पाकिस्तान के सबसे स्लो गेंदबाज थे शोएब अख्तर, वकार से तुलना करने पर लोग कहते थे पागल
नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज और फैन्स के बीच रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर शोएब अख्तर का करियर बेहद शानदार रहा। क्रिकेट इतिहास में सबसे तेज गेंद डालने का रिकॉर्ड अभी भी इस पाकिस्तानी गेंदबाज के नाम हैं जो कि अख्तर ने 17 साल पहले 2003 के विश्व कप के दौरान फेंकी थी। शोएब अख्तर ने यह रिकॉर्ड 17 साल पहले बनाया था और तब से लेकर अब तक कई तेज गेंदबाज फैन्स के सामने आ चुके हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा से फैन्स को लुभाया है। हालांकि इन सबके बावजूद कोई भी खिलाड़ी उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ नहीं सका।
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शॉन टैट, मिशेल स्टार्क, ब्रेट ली जैसे कई गेंदबाज बस उनके रिकॉर्ड के करीब ही पहुंच सके। अख्तर अपनी तेजी से बल्लेबाज को हैरान करने के लिये मशहूर थे, हालांकि यह बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि करियर के शुरुआती दिनों में शोएब अख्तर को पाकिस्तान का सबसे स्लो (धीमा) गेंदबाज माना जाता था। इस बात का खुलासा खुद अख्तर ने किया और बताया कि पाकिस्तान के सबसे धीमे गेंदबाज से दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज बनने तक का उनका सफर कैसा था।
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पाकिस्तान टीम के सबसे स्लो गेंदबाज थे अख्तर
ईएसपीएन क्रिकइंफो के एक पॉडकास्ट में संजय मांजरेकर के साथ बात करते हुए शोएब अख्तर ने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में पाकिस्तान क्रिकेट टीम तेज गेंदबाजों का बोलबाला था, टीम में मेरे अलावा 8 तेज गेंदबाज थे। उस वक्त वसीम अकरम और वकार यूनुस के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई पड़ता था, और उन सबमें मैं सबसे धीमा गेंदबाज था।
उन्होंने कहा, 'उन दिनों मोहम्मद जाहिद और मेरे अलावा सात तेज गेंदबाज थे। मैं ईमानदारी से कहूं तो उस समय के सभी गेंदबाजों में मैं सबसे स्लो गेंद डालता था।'

वकार को रिप्लेस करने पर कहा जाता था पागल
इस दौरान अख्तर ने बताया कि वह हमेशा से अपने आदर्श वकार यूनिस के साथ प्रतिस्पर्धा रखते थे और इसी के चलते कई बार कहते थे कि वह आगे चलकर टीम में वकार यूनिस को रिप्लेस करेंगे, लेकिन मेरी इस बात पर लोग उन्हें पागल कहते थे।
उन्होंने कहा, 'एक समय मुझसे लोग पूछते थे कि तुम वकार को रिप्लेस करने के बारे में सोच भी कैसे सकते हो। क्या तुम पागल हो गए हो। मैं उनसे कहता कि क्योंकि मेरे पास एटीट्यूड है, जब मैं गेंदबाजी करने जाता हूं तो पूरा मैदान मेरा होता है, मैं विकेट लेता हूं, क्योंकि मैं इस खेल को तेजी से सीखता हूं।'

ऐसे बने दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज
शोएब ने आगे बताया कि कैसे उन्होंने लोगों की नकारात्मक बातों पर ध्यान नहीं दिया और अपने अंदर पॉजिटिव चीजों को विकसित किया और यह विश्वास जगाया कि वह बड़े से बड़े स्तर पर विकेट ले सकते हैं।
उन्होंने कहा, 'कल्पना कीजिए मुझे इन सातों गेंदबाजों से आगे निकलना था, वकार यूनुस और मैंने अपना नाम बनाया था। मैंने इन गेंदबाजों से बेस्ट गुण सीखे।'
गौरतलब है कि साल 1997 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में शोएब अख्तर ने डेब्यू किया था। अपने करियर के दौरान उन्होंने 46 टेस्ट, 163 वनडे और 15 टी-20 खेले। इनमें उन्होंने क्रमशः 178, 247 और 19 विकेट लिए। उन्होंने अपना अंतिम मैच 2011 के विश्व कप में भारतीय उप महाद्वीप में खेला था।
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