
5 साल की उम्र में ही किरन मोरे को भा गए थे पांड्या
आंखों में सपने भरे क्रुनाल पांड्या (7) और हार्दिक पांड्या (5) के पिताजी अपने दोनों बच्चों को जब पूर्व भारतीय विकेट कीपर किरन मोरे की क्रिकेट एकेडमी में ले गए तो मोरे ने उन्हें एडमिशन देने से मना कर दिया। दरअसल मोरे की एकेडमी में 12 साल से कम उम्र के बच्चों को एडमिशन नहीं मिलता था। हालांकि हार्दिक के पिता को अपने बच्चों के टैलेंट पर विश्वास था। उन्होंने किसी तरह मोरे को मनाया और कहा कि आप एक बार बच्चों का स्किल टेस्ट लेकर देख लीजिए। इसके बाद जो हुआ वो हर कोई जानता है। दोनों भाइयों ने उस छोटी सी उम्र में क्रिकेट को बारीकियों के साथ खेला था। उसी दिन से किर मोरे की एकेडमी के रूल हमेशा के लिए बदल गए। दोनों को एडमिशन मिल गया। एक जगह इंटरव्यू में मोरे ने पांड्या के पहले दिन के बारे में अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा कि पहले तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि ये दोनों बच्चे इस उम्र में क्रिकेट को बारिकी से परख रहे हैं।

गरीबी से उबरकर निकला है ये हीरा
- हार्डिक पांड्या एक आर्थिक रूप से मजबूत परिवार से नहीं है। उनके परिवार को दिन में एक बार भोजन करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा है।
- पांड्या के पिता ने उनके क्रिकेट करियर के लिए बहुत बलिदान किया है। वे पांड्या की ट्रेनिंग के लिए सूरत से बांद्रा आकर बस गए।
- किरण मोरे ने अपनी अकादमी में पहले तीन वर्षों के लिए हार्दिक पांड्या से कोई फीस नहीं ली।
- हार्दिक के साथी ने उन्हें "रॉकस्टार" कहकर बुलाते हैं। सर जडेजा ने टीम में उन्हें ये उपनाम दिया गया था।

आईपीएल में मुंबई इंडियंस के हीरो हैं दोनों भाई
5. इरफान पठान और यूसुफ पठान दो करीबी दोस्त हैं।
6. लोग अक्सर पांड्या को 'बड़ौदा का पश्चिम भारतीय' कहते हैं। दरअसल इसके पीछे पांड्या का अपना युनिक स्टाइल है।
7. 2015 में जॉन राइट ने पांड्या के टैलेंट में क्षमता देखी और उन्हें आईपीएल की मुंबई इंडियंस टीम में शामिल कर लिया।
8. हार्दिक पांड्या 9वीं कक्षा फेल हैं। क्योंकि उन्होंने क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पढ़ाई छोड़ दी थी।

गरीबी के कारण मैगी खाकर करते थे गुजारा
9. शुरू में हार्दिक पांड्या लेग स्पिनर थे, लेकिन किरण मोरे की मदद से वह एक मिडियम तेज गेंदबाज बन गए।
10. पांड्या मैदान पर अपनी आक्रामकता के लिए प्रसिद्ध है।
11. दिल्ली के खिलाफ सईद मुश्ताक अली ट्राफी में पांड्या ने एक ओवर में 39 रन जड़े थे।
12. किरण मोरे ने दोनों का नाम 'मैगी ब्रदर्स' रखा दोनों भाईयों की मेहनत और कौशल की तारीफ करते हुए किरण मोरे ने दोनों का नाम 'मैगी ब्रदर्स' रखा है क्योंकि अकेडमी में खेलते वक्त दोनों अक्सर मैगी खाकर अपनी भूख शांत कर लेते थे क्योंकि दोनों के पास इतने पैसे नहीं थे वो पेट भरकर पौष्टिक भोजन खा सके जो कि उनकी फिटनेस और क्रिकेट खेलने के लिए खासा जरूरी थे।


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