भारत स्थित ऑस्ट्रेलिया उच्चायोग ने एक वक्तव्य जारी कर एक राष्ट्रीय दैनिक में छपी इस ख़बर का ज़ोरदार खंडन किया है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने खेलगाँव में तोड़फोड़ की.
उच्चायोग ने कहा है, "टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी यह ख़बर तथ्यात्मक रुप से ग़लत और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के प्रति अपमानजनक है. इस ख़बर को सिर्फ़ एक फ़ंतासी कहा जा सकता है."
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपने पहले पन्ने पर छपी एक रिपोर्ट में लिखा था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम के सदस्य क्रिकेट में अपने खिलाड़ियों की हार से इतना क्षुब्ध थे कि उन्होंने अपना आक्रोश फ़र्नीचर पर निकाला.
अख़बार ने वहाँ तैनात पुलिसकर्मियों के हवाले ले लिखा है कि खिलाड़ियों ने सचिन तेंदुलकर के ख़िलाफ़ नारे लगाए और ग़ुस्से में एक वॉशिंग मशीन उठा कर आठवीं मंज़िल से नीचे फेंक दी.
अख़बार की इस ख़बर का सिलेसिलेवार खंडन करते हुए उच्चायोग ने कहा है कि ऑस्ट्रेलियाई दल खेल गांव में कुछ अन्य देशों के खिलाड़ियों के साथ कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी कामयाबी का जश्न मना रहा था और उसी दौरान एक वॉशिंग मशीन क्षतिग्रस्त हो गई.
बयान में कहा गया है, "हांलाकि ये स्पष्ट नहीं है कि किस देश के खिलाड़ी ने वॉशिंग मशीन को क्षति पहुंचाई. ये भी नहीं मालूम कि मशीन को नुक़सान पहुंचाने वाली घटना जानबूझ कर की गई थी या ये कोई दुर्घटना थी."
उच्चायोग ने खेलगांव में हुई घटना को बंगलौर टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई टीम की हार से जोड़ने को निराधार बताया है. अख़बार के यह लिखने पर कि सचिन के ख़िलाफ़ नारे लगे उच्चायोग ने कहा है, "सचिन तेंदुलकर को ऑस्ट्रेलिया में बहुत इज़्ज़त और प्यार दिया जाता है. सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड में एक हालिया ऑनलाइन सर्वे में सचिन तेंदुलकर को ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ चुना था, ब्रेडमैन से भी ऊपर."
भारतीय अख़बार की कड़ी आलोचना करते हुए उच्चायोग ने कहा है कि 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' ने ख़बर छापने से पहले ना तो भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायोग और ना ही 'ऑस्ट्रेलियन कॉमनवेल्थ गेम्स एसोसिएशन' से इसकी पुष्टि करनी चाही.