बिंद्रा ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह यह महसूस करते हैं कि यह कोई मुद्दा है ही नहीं। बकौल बिंद्रा, "मैं पिछले तीन साल से वाडा के इस उपनियम का पालन कर रहा हूं। मुझे तो इससे आज तक किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। मैं तो कहता हूं कि यह हर एक एथलीट की जिम्मेदारी है कि वह खेलों को नशामुक्त बनाने के लिए वाडा की मदद करे।"
बिंद्रा ने कहा कि भारतीय क्रिकेटर नियमों की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण इसका विरोध कर रहे हैं। उन्हें न चाहते हुए भी इस नियम को मानना होगा क्योंकि इसके बिना वे अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में खेल ही नहीं सकेंगे।
बकौल बिंद्रा, "बीसीसीआई को हर हाल में इस नियम को मानना ही होगा। मैं खिलाड़ियों को दोष नहीं देता। उन्हें नियमों की पूरी जानकारी नहीं है। इसमें असुरक्षा या फिर गोपनियता भंग होने का कोई मुद्दा ही नहीं है। ऐसा नहीं है कि आप अपने घर में बैठकर शराब का सेवन कर रहे हों और वाडा के अधिकारी आपका दरवाजा खटखटाकर यह कहना शुरू कर देंगे कि आप यह गलत कर रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।