BCCI ने बदला रणजी ट्रॉफी का बड़ा नियम, बदल जायेगा भारत का घरेलू क्रिकेट
नई दिल्ली। भारत क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से घऱेलू क्रिकेट में बदलाव और विकास के इरादे से रणजी ट्रॉफी में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। पिछले साल आयोजित हुए रणजी ट्रॉफी में खराब अंपायरिंग से जूझने के बाद बीसीसीआई ने इस साल इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में डीआरएस (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) को लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत किसी फैसले के खिलाफ खिलाड़ी थर्ड अंपायर से 2 बार अपील कर सकता है। खिलाड़ी के पक्ष में फैसला आने के केस में टीम के पास रिव्यू करने का मौका बरकरार रहेगा।
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बीसीसीआई के इस फैसले पर बंगाल के कोच अरुण लाल और कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन ने अपनी सहमति दर्ज करा दी है जिसके बाद रणजी ट्रॉफी के इतिहास में पहली बार सेमीफाइनल मुकाबलों में इस सिस्टम का इस्तेमाल किया जायेगा।
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भारत के घरेलू क्रिकेट में पहली बार इस्तेमाल होगा डीआरएस
रणजी ट्रॉफी में शनिवार से शुरु हो रहे सेमीफाइनल मुकाबलों के साथ भारतीय घरेलू क्रिकेट में पहली बार डीआरएस का इस्तेमाल किया जायेगा। हालांकि रणजी ट्रॉफी में इस्तेमाल होने वाले इस डीआरएस में खिलाड़ियों के पास न तो हॉक आई इस्तेमाल करने का ऑप्शन होगा और न ही अल्ट्राएज और स्नीकोमीटर का।
हालांकि डीआरएस के इस इस्तेमाल से रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंची 4 टीमों बंगाल, कर्नाटक, सौराष्ट्र और गुजरात की टीमों को एलबीडब्लयू के खिलाफ निर्णय लेने में आसानी होगी। प्रत्येक टीम के पास 4 रिव्यू लेने का अधिकार होगा।

रणजी में पहली बार पर खिलाड़ियों को है तकनीक की जानकारी
कर्नाटक के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले से पहले बंगाल के कोच अरुण लाल ने कहा कि उन्हें डीआरएस के साथ बहुत अनुभव नहीं है। यह सीमित विकल्पों के साथ पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है। आशा है कि इससे गेंदबाजों को होने वाली बड़ी परेशानियों से छुटकारा मिले।
वहीं बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन ने डीआरएस की तारीफ करते हुए कहा कि यह एक नयी चीज है, पर मुझे लगता है कि टीवी पर ज्यादातर खिलाड़ियों ने इस अच्छे से देखा है जिसकी वजह से वह जानते हैं कि इसका इस्तेमाल किस तरह से किया जायेगा।

अहम मुकाबलों में बढ़ेगी निर्णय लेने की क्षमता
बंगाल के कप्तान ने मीडिया से आगे बात करते हुए कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि घरेलू क्रिकेट में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, खास तौर से नॉकआउट गेम्स में जहां पर खराब अंपायरिंग से टीम को नुकसान होने के मौके बढ़ जाते हैं। हालांकि इसमें सीमित विकल्प मौजूद है फिर भी हमें उम्मीद है कि इससे खिलाड़ियों को मदद मिलेगी।
टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी मनोज तिवारी ने डीआरएस को लेकर कहा कि उनकी टीम वीडियो एनालिस्ट के साथ बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा करेगी और इस बात का पता लगायेगी कि डीआरएस को लेकर कैसे खुद को तैयार किया जा सकता है ताकि उचित निर्णय लिये जा सकें।
उन्होंने कहा,' अंपायर भी इंसान होते हैं, उनसे भी कई बार गलतियां हो जाती हैं उसे सुधारने के लिये आपके पास तकनीक लेकिन आप उसका इस्तेमाल नहीं करते हो। हालांकि अब ऐसी तकनीक के इस्तेमाल से गेम के अहम मौकों पर सही फैसला लेने में मदद मिलेगी।'

बंगाल-कर्नाटक के बीच होगा पहला महामुकाबला
शनिवार को होने वाले सेमीफाइनल मुकाबले में बंगाल का सामना कर्नाटक से होगा। जहां बंगाल की टीम के पास घरेलू परिस्थितियों में खेलने का फायदा होगा तो वहीं कर्नाटक की टीम में केएल राहुल बतौर सलामी बल्लेबाज और मनीष पांडे मध्य क्रम में उपलब्ध होंगे, जिससे उनके लिये इस मैच को जीतना आसान नही होगा।
बंगाल के कोच अरुण लाल ने साफ किया कि उनकी टीम इन दिग्गज खिलाड़ियों के बारे में न सोच कर अपनी तैयारियों पर ध्यान लगा रही है।
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