टीम इंडिया के मुख्य कोच अनिल कुंबले ने टीम के अंदर भारतीयता की भावना को डालने की बात कही है। उन्होंने कहा कि टीम के खिलाड़ियों को अपनी पहचान बनाने की जरूरत है। ऐसे में मेरा प्रयास रहेगा कि मैं उन्हें श्रेष्ठ प्रैक्टिस के माध्यम से किस तरह से खिलाड़ी एक दूसरे से बात करते हैं और एक दूसरे के साथ खेलते हैं की ट्रेनिंग दे सकूं।
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कुंबले ने कहा कि यह जरूरी है कि हम यह सब भारतीय तरीके से करें। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि स्लेजिंग भारतीय संस्कृति में नहीं है बल्कि मेरा मानना है कि आप अपने अंदर भारतीयता लाने की कोशिश करें जोकि आप अपने घर परिवार रिश्तेदारों में लाते हैं और उनका सम्मान करते हैं।
कुंबले ने कहा कि भारतीय परिवारों के संस्कार जैसे कि बड़ो का कहना मानना आदि को हमारा संस्कार माना जाता है लेकिन हमारा मकसद कुछ और है, जैसे कि वरिष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ भी आप अपनी राय रख सकते हैं और उनसे अलग मत रख सकते हैं।
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ऐसे में आपको यह सीखना होगा कि अगर वरिष्ठ खिलाड़ी कोई फैसला लेता है तो आप उसका साथ दें लेकिन आपके पास इस बात की भी आजादी होनी चाहिए आप उससे सभ्य तरीके से अलग राय भी रख सके। सभी को अपनी बात रखने की आजादी होनी चाहिए।
खिलाड़ियों के बारे में बोलते हुए कुंबले ने कहा कि यह टीम सुझावों को लेने के लिए आगे रहती है, उन्होंने कहा कि आजकल की जेनेरेशन को देखते हुए यह काफी मुश्किल लग रहा था कि इन खिलाड़ियों के साथ एक कमरे में एक घंटे तक बात करना इतना आसान होगा और ये मेरी बातों को सुनेंगे। लेकिन सभी खिलाड़ियों ने ना सिर्फ मेरी बातों को ध्यान से सुना बल्कि खुद के सुझावों को भी सामने रखा। यही नहीं मेरी अपेक्षा के अनुसार हमने टीम के साथ अधिक समय बिताया।