्लादेश से हार गए, वे इतनी बड़ी टीम नहीं थीं।'' बता दें कि भारत अपने ग्रुप मैच श्रीलंका और बांग्लादेश से हार गया। इसके चलते उन्हें नॉकआउट होना पड़ा। वह 2007 का विश्व कप अभी भी कई क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक याद बन कर रह गया है।
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