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'नहीं चाहता भारत-पाकिस्तान के राजनीतिक झमेले में फंसना', कश्मीर प्रीमियर लीग से मोंटी पनेसर ने वापस लिया नाम

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तीखे राजनीतिक रिश्तों का असर दोनों देशों के बीच होने वाली खेल प्रतिस्पर्धाओं पर भी पड़ा है जिसके चलते दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ पिछले लगभग एक दशक में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ही कोई मैच खेला है, इसके अलावा किसी भी खेल में भारतीय टीम पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलती है। इस बीच आये दिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की ओर से बीसीसीआई को उकसाने के लिये अक्सर कोई न कोई विवादित कदम उठाया जाता रहा है। इस फेहरिस्त में नया मामला कश्मीर प्रीमियर लीग का आयोजन है।

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पीसीबी और बीसीसीआई के बीच इस मुद्दे को लेकर खींचतान जारी है जिसके बीच इंग्लैंड के पूर्व लेग स्पिनर मोंटी पनेसर ने लीग में शामिल होने से खुद को अलग कर लिया है और अपना नाम वापस ले लिया है।

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पनेसर ने किया केपीएल से बाहर रहने का फैसला

पनेसर ने किया केपीएल से बाहर रहने का फैसला

पनेसर ने कश्मीर प्रीमियर लीग का हिस्सा न बनने के पीछे भारत और पाकिस्तान के बीच जारी विवाद को कारण बताया और कहा कि वो किसी भी प्रकार के राजनीतिक विवाद में नहीं फंसना चाहते हैं। इसको लेकर उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर पुष्टि की।

उन्होंने लिखा,'मैंने निर्णय लिया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर जो राजनीतिक टेंशन है उसको देखते हुए केपीएल का हिस्सा नहीं बनूंगा, मैं इसके बीच में फंसना नहीं चाहता क्योंकि मैं इसको लेकर असहज हूं इसलिये मैंने लीग में नहीं खेलने का फैसला किया है।'

गिब्स ने लगाये थे बीसीसीआई पर दबाव बनाने के आरोप

गिब्स ने लगाये थे बीसीसीआई पर दबाव बनाने के आरोप

भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर की सीमा को लेकर विवाद है जिसमें पाकिस्तान भारत के अभिन्न राज्य कश्मीर पर अपना दावा करता है और कुछ हिस्से पर कब्जा भी किया हुआ है। यह मामला पहली बार चर्चा में तब आया जब साउथ अफ्रीकी टीम के पूर्व बल्लेबाज हर्शेल गिब्स ने बीसीसीआई सचिव जय शाह और बोर्ड पर आरोप लगाया कि वो उन्हें केपीएल में न खेलने के लिये बाध्य कर रहे हैं।

गिब्स ने दावा किया कि बीसीसीआई की ओर से उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि अगर वो कश्मीर प्रीमियर लीग का हिस्सा बनते हैं तो उन्हें भारत में किसी भी प्रकार के क्रिकेट संबंधित कार्यक्रम में शामिल होने की इजाजत नहीं दी जायेगी और साथ ही आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में कॉमेंट्री या कोचिंग जैसे कार्यों में शामिल होने से भी बैन लगाया जायेगा।

बीसीसीआई ने दिया था करारा जवाब

बीसीसीआई ने दिया था करारा जवाब

वहीं पर गिब्स के इस बयान के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी समेत पीसीबी के कई अधिकारियों ने भी बीसीसीआई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वो खेल और राजनीति को एक करने की कोशिश कर रहे हैं।

इसको लेकर बीसीसीआई ने भी बयान जारी कर करारा जवाब दिया और कहा कि लगता है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड गलतफहमी का शिकार है। जिस तरह से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल में नहीं खेलने देने का फैसला बीसीसीआई का आंतरिक फैसला है ठीक उसी प्रकार से भारत के किसी राज्य मे खेली जा रही लीग में खेलने या न खेलने का फैसला भी आंतरिक है। पीसीबी एक ऐसे खिलाड़ी की बात को लेकर सवाल कर रहा है जिस पर मैच फिक्सिंग में शामिल होने के आरोप हैं। यह सच है कि भारतीय क्रिकेट की विश्व स्तर पर अधिक मौके देने वाले बोर्ड के रूप में मान्यता प्राप्त है लेकिन पीसीबी को इससे जलन नहीं होनी चाहिये।'

Story first published: Monday, August 2, 2021, 20:44 [IST]
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