
10. मिशेल जॉनसन
मिशेल जॉनसन शुरू से एक शानदार गेंदबाज रहे लेकिन बाद में उन्होंने अपने आतंक बल्लेबाजों में और भी ज्यादा तब बढ़ा दिया जब वे बल्लेबाजों पर तेज गति की बाउंसर्स का भी इस्तेमाल करने लगे। बाद में उनकी मूछें भी बल्लेबाजों को आतंकित करने लगी थी। ऐसा उनके शानदार करियर के अंतिम कुछ वर्षों में हुआ। 2013/14 में एशेज सीरीज में उनके प्रदर्शन को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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जॉनसन 2015 के अंत तक रिटायर हो गए, लेकिन उनका योगदान उन्हें इस लिस्ट में जगह देने के लिए पर्याप्त था। इस दौरान 43 टेस्ट में, उन्होंने 28.68 की औसत से 176 विकेट लिए। इसमें इंग्लैंड के खिलाफ 2013/14 में एक सीरीज में रिकॉर्ड 37 विकेट के साथ न भूलने वाला प्रदर्शन शामिल है। इसमें 8 बार पांच विकेट और 2 बार दस विकेट शामिल थे।

9. रंगना हेराथ
रंगना हेराथ इस सूची में एकमात्र खिलाड़ी हैं जिन्होंने पिछली शताब्दी (1999) में अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। मुथैया मुरलीधरन की उपस्थिति ने उन्हें कभी भी श्रीलंकाई इलेवन में अपने लिए जगह बनाने की अनुमति नहीं दी, लेकिन वे अपनी जगह के लिए लड़ते रहे। एक बार मुरली ने खेल से संन्यास ले लिया तो हेराथ ने अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने दिखाया।
बिना किसी बहुत विविधता के उन्होंने लगातार सटीकता से प्रदर्शन करके बल्लेबाजों को तंग किए रखा। पाकिस्तान के खिलाफ 127 रनों पर 9 विकेट लेकर एक पारी में दशक के सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत आंकड़े भी उन्होंने दर्ज किए। यह बाएं हाथ के स्पिनर के लिए भी सर्वश्रेष्ठ आंकड़े हैं।

3. वार्नोन फिलेंडर
नवंबर 2011 में अपनी शुरुआत करने के बाद, इस दक्षिण अफ्रीकी अपने आगमन की घोषणा करने में बहुत समय नहीं लिया और 50 टेस्ट विकेट का दावा करने वाले दूसरे सबसे तेज गेंदबाज बन गए।
अपने पदार्पण के दो साल बाद, वह ICC टेस्ट रैंकिंग के शिखर पर पहुंच गए और अपने देश के डेल स्टेन से प्रतिस्पर्धा का सामना करने के बावजूद काफी समय तक शीर्ष पर बने रहे। हेराथ की स्पिन की तरह फिलेंडर तेजी में सटीकता के कारण मशहूर हैं।
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60 टेस्ट मैचों में, उन्होंने 22.16 के औसत दिमाग के साथ 216 विकेट चटकाए, जो इस सूची में वर्णित सभी गेंदबाजों में सर्वश्रेष्ठ है। पिछले 12 महीनों में वह उतना अच्छा और शक्तिशाली प्रदर्शन नहीं दिखा रहे हैं लेकिन उम्मीद है अभी भी इस खिलाड़ी के पास बहुत कुछ करना बाकी है।

7. ईशांत शर्मा
भारतीय टीम का यह गेंदबाज इस समय अपने शीर्ष पर चल रहा है। ईशांत टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाज भी हैं। न्यूज़ीलैंड, इंग्लैंड या दक्षिण अफ़्रीका के यादगार दौरों में उनके कुछ प्रदर्शन उनकी टीम को जीतने वाला परिणाम नहीं दे सके, लेकिन उन्होंने जो कुछ भी योगदान दिया वह भूलने लायक नहीं है। इस दशक के दो सबसे यादगार स्पैल में एक 2014 में लॉर्ड्स में आया, जहां उन्होंने भारत को क्रिकेट के मक्का में एक दुर्लभ जीत दर्ज करने में मदद की और दूसरा भारत के पहले गुलाबी गेंद टेस्ट में आया।
ईशांत ने इस दशक में 77 टेस्ट खेले, इससे ज्यादा मैच केवल विराट कोहली ने ही पार किए। इस अवधि में, उन्होंने 32.28 की औसत से 238 विकेट लिए। इनमें से अधिकांश विकेट कठिन परिस्थितियों में आए।

6. मिशेल स्टार्क
मिशेल स्टार्क ने दिसंबर 2011 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और चोटों के बावजूद अपने प्रदर्शन से ऑस्ट्रेलियाई टीम पर काफी प्रभाव डाला। उनके शुरुआती कुछ वर्षों में वह एक उतने प्रभावी नहीं थे लेकिन बाद में एक ऐसे गेंदबाज के तौर पर विकसित हुए जिसका खौफ बल्लेबाजों में देखा गया।
स्टार्क तीनों प्रारूपों के गेंदबाजों हैं। उन्होंने महज 54 टेस्ट में 229 विकेट चटकाए, जो 27.57 की शानदार औसत से आए हैं। उन्होंने 12 बार पांच विकेट लिए और दो बार 10 विकेट लिए।
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5. स्टूअर्ट ब्रॉड
संभवतः इस दशक में सबसे शानदार तेज गेंदबाजी जोड़ी स्टुअर्ट ब्रॉड व जेम्स एंडरसन की देखी गई।
ब्रॉड ने अपनी गति में सुधार किया और जिस तरह से वे पिच पर गेंद को टप्पा खिलाकर मूवमेंट करते हैं उसने बल्लेबाजों को बहुत मुश्किल में डाला। उन्होंने नॉटिंघम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 15 रन देकर 8 विकेट लिए जो उनका सबसे चर्चित स्पैल रहा।
दशक के दूसरा सबसे अधिक विकेट लेने वाले ब्रॉड इन 10 वर्षों में 400 विकेट लेने से महज दो विकेट दूर हैं। वह शायद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट में उस मुकाम तक पहुंच भी जाएंगे। उन्होंने 110 खेलों में 398 विकेट चटकाए, जो 27.75 की औसत से आया और इसमें 14 बार पांच और 2 बार 10 विकेट लिए।

4. नाथन लियोन
नाथन लियोन को वास्तव में वह श्रेय नहीं मिला जिसके वह हकदार हैं। इस दशक के शुरुआती हिस्से में बहुत प्रभावशाली नहीं थे। फिर भी, वह कड़ी मेहनत करता रहे और लियोन क्लार्क और स्टीव स्मिथ के लिए स्पिन के लिए बेजान ऑस्ट्रेलियाई विकेटों पर एक बड़े हथियार बन गए।
लियोन ने इस दशक में 93 बार टीम का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने इस समय के दौरान 32 से थोड़ा अधिक की औसत से 370 विकेट चटकाए। उन्होंने 16 बार 5 विकेट लिए जबकि 1 बार एक मैच में 10 विकेट उनके खाते में दर्ज हैं।

3. रविचंद्रन अश्विन
इस दशक के शायद सबसे अच्छे स्पिनर रविचंद्रन अश्विन कहे जा सकते हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ नवंबर 2011 में अपनी शुरुआत करने के बाद, अश्विन ने तेज गति से अपने विकेट लेने जारी रखे।
उनको शुरुआत में अपनी विविधता पर कंट्रोल करने में कुछ दिक्कतें आती थी लेकिन बाद में उन्होंने अपनी ऑफ स्पिन पर ज्यादा भरोसा करके विविधता को केवल खास मौकों पर इस्तेमाल किया जिससे उनका कंट्रोल हर तरह की गेंदबाजीं पर बढ़ता गया।
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केवल हेराथ ने इस दशक में एक मैच में 10 बार विकेट लेने के मामले में अश्विन से बेहतर रिकॉर्ड रखा है। अश्विन ने 25.36 की औसत से 70 टेस्ट में 362 विकेट लिए। उनके खाते में 27 बार पांच विकेट शामिल हैं और 7 बार उन्होंने खेल में 10 या उससे अधिक विकेट हासिल किए।

2. जेम्स एंडरसन
स्विंग के बादशाह, जेम्स एंडरसन इस बात के एक आदर्श उदाहरण हैं कि एक तेज गेंदबाज गति नहीं होने के बावजूद सटीकता के साथ क्या हासिल कर सकता है।
वह इस दशक को अपने करियर के सबसे यादगार चरणों में से एक के रूप में याद करेंगे, एशेज को तीन बार (2010/11 में एक बार ऑस्ट्रेलिया में) जीतने के बाद और भारत में एक ऐतिहासिक टेस्ट श्रृंखला जीत दर्ज करना। हालांकि उपमहाद्वीप में अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहने की निराशा के अलावा, एंडरसन के लिए इस दशक में बहुत कुछ शामिल रहा। उन्होंने ग्लेन मैक्ग्रा को तेज गेंदबाजों में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज के रूप में भी पीछे छोड़ दिया।
105 टेस्ट मैचों में उन्होंने 427 विकेट लिए, जो किसी भी गेंदबाज द्वारा लिए गए सबसे अधिक विकेट थे और यह सब 24.19 के औसत के साथ हुआ। इसमें इंग्लिश लैजेंड 20 बार पांच और 3 बार एक मैच में 10 विकेट हासिल किए।

1. सबसे महान डेल स्टेन
स्टेन दशक के नहीं बल्कि टेस्ट इतिहास में खेले गए महानतम तेज गेंदबाजों में एक हैं और उनके दर्जे के गेंदबाज को खोजना मुश्किल काम होगा। दक्षिण अफ्रीकी लीजेंड ने कई मैचों में अविस्मरणीय जीत हासिल की। स्टेन ने आईपीएल 2019 के ठीक बाद अपने टेस्ट रिटायरमेंट की घोषणा की।
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स्टेन ने अपनी कम लंबाई वाली रणनीति, दाएं हाथ के बल्लेबाजों को छोड़ती उनकी गेंद और दूसरे तरीके से बल्लेबाजों को परेशान रखा। उन्होंने हमेशा चीजों को सरल और चुस्त रखा, जो उन युवाओं के लिए एक आदर्श उदाहरण हैं जो इस खेल को एक पेशे के रूप में चुनना चाहते हैं। एक बार स्टेन के फुल चार्ज होने के बाद उनकी उर्जा मैदान पर अतुलनीय थी। इसके चलते उनका नाम स्टेनगन भी पड़ा जो बल्लेबाजों पर अपने गेंद के साथ वैसे ही बरस पड़ते थे।
उन्होंने 59 मैचों में 22.29 के औसत से 267 विकेट चटकाए, जिसमें 15 बार पांच और 2 बार विकेट शामिल हैं। उन्होंने सूची में वर्णित सभी गेंदबाजों के बीच सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइक-रेट भी निकाला, जिसमें हर 43.9 गेंद पर विकेट लिए।


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