
32 साल बाद हुआ कारनामा
27 वर्षीय पारुपल्ली कश्यप 32 वर्षों में भारत के पहले ऐसे पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया है। उनकी इस महान जीत ने उनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया है।

इस बार मिली कामयाबी
कश्यप ने वर्ष 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान एकल मुकाबले में कांस्य जीता था। इस बार उन्हें बड़ी कामयाबी हासिल हुई है।

वर्ष 2012 में मिला पुरस्कार
कश्यप को वर्ष 2012 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था। फिलहाल उनकी वर्ल्ड रैंकिंग 14 है और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उनकी रैंकिंग में सुधार आने की पूरी उम्मीद है।

प्रकाश पादुकोण से ली ट्रेनिंग
कश्यप हैदराबाद के रहने वाले हैं। उनके पिता की जॉब की वजह से उन्हें एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता था। वह कुछ दिनों तक बैंगलोर में रहे और यहां पर उन्होंने प्रकाश पादुकोण की एकेडमी में हिस्सा लिया।

आस्थमा के हो गए शिकार
वर्ष 2004 में कश्यप को आस्थमा पता चला। उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो चुका है लेकिन फिर उन्हें पुलेला गोपीचंद का साथ मिला। गोपीचंद ने उन्हें ट्रेनिंग दी और आज कश्यप भारत के विजेता बनकर उभरे हैं।


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