
ऋषभ पंत नहीं रुके- चोपड़ा
चोपड़ा ने ईएसपीएन क्रिकइन्फो के लिए अपने कॉलम में लिखा,"अंतिम दिन पंत का खेल या तो स्विंगिंग गेंद के खिलाफ उनको अपने कौशल पर विश्वास था, या शायद वह अपनी प्रतिष्ठा के पिंजरे में फंस गए थे। हमने उन्हें हर तरह के अविश्वसनीय काम करते देखा है। टेस्ट में जेम्स एंडरसन या सफेद गेंद वाले क्रिकेट में जोफ्रा आर्चर को रिवर्स स्कूप करने का सपना कौन देखेगा?"
हालांकि चोपड़ा ने पंत के बार-बार बाहर निकलने और तेज गेंदबाजों को मारने की कोशिशों को 'अजीब' पाया।
WTC: फिर अपना ही गेम खेलते आउट हुए पंत, ये सही है या गलत? कोहली ने बताई अपनी सोच

आकाश चोपड़ा ने कहा- पेसरों को ऐसे नहीं खेलते पंत
उन्होंने लिखा, "फिर भी, हमने कभी भी पंत को तेज गेंदबाजों पर ऐसे शॉट मारते नहीं देखा, यहां तक कि सफेद गेंद वाले क्रिकेट में भी नहीं देखा था। वह क्रीज से खेलना पसंद करते हैं, या क्रीज के अंदर जाना पसंद करते हैं। इसलिए उनका बाहर निकलना थोड़ा अजीब लगा। क्या उन्हें लंच में बताया नहीं गया था कि उनके तरीके टीम की इच्छा के अनुरूप नहीं थे? या वास्तव में आक्रामक रहने की योजना थी?"
पंत का अटैक ज्यादा समय तक नहीं चला और वे 41 रन बनाकर बोल्ट का शिकार हुए। उन्होंने आगे बढ़कर ही बोल्ट को खेला जहां वे स्विंग से बीट हुए और गेंद हवा में उछालकर कैच आउट हो गए।

...लेकिन इसी नजरिए ने तो पंत को सफलता दिलाई है-
चोपड़ा आगे कहते हैं, "उन्होंने अंतिम दिन की शुरुआत भले ही किसी भी सोच से की हो, लेकिन विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा के दो विकेटों ने उन्हें पहले घंटे में बैकफुट पर ला दिया। अजिंक्य रहाणे कभी शांत नहीं दिखे और ऋषभ पंत अपने मौके लेते रहे। वह भाग्यशाली थे कि लंच पर नॉट आउट रहे।"
भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज, हालांकि, सभी को यह याद दिलाना नहीं भूले कि उन्हीं तरीकों ने पंत को ऑस्ट्रेलिया में और इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में भी सफलता दिलाई।


Click it and Unblock the Notifications
