नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) तो अब देश में ब्राहमणों, राजपूतों, कायस्थों और दूसरी तमाम जातियों और मजहबों के लोग अपने बैडमिंटन और दूसरे खेलों के टुर्नामेंट आयोजित करेंगे? इस सवाल का जवाब हां में लगता है। इसकी शुरूआत हो रही है। कर्नाटक के बेलगाम जिले में सिर्फ दैवदन्य ब्राहमणों की एक बैडमिंटन चैंपियनशिप आयोजित हो रही है।
ब्राहमण आगे बढ़ें
इस चैंपियनशिप के आयोजन से जुड़े हुए श्रीनिवास कुडटरकर ने वन इंडिया को बेलगाम से फोन पर बताया कि हम भी चाहते हैं कि हम ब्राहमण मिल-जुलकर आगे बढ़ें।
एंट्री नहीं मिलेगी
हालांकि उन्होंने कहा कि हमें वैसे गैर-ब्राहमणों से कोई परहेज नहीं है। पर इस चैपिंयनशिप में गैर-ब्राहमणों को एंट्री नहीं मिलेगी। बेलगाम के तिलक वाड़ी क्लब में इस अनोखी चैंपियनशिप का आयोजन हो रहा है 20 और 21 जून को। इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ी 15 जून तक अपनी एंट्री भेज सकते हैं।
मराठीभाषी बेलगाम
बता दें कि बेलगाम कर्नाटक का महाराष्ट्र से सटा जिला है। यहां पर मराठी भाषी बहुमत में हैं। इस ब्राहमणों के लिए आयोजित हो रही बैडमिंटन प्रतियोगिता पर टिप्पणी करते हुए हिन्दुस्तान टाइम्स के पूर्व खेल संपादक डी.पी. सिंहने कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि अब जातियों पर आधारित प्रतियोगिताएं होने लगी हैं। उन्होंने कहा कि मुझे इस तरह के आयोजन से आपत्ति है।