नई दिल्ली। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी से काफी नाराज हैं। साइना नेहवाल को नाराजगी इस बात से है क्योंकि खेल मंत्रालय ने इस बार भी उनका नाम पदम पुरस्कार के लिए नहीं घोषित किया और साथ ही उनका आवेदन भी खारिज कर दिया।
भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) ने वर्ष 2014 अगस्त में खेल मंत्रालय के पास साइना के नाम की सिफारिश भेजी थी लेकिन उनकी जगह पर मंत्रालय ने दो बार ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार के नाम को इसके लिए मंजूरी दे डाली।
साइना को वर्ष 2010 में पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। साइना नेहवाल ने इस पूरे मसले पर कहा कि मैंने सुना है कि विशेष मामले के तौर पर सुशील कुमार का नाम पुरस्कारों के लिए भेजा गया है जबकि खेल मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को मेरा नाम नहीं भेजा है।
साइना के मुताबिक मंत्रालय के दिशानिर्देश कहते हैं कि दो पदम पुरस्कारों के बीच में पांच साल का अंतर होना चाहिए। इसलिए अगर वे उसका नाम भेज सकते हैं तो उन्होंने मेरे नाम की सिफारिश क्यों नहीं की। साइना की मानें तो उन्होंने पांच वर्ष का समय पूरा कर लिया है और उन्हें बुरा लग रहा है।
मंत्रालय ने किया ना
24 वर्षीय साइना ने दावा किया कि पिछले साल इसी आधार पर उनका आवेदन खारिज कर दिया गया था लेकिन इस साल मंत्रालय ने सुशील के नाम की सिफारिश करने का फैसला किया जबकि उसने पांच साल के अंतर का नियम पूरा नहीं किया है। सुशील को 2011 में पदमश्री मिला था।
साइना ने जानकारी दी कि जब उन्होंने पिछले वर्ष पदम भूषण के लिए अपनी फाइल भेजी थी तो मंत्रालय ने कहा था कि वह इस वर्ष आवेदन नहीं कर सकती क्योंकि उन्होंने इसके लिए पांच वर्ष पूरे नहीं किए हैं। इसलिए उन्होंने इस बार पुरस्कारों के लिए दोबारा अप्लाई किया और फिर भी उनके नाम की सिफारिश नहीं की गई।
साइना ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां
साइना ने अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि उन्होंने 2010 के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक, बैडमिंटन में पहला ओलंपिक पदक, करियर की सर्वश्रेष्ठ दूसरी रैंकिंग और कई सुपर सीरीज खिताब जीते इसलिए उन्हें लगता है कि वह भी हकदार थी। जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें बुरा लगता है।
साइना की मानें तो इस मुद्दे पर उन्होंने उच्चाधिकारियों के साथ शुक्रवार को बात की थी। उन्होंने कहा कि सुशील का नाम पहले ही भेजा जा चुका है। मैं सिर्फ उनसे इस मामले पर गौर करने का आग्रह कर सकती हूं। अगर हम दोनों को पुरस्कार मिल सकता है तो अच्छा रहेगा।
सुशील के साथ उन्हें भी मिले अवॉर्ड
साइना का कहना है कि अगर सुशील का नाम विशेष मामले के तौर पर भेजा जा सकता है तो उनका नाम क्यों नहीं भेजा गया। उनका कहना है कि अगर वे नियमों के मुताबिक भी चलते तो मेरा नाम भेजा जाना चाहिए था।
साइना ने कहा कि अगर उन्हें और सुशील दोनों को पुरस्कार मिलता है तो उन्हें खुशी होगी। उन्होंने कहा कि सुशील महान खिलाड़ी हैं लेकिन पदक तो पदक होता है। हम दोनों ने ओलंपिक में पदक जीते हैं। अगर उन्हें उस विशेष मामले के तौर पर पुरस्कार देना था तो वे 2012 ओलंपिक के बाद ऐसा कर सकते थे। वे अब ऐसा क्यों कर रहे हैं।