विराट कोहली के बयान पर बहुत ज्यादा खफा है BCCI, जानें अब क्या उठा सकता है कदम
नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका दौरे पर रवाना हुई भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली ने बुधवार को जब प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा कि इससे कितना हड़कंप मचने वाला है। भारतीय टीम 3 मैचों की टेस्ट और वनडे सीरीज खेलने के लिये साउथ अफ्रीका रवाना हुई है, जिससे पहले कप्तान ने मीडिया से बात की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कप्तान विराट कोहली ने मीडिया को संबोधित करते हुए पिछले कुछ हफ्तों से लगातार आ रही रिपोर्ट का जवाब दिया और साफ किया कि वो सभी अफवाह हैं। इस दौरान विराट कोहली ने खुद को वनडे प्रारूप की कप्तानी से हटाने के फैसले पर बात करते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में चयनकर्ताओं ने सेलेक्शन मीटिंग से डेढ़ घंटे पहले ही बताया, उससे पहले इन्हें इसको लेकर कोई भी जानकारी नहीं थी।
इतना ही नहीं कोहली ने यह भी कहा कि जब उन्होंने टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ी तो किसी ने भी उनसे ऐसा न करने के लिये नहीं कहा, बल्कि सभी ने इसे सकारात्मक फैसला बताते हुए इसका समर्थन किया। कोहली का यह बयान बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली के उस बयान का पूरा उलट है जिसमें उन्होंने निजी तौर पर कोहली को फोन कर कप्तानी न छोड़ने के लिये अपील करने की बात कही थी। हालांकि कोहली के बयान से जहां चारों तरफ हड़कंप मचा हुआ है तो वहीं पर बीसीसीआई भी सकते में है। मिरर नॉव की रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे मुद्दे पर उनके पास बीसीसीआई का वर्जन है जिसमें उन्होंने न सिर्फ कोहली के बयान पर प्रतिक्रिया दी है, बल्कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कप्तान पर क्या कार्रवाई हो सकती है इस पर भी बात की है।

कोहली से चयनकर्ताओं को क्या है दिक्कत
विराट कोहली और बीसीसीआई के बीच आ रही दिक्कतों पर जब सवाल किया गया तो बताया गया कि विराट से बात कर पाना किसी के लिये भी मुश्किल हो गया है। वह न तो अपने टीम के खिलाड़ियों के साथ बात करते हैं और न ही मैच के बाद टीम के लिये उपलब्ध हो पाते हैं। ऐसे में उनसे किस तरह से कोई बात की जाये यह समझ पाना काफी मुश्किल है। इतना ही नहीं उनका चयन समिति के साथ कोई भी संपर्क या टीम के सेलेक्शन को लेकर कॉर्डिनेशन नहीं होता है, ऐसे में आप कम्युनिकेशन गैप की दुहाई कैसे दे सकते हैं, जो खुद कभी उपलब्ध नहीं रहता है।

डेढ़ घंटे पहले बताने पर क्या बोला बीसीसीआई
मिरर नॉव के अनुसार जब विराट कोहली के डेढ़ घंटा पहले बताने वाले बयान पर बात की गई तो बीसीसीआई अधिकारी ने कहा कि क्या बीसीसीआई का संविधान ऐसा कहता है कि किसी भी खिलाड़ी को कप्तानी से हटाने से पहले उसे 10 दिन या महीने भर पहले जानकारी देनी जरूरी है। किसी को कप्तान बनाना या हटाना पूरी तरह से चयन समिति का काम है, इसमें बोर्ड किसी भी तरह से दखल नहीं दे सकता है। अगर आप प्रदर्शन करते हैं तो आप रहते हैं, नहीं करते हैं तो नहीं रहते हैं, ये बहुत सीधा सा लॉजिक है।

4 महीने से हो रही थी स्प्लिट कैप्टेंसी पर चर्चा
वनडे प्रारूप से विराट कोहली की कप्तानी छीने जाने को लेकर जब सवाल किया गया तो बीसीसीआई अधिकारी ने कहा कि बोर्ड और चयनकर्ता मौजूदा हालात को देखते हुए पिछले 4 महीने से स्प्लिट कैप्टेंसी को लेकर चर्चा कर रहे थे। बीसीसीआई का प्लान था कि 2021 के टी20 विश्वकप के प्रदर्शन के आधार पर हम सीमित ओवर्स प्रारूप की कप्तानी पर फैसला लेंगे, लेकिन विराट ने उससे पहले ही टी20 की कप्तानी छोड़ने का ऐलान कर दिया। यह फैसला पूरी तरह से उनका अपना था और स्वतंत्र था, इसमें किसी का भी दखल नहीं था। इसके बाद हम विश्वकप के बाद जो भी करते उसके कोई खास मायने नहीं रह गये थे। हालांकि हम एक बात को लेकर साफ थे कि सफेद बॉल क्रिकेट में हम एक ही कप्तान के साथ जायेंगे, इसी वजह से जब विराट ने कप्तानी छोड़ी तभी यह तय हो गया था कि वनडे प्रारूप में भी कप्तानी उनसे छीनी जायेगी।

विराट की पीसी पर अब क्या करेगी बीसीसीआई
वहीं जब विराट की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर मचे हड़कंप पर बीसीसीआई की कार्रवाई के बारे में सवाल किया गया तो अधिकारी ने कहा कि बोर्ड अब भी इस बात पर चर्चा कर रहा है कि परिस्थिति को कैसे संभाला जाये कि यह पूरा मामला विराट बनाम बीसीसीआई न लगे। अभी इस बात पर चर्चा की जा रही है कि इसको लेकर बीसीसीआई को कोई आधिकारिक बयान जारी करना चाहिये या नहीं। हालांकि यह साफ है कि बीसीसीआई के बड़े अधिकारी कोहली के बयान से बहुत ज्यादा गुस्से में हैं।
विराट कोहली पर कार्रवाई करने की बात पर बीसीसीआई के पास फिलहाल 3 विकल्प हैं, पहला कि वो पूरी तरह से इस बयान को नजरअंदाज करे और आगे आने वाले इवेंटस पर ध्यान दे। दूसरा इस पूरे मामले पर एक आधिकारिक बयान जारी करे या फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवालों का जवाब दे। तीसरा कोहली के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब करे।

विराट बनाम रोहित पर क्या है बोर्ड का रुख
वहीं विराट बनाम रोहित के मुद्दे पर बात करते हुए बीसीसीआई अधिकारी ने कहा कि यह किसी भी खिलाड़ी के लिये बहुत ही आम बात है कि उसका झुकाव कुछ प्लेयर्स की तरफ ज्यादा होता है और कुछ की तरफ कम होता है, इससे बोर्ड को फर्क नहीं पड़ता। हमारा बस एक ही काम है कि हम इस बात का ध्यान रखें कि इस चीज के चलते मैदान पर या खेल पर किसी तरह का प्रभाव न पड़े।
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