Year Ender 2019: क्रिकेटरों के 10 बयान जिन्होंने इस दशक में बरपाया खूब हंगामा
नई दिल्ली: ये दशक (2010-2019) भारतीय क्रिकेट के जबरदस्त उठाव के साथ-साथ सोशल मीडिया के भी उभार का साबित हुआ है। इस वजह से क्रिकेट खिलाड़ियों को जबरदस्त लोकप्रियता भी मिली तो दूसरी तरफ उनकी ओर की गई हर गतिविधि पर भी इंटरनेट की बारीक नजर बनी रही। कई बार तो ऐसा हुआ कि खिलाड़ियों द्वारा कही कोई बात डिजिटल माध्यम के द्वारा इतनी दूर तक फैलती चली गई कि वह बात कहने वाले खिलाड़ी को लेने के देने पड़ गए।
साल के साथ दशक बीतने की फेहरिस्त में इस बार हम आपके सामने विवादित बयानों की थीम कवर कर रहे हैं जिसने इस दशक में विवादों से सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी। आइए देखते हैं बीते 10 साल में क्रिकेटर्स द्वारा बोले गए 10 सबसे विवादित बयान-

10. जेम्स एंडसरन का कोहली पर दिया बयान-
जेम्स एंडरसन ने एक बल्लेबाज के रूप में विराट कोहली की प्रतिभा और कौशल पर सवाल उठाया था तब काफी बवाल मचा था। 2014 की श्रृंखला इंग्लैंड में विराट कोहली ने स्विंग होती गेंद के खिलाफ संघर्ष किया। खासकर जेम्स एंडरसन के खिलाफ कोहली असहज थे। 2016 में एक और सीरीज से पहले इंग्लिश स्पीडस्टर ने विराट कोहली के बारे में यह कहा था:
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'मुझे यकीन नहीं है कि विराट कोहली बदल गए हैं। मुझे लगता है कि जो भी उनकी तकनीकी खामियां वे यहां पर खेलने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि विकेटों ने इस मामलों को पूरा साइड कर दिया है क्योंकि बल्ले का किनारा हासिल करने के लिए विकेट में पर्याप्त गति नहीं है, जैसे हमने इंग्लैंड में उनके खिलाफ किया था- थोड़ा और अधिक मूवमेंट के साथ। "
कोहली ने जब बल्ले से दिया जवाब-
मजेदार बात यह रही कि उस सीरीज में कोहली ने 2014 की असफलता से उभरते हुए पांच मैचों में 235 के उच्चतम स्कोर सहित 655 रन बनाए और डॉन ब्रैडमैन और रिकी पोंटिंग के बाद केवल तीसरे खिलाड़ी बने, जिन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में तीन दोहरे शतक बनाए। कोहली ने पूरी श्रृंखला में 40, 49 *, 167, 81, 62, 6 *, 235 और 15 के स्कोर बनाए जबकि भारत ने 4-0 से जीत दर्ज की। जेम्स एंडरसन के विवाद ने कोहली को केवल अंग्रेजी टीम को गिराने में मदद की।

9. सहवाग का धोनी के बारे में दिया बयान-
सहवाग जितने अपने बल्ले से मुखर रहे हैं उतने ही मुखर अपनी राय को लेकर रहे हैं। अपने रिटायरमेंट के बाद, इस सलामी बल्लेबाज विशेष रूप से ट्विटर अपने अलग तरह के अंदाज से अलग पहचान बनाई है। हालांकि कई बार सहवाग की मुखरता उन पर भारी भी पड़ती है। ऐसा ही एक उदाहरण विश्व कप विजेता कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर उनकी की गई टिप्पणी से मिलता था।
सहवाग के करियर के अंतिम दौर में माना गया था उनके और धोनी के बीच में कुछ तनाव जैसा जरूर है। इतना ही नहीं सहवाग ने एक बार कहा था कि भारतीय टीम काफी मजबूत थी जिसकी वजह से वह विश्व कप जीती। अकेले धोनी भारत को वह कप नहीं जिता सकते थे।

8."तेंदुलकर और द्रविड़ मैच विजेता नहीं हैं"
शोएब अख्तर का अंदाज ठीक वैसा ही जैसा भारत में सहवाग का है। वे हालांकि अब भारतीय टीम के खिलाड़ियों और उनके प्रदर्शन की अपने यू-ट्यूब चैनल पर दिल खोलकर तारीफ करते हुए दिखाई देते हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं रहा है।
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शोएब ने अपनी आत्मकथा "कंट्रोवर्सियलली योर्स" में भारतीय खिलाड़ियों से जुड़े कुछ विचार साझा किए हैं।
अख्तर के अनुसार भारतीय क्रिकेट के दिग्गज, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ में विशेष कौशल का अभाव था। उनकी रिपोर्ट में, ये दोनों खिलाड़ी अपनी टीम के मैच विजेता नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि वे आमतौर पर उनकी गति का सामना करने के लिए संघर्ष करते थे। इस बयान ने क्रिकेट में काफी हंगामा बरपाया था।

7. जब गेल ने कहा, 'बेबी शरमायों मत'
क्रिस गेल जो भी करें उसको सिवाए मजाक के किसी और तरीके से नहीं लिया जा सकता लेकिन उनका भी एक बयान काफी सुर्खियां और विवाद बटोर चुका है।
अपने करियर के दौरान, क्रिस गेल जाने-अनजाने में कई विवादों का हिस्सा रहे हैं। बाद का वाकया तब हुआ जब वह नेटवर्क टेन कमेंटेटर मेल मेलक्लालिन को बीबीएल मैच के बाद एक साक्षात्कार दे रहे थे। विस्फोटक बल्लेबाज ने मेलक्लालिन की सुंदरता की प्रशंसा अजीब अंदाज में की और उन्हें ड्रिंक्स के लिए आमंत्रित किया जिससे बाद में उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
कुछ ही घंटों में गेल की टिप्पणियां विभिन्न समाचार चैनलों की सुर्खियां थीं 'यूनिवर्स बॉस' पर उसके दुराचार के लिए $ 10000 का जुर्माना लगाया गया था और कई अन्य महिलाएं भी गेल के खिलाफ सामने आई थी। उसके बाद गेल ने बीबीएल में भाग नहीं लिया है और अपनी पुस्तक "सिक्स मशीन" में उन्होंने इस बारे में डिटेल में बात की थी।

6. अफरीदी का भारतीयों के बारे में विवादित बयान
पाकिस्तान का यह ऑलराउंडर भारत सहित दुनिया भर में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले क्रिकेटरों में से एक है। अफरीदी अपने समकक्षों के बीच अपनी गर्मजोशी के लिए जाने जाते हैं लेकिन कभी-कभी उन्होंने ऐसे बयान दिए हैं जिन्होंने उत्पात मचाया है। देर से, उन्हें अपनी जीवनी में किए गए कुछ चौंकाने वाले खुलासे के लिए भी बहुत कुछ मिल रहा है। अफरीदी ने विश्व कप 2011 के बाद पाकिस्तान आकर अपने नकारात्मक नजरिए के लिए भारतीय मीडिया कीआलोचना की पाकिस्तानियों को भारतीयों से बेहतर इंसान भी कहा। यह एक अनावश्यक बयान था जो मीडिया में गरमागरम बहस बन गया। इस दौरान अफरीदी का कहना था कि भारतीय बड़े दिल वाले नहीं हैं।
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5. केविन पीटरसन का बयान
पिछले दशक में, इंग्लिश क्रिकेट की कुछ सर्वश्रेष्ठ पारियों में इस दाएं हाथ के स्टाइलिश बल्लेबाज का काफी योगदान रहा। चाहे प्रसिद्ध 2005 एशेज श्रृंखला हो या 2010 टी 20 विश्व कप की जीत, पीटरसन का प्रदर्शन केंद्रीय रहा। हालांकि पीटरसन एक ऐसे व्यक्ति रहे जो हमेशा सही और गलत दोनों कारणों से सुर्खियों में रहे।
वर्ष 2012 उनके लिए एक बुरा सपना बन गया क्योंकि उन्हें अनुशासनात्मक और ड्रेसिंग रूम के मुद्दों के लिए ड्रॉप कर दिया गया था। हालांकि उन्हें 2013 की एशेज श्रृंखला में वापस बुलाया गया था लेकिन समस्याओं का समाधान कभी नहीं हुआ। औसत प्रदर्शन ने ECB के साथ उनके संबंधों में पूरी तरह से गिरावट ला दी जिसके चलते उनका शानदार गलत तरीके से समाप्त हुआ।
ठीक एक साल बाद, केपी ने अपनी जीवनी जारी की, जहां उन्होंने दावा किया कि एंडी फ्लावर एक कारण थे जिस कारण उनका क्रिकेट अभियान निराशाजनक तरीके से समाप्त हुआ। जब उन्होंने विकेट कीपर मैट प्रायर के बॉस जैसे रवैये की भी आलोचना की। पीटरसन के अनुसार, प्रायर ही वह मुख्य कारण थे कि हर कोई ड्रेसिंग रूम में उनके खिलाफ हो गया।

4. कांबली ने कहा- सचिन उनको भूल चुके हैं
इस समय कांबली और सचिन की दोस्ती दोबारा पटरी पर आ चुकी है लेकिन पहले ऐसा नहीं था और दो बचपन के दोस्तों के बीच एक जैसे रिश्ते नहीं रहे। कांबली को भारतीय क्रिकेट में सचिन जैसी प्रसिद्धि कभी नहीं मिली और संन्यास के बाद भी वे एल्कोहल, ड्रग्स जैसी चीजों में लिप्त हो गए थे। इसी दौरान उन्होंने सचिन पर आरोप लगाया था कि सचिन ने मुश्किल समय में उनकी मदद नहीं की।
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इतना ही नहीं कांबली ने यह भी कहा था कि जब सचिन ने अपनी रिटायरमेंट स्पीच में उनका नाम नहीं लिया तब वे काफी हैरान रह गए थे। उस समय इन दो दोस्तों की टूटी हुई दोस्ती देश में काफी चर्चाओं का विषय रही।

3. जब रबादा ने कहा- 'कोहली मैच्योर नहीं है'
आधुनिक समय के क्रिकेट के दो बड़े नाम हैं कैगिसो रबाडा और विराट कोहली। हालांकि रबाडा के लिए विश्व कप 2019 बहुत अच्छा नहीं गया। जिस वजह से दक्षिण अफ्रीका भी कुछ खास नहीं कर सका।
इसी प्रतियोगिता के एक मैच के दौरान रबाडा ने कोहली को टारगेट करने की रणनीति के तहत कम मैच्योर इंसान कहा था जो गाली जैसी चीजों को झेल नहीं सकता। पेसर ने भारतीय कप्तान को अपरिपक्व करार देते हुए कहा कि कोहली को समझना एक मुश्किल काम है। जवाब में, विराट ने टिप्पणी को दरकिनार कर दिया। हालांकि भारतीय कप्तान ने इस टिप्पणी को गंभीरता से नहीं लिया लेकिन उनके प्रशंसक वास्तव में नाराज हो गए और यह फ्रंट पेज की खबर बन गई।

2. "2011 का विश्व कप फाइनल फिक्स था"
पिछले कुछ वर्षों में कई मैच फिक्सिंग आरोपों के साथ श्रीलंकाई क्रिकेट एक अंधेरे दौर से गुजर रहा है। कई पूर्व खिलाड़ी देश में खेल के मौजूदा परिदृश्य पर सवाल उठा रहे हैं। उनमें से एक उनके विश्व कप विजेता कप्तान अर्जुन रणतुंगा हैं।
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आजकल भले ही श्रीलंकाई दिग्गज अपने राजनीतिक मामलों में व्यस्त हैं लेकिन उन्होंने हमेशा देश के क्रिकेट में अपनी रुचि दिखाई है। 2015 में रणतुंगा ने श्रीलंका क्रिकेट के उपाध्यक्ष पद के लिए भी चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सुमतिपाला के हाथों अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा। 2017 में जब लंका ने जिम्बाब्वे के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला गंवाई, तब रणतुंगा ने अपने फेसबुक पेज पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया।
उस पोस्ट में, पूर्व श्रीलंकाई कप्तान ने बताया कि 2011 के विश्व कप में श्रीलंका के हारने से वह कैसे चौंक गया थे। उन्होंने तत्काल जांच की मांग की और कहा कि उन्हें उस टीम के कुछ लोगों पर संदेह है। पूर्व श्रीलंकाई कप्तान ने सनसनीखेज दावा किया कि 2011 विश्व कप का फाइनल फिक्स था और यही कारण है कि भारत चैंपियन बना।

1. हार्दिक पांड्या का विवादित बयान
कॉफी विद करन में हार्दिक पांड्या और केएल राहुल ने जो विवाद खड़ा करवाया उससे पूरा भारत परिचित है। इस चैट शो के दौरान लड़कियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों ने हार्दिक-राहुल का करियर ही बहुत पीछे धकेल दिया। इस दौरान हार्दिक ने ना केवल कई लड़कियों से अपने संबंध होने की बात स्वीकारी बल्कि लड़कियों को लेकर उनका नजरिया भी इज्जत से परे थे। इसको लेकर जमकर बवाल हुआ और हार्दिक को अपने टीम इंडिया से सस्पेंड होकर अपने घर में छुपकर रहना पड़ा। यही स्थिति कमोबश राहुल की थी।
हार्दिक और राहुल को इस दौरान भयंकर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा और भारतीय क्रिकेट टीम में खुले समर्थन के बावजूद उन्होंने अपने कप्तान से भी नैतिक सपोर्ट खो दिया था। इस स्थिति को संभलने में लंबा समय लगा और बाद में हार्दिक व राहुल विश्व कप भी खेले। बाद में हार्दिक को चोट और राहुल को खराब फार्म से जूझना पड़ा लेकिन दोनों ही खिलाड़ियों ने अपने तरीके से मुश्किल परिस्थितियों से निजात पाई।
राहुल जहां इस समय शानदार फार्म में चल रहे हैं तो वहीं हार्दिक अपनी पीठ की सर्जरी के बाद रिहैब प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
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