Teachers Day: अगर ये नहीं होते तो शायद सचिन- विराट और सिंधु भी नहीं होते..
नई दिल्ली। आज शिक्षक दिवस है, भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन (5 सितंबर) भारत में 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है। बिना शिक्षक या गुरु के, कोई भी व्यक्ति अपनी मंजिल को पा नहीं सकता है, इतिहास गवाह है कि उन्होंने ही तरक्की की है जिनके पास गुरु थे। अर्जुन से लेकर तेंदुलकर तक, विराट से लेकर सायना तक, देश का नाम रौशन करने वाले इन सितारों के पास एक अलौकिक गुरु है, जिनके बताये मार्ग पर चलकर खेल जगत के इन नयाब सितारों ने सफलता का परचम लहराया है।
चलिए मिलते हैं देश के होनहार खिलाड़ियों के महान शिक्षकों से

सचिन तेंदुलकर- रमाकांत अचरेकर
इंडियन क्रिकेट में भगवान का दर्जा प्राप्त 'भारत रत्न' सचिन तेंदुलकर ने कई बार कहा है कि वो आज तक जो कुछ भी हैं उसके पीछे तीन लोगों का बहुत बड़ा हाथ है। पहले उनके बड़े भाई अजीत तेंदुलकर, दूसरा गुरु रमाकांत अचरेकर और तीसरा उनकी मां रजनी तेंदुलकर का। रमाकांत अचरेकर केवल उनके गुरु ही नहीं बल्कि उनके मेंटर भी है, जिनकी तपस्या और शिक्षा के बदौलत वो आम सचिन तेंदुलकर से 'द ग्रेट सचिन तेंदुलकर' बन गए। ऐसे महान खिलाड़ी और गुरु को दिल से सलाम।

पुल्लेला गोपीचंद
कहते है ना गुरु हमेशा देता है..उसका शिष्य अगर सफलता के शिखर पर आगे बढ़ता है तो ये ही उसकी रीयल कमाई होती है। पुल्लेला गोपीचंद भी उन्हीं महान गुरुओं में से एक हैं, जिन्होंने बैडमिंटन के ऐसे नायाब सितारे इंडिया को दिये हैं, जिनका कर्ज भारत, कभी भी उतार नहीं सकता है। सानिया, श्रीकांत और पीवी सिंधु जैसे शटलर स्टार्स गोपीचंद के ही मार्गदर्शन में आज देश की आन-बान-शान बने हैं। ऐसे महान खिलाड़ी और गुरु को दिल से सलाम।

विराट कोहली-राजकुमार शर्मा
आज पूरी दुनिया टीम इंडिया के टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली की मुरीद है। लेकिन इस कोहली को विराट बनाने में सबसे बड़ा हाथ उनके गुरु राजकुमार शर्मा का है। जिनके लिए आज भी कोहली छोटा बच्चा ही है। कोच राजकुमार शर्मा के कठिन नियमों और मार्गदर्शन की ही वजह से आज विराट जैसा सितारा सफलता के आसमान पर टीम इंडिया के कप्तान के रूप में जगमगा रहा है, ऐसे महान खिलाड़ी और गुरु को दिल से सलाम।

दीपा करमाकर-बिशेस्वर नंदी
भारत में पहली बार जिमनास्ट को बुलंदियों तक पहुंचाने वाली दीपा करमाकर अपनी सफलता का श्रेय कोच बिशेस्वर नंदी को ही देती है। दीपा ने कहा था कि अगर नंदी सर नहीं होते तो शायद वो भी कभी इस खेल में आगे नहीं बढ़ पातीं। उन्हें तो इस गेम के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था लेकिन नंदी सर के दिये हौसले की वजह से ही आज पूरा देश दीपा करमाकर को पहचानता है। ऐसे महान गुरु को दिल से सलाम।

साक्षी मलिक- कुलदीप मलिक
आज साक्षी मलिक किसी परिचय की मोहताज नहीं, साक्षी मलिक देश के उस हिस्से से आती हैं जहां महिलाओं या लड़कियों को पहलवानी में करियर बनाने के लिए रोका जाता है, लेकिन साक्षी की हिम्मत ने सारी दीवारों को तोड़ते हुए आज विरोध करने वालों के मुंह बंद कर दिये हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि साक्षी की इस हिम्मत के पीछे कौन है, तो सुनिये उनकी हिम्मत हैं उनके कोच कुलदीप मलिक, जिन्होंने कभी भी साक्षी को निराश या हिम्मत नहीं हारने दिया। ऐसे महान गुरु को दिल से सलाम।
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