
1988 का फाइनल:
80 के दशक में भारत की यह क्रिकेट टीम जीत के रथ पर सवार थी एशिया कप में भारत का कोई सानी नहीं था। लीग मुकाबले में भारत और श्रीलंका का मुकाबला हुआ श्रीलंका ने भारत को 17 रन से हराकर जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया। फाइनल में जोरदार मुकाबला होने की उम्मीद थी लेकिन भारतीय टीम ने श्रीलंका को 176 रन पर ही समेट दिया। के श्रीकांत ने तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। इसके बाद भारत की टीम की तरफ से नवजोत सिंह सिद्धू ने 87 गेंद में 76 रन की शानदार पारी खेली और दिलीप वेंगसकर ने 81 गेंद में 50 रन बनाकर भारत को जीत दिला दी। यह मैच 37.4 ओवर में ही खत्म हो गया था।

1990-91 का फाइनल
भारत और पाक के राजनीतिक संबंध में तल्खियों के चलते इस आयोजन से पाकिस्तान ने अपना नाम वापस ले लिया था। इस एशिया कप में भारत ने श्रीलंका से पहले हार झेली और फिर श्रीलंका को फाइनल में हरा दिया था। मैच में सचिन ने शानदार 53 रन की पारी खेली।उनके अलावा संजय मांजरेकर (75) और अजहरुद्दीन (54) ने नाबाद पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई थी। श्रीलंका ने 50 ओवर में 204 रन बनाए थे जिसको भारत ने 42.1 ओवर में ही प्राप्त कर लिया था।

1995 का वो फाइनल:
इस एशिया कप के फाइनल का टिकट भारत और श्रीलंका को रन रेट के आधार पर मिला था और पाकिस्तान को बाहर होना पड़ा था। भारत- 4.85, श्रीलंका - 4.70 और पाकिस्तान का रन रेट 4.59 था। भारत ने श्रीलंका को 50 ओवर में 230 रनों पर रोक दिया और खुद 41.5 ओवर में लक्ष्य प्राप्त कर भारत को एक बार फिर से चैंपियंन बना दिया। भारत की तरफ से ओपनिंग करने आए मनोज प्रभाकर के जल्दी आउट होने के बाद सचिन की 41 रन की पारी और सिद्धू की 104 गेंदों में 84 रन की पारी से भारत जीत के करीब पहुंचा। इसके बाद आगे का काम अजहरूद्दीन ने 89 गेंद में 90 रन की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई।


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