
गौतम गंभीर ने पुराने दिनों को किया याद
भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज और मौजूदा सांसद गौतम गंभीर ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के कॉलम में लिखते हुए बताया कि वह भी इस दौर से गुजर चुके हैं जिससे कप्तान विराट कोहली अभी गुजर रहे हैं।
गौतम गंभीर ने अपने कॉलम में लिखते हुए बताया कि यह बात साल 2008 जनवरी की है जब वह रणजी ट्रॉफी के फाइनल मैच में दिल्ली की कप्तानी कर रहे थे। उनकी टीम उत्तर प्रदेश के खिलाफ मुंबई के मैदान पर मैच खेल रही थी, जिसकी पहली पारी में वह जीरो पर आउट हो गये जिसके बाद लोगों ने उनकी तकनीक और टैम्परामेंट को लेकर काफी आलोचना की।

गंभीर ने बताया कैसे की वापसी
गौतम गंभीर ने बताया कि जब मैं दूसरी पारी में खेलने उतरा था तो बस एक बात दिमाग में लेकर उतरा कि रणजी ट्रॉफी में जीत हासिल करना मेरा बचपन का सपना रहा है। इस बात से मैं ज्यादा चार्ज नहीं महसूस कर रहा था। तभी एक राष्ट्रीय चयनकर्ता ने मेरे खेल को लेकर सवाल उठाया और आलोचना की, जिसके बाद मुझे बेहद गुस्सा आया।
गंभीर ने आगे कहा कि मैंने उस वक्त गुस्से को जाहिर नहीं किया बल्कि उसे मन में रखा जब तक कि मैं दूसरी पारी खेलने नहीं उतरा। मैंने अपने गुस्से को खेल के प्रति प्रवाहित किया जिसके चलते दूसरी पारी में मैंने शतक ठोंका और अपनी टीम को रणजी ट्रॉफी में जीत दिलाई।

विराट कोहली को फॉर्म हासिल करने के लिये इसकी जरूरत
गौतम गंभीर ने कहा कि इस पारी के बाद मैंने उस चयनकर्ता को भी मुंहतोड़ जवाब दिया। क्रिकेट के जरिये मुझे कई भावनाओं का पता लगा। मैं भी उसी जगह था जहां पर आज विराट कोहली खड़े हैं।
गौतम गंभीर ने कहा कि मुझे लगता है कि विराट कोहली को इस वक्त उसी फीलिंग की जरूरत है जो आराम से कवर ड्राइव खेल सकता है और इसके बाद वह एक एनिमेटिड चीयर लीडर की तरह अपनी टीम का नेतृत्व कर सकता है।

विराट कोहली को रणनीति में करना चाहिये यह बदलाव
गेंदबाजी पर बात करते हुए 38 साल के गौतम गंभीर ने बताया कि विराट कोहली को पांच गेंदबाजों के साथ उतरना चाहिए। कोहली को हनुमा विहारी की जगह रवींद्र जडेजा को खिलाना चाहिए। बेशक विकेट सपाट हो या जिस पर हरी घास हो। गौतम गंभीर की बात करें तो उन्होंने भारत की ओर से 58 टेस्ट, 147 वनडे और 37 टी-20 मैच खेले हैं।


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