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कोविड -19 हीरो बना पैरालंपिक हीरो, DM सुहास की पत्नी ने कहा- ये पिछले 6 सालों की मेहनत का फल

नई दिल्लीः सुहास यतिराज ने टोक्यो पैरालिंपिक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया है। 38 वर्षीय ने रविवार को टोक्यो 2020 पैरा गेम्स में रजत पदक जीतकर उपलब्धि को खास बनाया। वे पुरुष एकल SL4 में शीर्ष वरीयता प्राप्त और फ्रांस के विश्व चैंपियन लुकास मजूर से 21-15, 21-15-21 से हार गए। यह एक कांटे का मैच रहा जिसमें सुहास गोल्ड के बहुत करीब पहुंच गए थे।

कर्नाटक में जन्मे इंजीनियर सुहास यतिराज वर्तमान में उत्तर प्रदेश में नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने इस मुकाबले में अपने खेल से विश्व चैंपियनशिप को चौंका दिया। सुहास अधिकतर मौकों पर पूर्ण नियंत्रण में दिखे।

सुहास के सिल्वर मेडल पर पत्नी का पहला रिएक्शन-

सुहास के सिल्वर मेडल पर पत्नी का पहला रिएक्शन-

पहले गेम को 21-15 से जीतने के बाद यतिराज दूसरे गेम में 17-21 से हार गए। भारतीय स्टार ने हार नहीं मानी क्योंकि वह विपक्षी को लगातार छकाते रहे।

यतिराज वर्तमान में SL4 श्रेणी में नंबर 3 पर है। उन्होंने सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को सीधे गेम में हराकर भारत को टोक्यो पैरालिंपिक में एक और पदक दिलाया था।

सुहास की उपलब्धि पर उनकी पत्नी रितु सुहास काफी संतुष्ट हैं। सुहास जहां डीएम हैं तो वहीं रितु गाजियाबाद में एडीएम हैं। उन्होंने कहा है, "ये एक काफी अच्छे तरीके से खेला गया मैच था। मुझे उन पर काफी गर्व है। ये पिछले 6 साल की कठिन मेहनत का नतीजा है।"

Paralympics: थ्रिलिंग फाइनल में गोल्ड के करीब पहुंचकर हारे यतिराज, सिल्वर किया अपने नाम

पति के मैच नहीं देखती रितु-

पति के मैच नहीं देखती रितु-

रितु ने आईएएनएस को यह भी बताया कि उसने पिछले छह सालों में अपने पति का एक भी मैच क्यों नहीं देखा।

पिछले छह वर्षों में अपने पति को खेल में नहीं देखने का कारण बताते हुए रितु ने कहा कि वे ये सोचकर घबरा जाती हैं कि मैच का परिणाम क्या होगा क्योंकि उनके पति पूरी तरह से खेल में शामिल हो जाते हैं।

रितु ने आगे कहा कि सुहास ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की। सरकारी सेवा में होने के बावजूद, उन्होंने अपने खेल के लिए समय निकाला और रात 8 बजे से मध्यरात्रि 12 बजे तक ट्रेनिंग ली। उन्होंने कहा कि उनके कोच ने भी उन पर काफी मेहनत की।

इस उपलब्धि का क्रेडिट केवल सुहास को जाता है- रितु

इस उपलब्धि का क्रेडिट केवल सुहास को जाता है- रितु

उन्होंने कहा, "मेरे पति ने हमेशा खेलों को प्राथमिकता दी है, यही वजह है कि वह आज इस मुकाम पर हैं। मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि वह जीवन में आगे बढ़ें।"

उन्होंने कहा, "खेल के प्रति उनका जुनून ही उन्हें इस मुकाम तक ले गया है। पूरा देश उनके लिए प्रार्थना कर रहा है और उनकी पत्नी होने के नाते मैं भी उनके लिए प्रार्थना कर रही हूं।"

उन्होंने यह भी कहा कि इस उपलब्धि का श्रेय केवल सुहास को ही जाता है, किसी और को नहीं।

कोविड -19 हीरो बना पैरालंपिक हीरो

कोविड -19 हीरो बना पैरालंपिक हीरो

यतिराज नोएडा के गौतमबुद्ध नगर में कोविड-19 प्रबंधन में सबसे आगे रहे हैं। पिछले 6 वर्षों में अपने खेल और प्रशासनिक ड्यूटी को उन्होंने शानदार ढंग से प्रबंधित करने के बाद, यतिराज ने अपनी ट्रेनिंग को जारी रखने के तरीके खोजे।

यतिराज ने हाल ही में 2016 में पेशेवर बैडमिंटन की शुरुआत की, जब वह पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के जिला मजिस्ट्रेट थे। यह एक टूर्नामेंट था जो वहां आयोजित किया गया था जिसने यतिराज का ध्यान खींचा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चुने जाने के बाद, यतिराज प्रतियोगिता में भाग लेना चाहते थे।

यतिराज ने वर्तमान भारत पैरा-बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना के तहत प्रशिक्षण लिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पहले वर्ष में, उन्होंने बीजिंग में एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। अगले वर्ष जापान ओपन और टर्किश ओपन में स्वर्ण पदक जीते और यतिराज ने आईएएस अधिकारी के रूप में अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद पैरा-बैडमिंटन के लिए समय आवंटित करना जारी रखा।

नोएडा के डीएम सुहास का अब तक का पैरालंपिक सफर जानने के लिए यहां क्लिक कीजिए- VIDEO

Story first published: Sunday, September 5, 2021, 11:44 [IST]
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