
अर्श से एकदम फर्श पर आ गए शॉ
19 साल के शॉ के नमूने में जब एक कफ सिरप में मौजूद बैन पदार्थ टरब्यूटालिन पाया गया तब बीसीसीआई ने यह फैसला लिया। शॉ ने इस मामले में खुद अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की थी और उन्होंने दावा किया था कि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान जब वे कोल्ड और कफ से पीड़ित हो गए थे तब मैच खेलने के लिए उनको वह कफ सिरप लेनी पड़ी थी। मैच खेलने के उतावलेपन ने पृथ्वी शॉ को इतना अधीर बना दिया था कि उन्होंने बिना डॉक्टर से सलाह किए वह सिरप पी ली थी।

डोपिंग की खबरों ने दिया डिप्रेशन-
इसी मामले में कुछ दिन पहले ही बीसीसीआई ने अपनी टाइमलाइन रिलीज की थी जिसमें साफ दिखाया गया की पृथ्वी शॉ के नमूने को लेने के बाद पूरे नेशनल डॉप टेस्टिंग लेबोरेट्री ने नतीजे देने में पूरे दो महीने लगा दिए। जिसके चलते यह मुद्दा एक बार फिर से सुर्खियों में छा गया। उसके बाद यह मामला शांत होता कि पहले ही बड़ी खबर ये आ गई कि अब बीसीसीआई नाडा की छतरी के नीचे आ गया है। यानी अब नेशनल डॉपिंग एजेंसी कभी भी किसी भी भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी के सैंपल कलेक्ट कर सकती है। इस मामले ने एक बार फिर से शॉ का नाम खूब उछाला।
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डिप्रेशन से लड़ने शॉ पहुंचे इंग्लैंड
अब पता चला है कि शॉ बार-बार डोपिंग के कारण खबरों में आने की वजह से डिप्रेशन में जा चुके हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वह अपने पर्सनल खर्चे पर इन सबसे दूर रहने के लिए इंग्लैंड के लिए रवाना हो चुके हैं। इस दौरान पृथ्वी ऐसी सभी खबरों से दूर रहना चाहते हैं जिसकी वजह से उनको बार-बार नकारात्मक तरीके से खबरों में रहना पड़ रहा है। बता दें कि शॉ का बैन नवंबर में खत्म हो रहा है। उसके बाद वह भारतीय क्रिकेट टीम में फिर से खेलने के लिए योग्य हो जाएंगे। उस समय भारत और बांग्लादेश की घरेलू सीरीज चल रही होगी।


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