बर्मिघम। भारत की शीर्ष वयीरता प्राप्त बैडमिंटन प्लेयर सायना नेहवाल ने जब फाइनल में कदम रखा तो देश भर की निगाहें फाइनल मैच पर टिक गईं। लेकिन विश्व चैंपियन व स्पेन की कैरोलीन मैरीन ने सायना को फाइनल में हरा दिया। लेकिन सच पूछिए तो सायना हार कर भी जीत गई हैं।
500,000 डॉलर इनामी राशि वाले ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप के महिला एकल वर्ग का खिताब जीत कैरोलीन ने जीता। मैरीन ने सायना नेहवाल को 16-21, 21-14, 21-7 से हराया। मैरीन ने अपने करियर में पहली बार सायना को हराया है। इससे पहले के तीन बार सायना से हुए मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
सायना इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला रहीं। लेकिन अफसोसवश वो यह खिताब नहीं जीत सकीं।
फिर भी गर्व है सायना पर
खेल की परम्परा है, कोई जीता तो कोई हारा, लेकिन मनोबल नहीं टूटना चाहिये। सायना नेहवाल ने इस टूर्नामेंट के फाइनल में हार कर भी जीत दर्ज की है। सही मायने में तो उन्होंने सभी भारतीयों के दिलों को जीत लिया है।
वो इसलिये क्योंकि बैडमिंटन इतिहास में सायना से पहले सिर्फ दो भारतीय खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद (2011) और प्रकाश पादुकोण (1980) ही ऑल इंग्लैंड ओपन के फाइनल में पहुंचने में सफल रहे हैं। दोनों ने खिताब जीता था। वहीं सायना देश की पहली महिला बैडमिंटन प्लेयर हैं जो इस लेवल तक पहुंचीं।
क्या बोलीं सायना
सायना ने मुकाबले के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि मैच के बीच में उनका फोकस टूट गया औन वो नर्वस हो गईं। सायना ने कहा कि पहले सेट को जीतने के बाद मैं जल्दबाजी करने लगी, उसी की वजह से एकाग्रता भंग हो गई और बाकी के दो सेटों में सीधी हार मिली।
वहीं मैरीन ने भी सायना को सलाम करते हुए कहा, "मैं सायना से हर बार हारी, वो वाकई में बेहतरीन खिलाड़ी हैं। सायना को इस टूर्नामेंट में हराकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मेरे लिये गर्व की बात है कि मैंने सायना जैसी बेहतरीन खिलाड़ी को टक्कर दी।"