1st Test: बॉयकॉट ने बताई नॉटिंघम में इंग्लिश बल्लेबाजों के फेल होने की वजह, क्यों भारतीय गेंदबाज रहे बेस्ट
नई दिल्ली। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ज्यॉफ्री बॉयकॉट ने भारत और इंग्लैंड के बीच नॉटिंघम में खेले गये पहले टेस्ट मैच के बाद इंग्लिश खिलाड़ियों की जमकर आलोचना की है और भारतीय गेंदबाजी के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी एप्रोच को लेकर जमकर लताड़ा है। नॉटिंघम के मैदान पर खेले गये इस मैच में भारतीय टीम जीत की कगार पर थी और विराट सेना को 5वें दिन जीत के लिये 157 रनों की दरकार थी और इंग्लैंड को जीत के लिये 9 विकेट चटकाने थे, हालांकि 5वां दिन बारिश के चलते पूरी तरह से धुल गया और मैच ड्रॉ पर खत्म हो गया।
इंग्लैंड की टीम लिये इस मैच में कप्तान जो रूट को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज रन नहीं बना सका और पहली पारी में जहां उनकी टीम 183 रन पर ऑल आउट हो गई थी तो वहीं पर दूसरी पारी में इंग्लैंड की टीम 303 रन पर सिमट गई थी। उल्लेखनीय है कि इंग्लैंड का बल्लेबाजी क्रम पिछले काफी समय से संघर्ष करती नजर आ रही है, जिसमें न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई 2 मैचों की टेस्ट सीरीज भी शामिल है।
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अच्छी गेंद फेंकने पर खुद का विकेट गंवा बैठते हैं इंग्लिश बल्लेबाज
इंग्लिश टीम का बल्लेबाजी क्रम का संघर्ष भारत के खिलाफ भी देखने को मिला, हालांकि कप्तान जो रूट ने शानदार बल्लेबाजी की और पहली पारी में 64 रन और दूसरी पारी में 109 रनों की पारी खेली। बॉयकॉट ने टेलिग्रॉफ में लिखे अपने कॉलम में समझाया कि कैसे कुछ बल्लेबाज गेंद को छेड़ने की अपनी इच्छा को दबा नहीं सके और गेंद पर तब बल्ला लगाया जब उसकी दरकार नहीं थी। बल्लेबाजों का वनडे प्रारूप के प्रति हद से ज्यादा ध्यान देना टेस्ट क्रिकेट में उनकी परेशानी की वजह बन रहा है।
उन्होंने लिखा,'मैं हाल ही में ग्राहम कूच से टकराया था और हमने इंग्लैंड की बल्लेबाजी को लेकर काफी बात की। उन्होंने सिर्फ यह कहकर बात खत्म किया कि फियरी, अगर गेंदबाजों ने पहली 4 गेंदों को टाइट रखा तो हमारे बल्लेबाज 5वीं गेंद पर मारने के लिये जायेंगे और हो सकता है कि छठी गेंद पर वो खुद का विकेट गंवा बैठे।'

डिफेंस करना नहीं जानते हैं इंग्लिश बल्लेबाज
बॉयकॉट ने आगे लिखा कि क्रिकेट की संस्कृति में काफी बदलाव आ चुका है, हमारे बहुत सारे बल्लेबाज शॉट लगाना पसंद करते हैं और मौजूदा समय के वनडे क्रिकेट को देखते हुए नये जमाने के खिलाड़ी ऐसा करने में काफी सक्षम हैं लेकिन यह उनकी डिफेंसिव तकनीक है जो उन्हें मुश्किलों में लेकर जाती है।
उन्होंने कहा,'फ्रैंचाइजी लीग के कल्चर में यह सुनने में काफी अनफैशनेबल लगेगा कि आपके डिफेंसिव रहना है लेकिन जैसा कि गूची ने कहा टीम को बस कुछ अच्छी गेंदे ही फेंकनी होती है और वो बड़ा शॉट खेलने पर मजबूर हो जाते हैं।'

सिर्फ शॉट लगाने की ओर देखते हैं आजकल के बल्लेबाज
पूर्व इंंग्लिश कप्तान ने आगे कहा कि आप जैक क्राउली का उदाहरण देख लीजिये और कहा कि हर गेंद को मारने की उनकी चाहत के चलते ही इंग्लिश बल्लेबाज पहले टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये।
उन्होंने कहा,'हम एक फैन के तौर पर काफी निराश हुए हैं क्योंकि वो लगातार अटैक करने के लिये देख रहे थे लेकिन हमें ज्यादा हैरान नहीं होना चाहिये क्योंकि जिस तरह की वो क्रिकेट खेलते हैं और देश में जिस स्तर पर उन्हें सिखाया जाता है उसका नतीजा यही होना है। आप जैक क्राउली की ओर देख लीजिये, वह इस समस्या का सबसे बड़ा शिकार है। पिछले कुछ सालों में इस युवा बल्लेबाज को हर गेंद पर मारना सिखाया है जैसा कि वनडे मैच में सभी करते नजर आते हैं। फिर टेस्ट मैच में उसके स्ट्राइक रेट पर बात करते हैं जो कि पूरी तरह से बकवास है। अगर आप खुद को डिफेंड नहीं कर सकते तो टेस्ट मैच का कोई भी अच्छा गेंदबाज नई गेंद से आपकी कमजोरी को ढूंढ सकता है। इतने सारे शॉट खेलने का क्या फायदा जब आप खुद को डिफेंड ही नही कर सकते हैं।'
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