
कैसा है मौजूदा फॉर्म
भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलियाई दौरे की शुरूआत टी-20 में हार से हुई लेकिन विराट कोहली की टीम इंडिया ने शानदार कमबैक कर कंगारू टीम को दूसरे टी-20 में बैकफुट पर धकेल दिया और मोमेंटम अपने फेवर में किया। बारिश से बाधित दूसरे मैच को नहीं जीतने का मलाल लिए भारतीय टीम ने श्रृंखला1-1 से बराबर कर ली और टेस्ट से ठीक पहले वार्मअप मैच में दूसरे दिन पांच भारतीय खिलाड़ियों ने पचासा जड़ा तो चौथे दिन फॉर्म से जूझ रहे मुरली विजय और लोकेश राहुल ने पृथ्वी शॉ के चोटिल होने के बाद टीम मैनजेमेंट के ओपनिंग स्लॉट के लिए बने 'सिरदर्द' को एक हद तक खत्म कर दिया है। विजय ने एक गेंदबाज के एक ओवर में 26 रन ठोक कर 132 गेंदों में 129 रनों की पारी खेली वहीं लोकेश राहुल ने भी 98 गेंदों में 62 रनों की पारी खेल फॉर्म में लौटने का संकेत दिया।
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डीन जोन्स की सलाह
ऑस्ट्रेलियन लीजेंड डीन जोन्स ने अपने देश के खिलाड़ियों को एक सलाह दी है कि 'टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली को न उकसाएं, उन्हें अपना सबसे बेस्ट दोस्त बनाएं'। विराट हाल के दौर में अपने जीवन के प्राइम फॉर्म में हैं और चिढ़ाने के बाद वो और भी आक्रामक हो जाते हैं लेकिन उन्होंने हाल में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपने आक्रामकता को टीम की जीत के लिए बताया था लेकिन क्रिकेट विश्लेषकों की मानें तो वो इस रूप में ही अपना बेस्ट देते हैं। आखिर विराट से क्यों डर रहे हैं ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज कहीं यह उनकी कोई रणनीति या कोई सोची समझी साजिश तो नहीं।

ऑस्ट्रेलिया को इस तिकड़ी से है डर
अगर टीम इंडिया के पिछले डाउन अंडर-2014ऑस्ट्रेलियाई दौरे की बात की जाए तो टीम भले ही 0-2 से श्रृंखला हार गई थी लेकिन टीम के तीन बल्लेबाजों ने अपने शानदार प्रदर्शन से सबका दिल जीता था। विराट कोहली ने 4 टेस्ट की 8 पारियों में 86.50 की औसत से 692 रन बनाए थे। इस दौरे पर उनका सर्वाधिक स्कोर 169 रन था और उन्होंने इस सीरीज में सबसे अधिक 1093 गेंदों का सामना कर 4 शतक और 1 अर्धशतक लगाए थे। इस दौरे पर टीम इंडिया के दूसरे सबसे सफल बल्लेबाज रहे थे मुरली विजय जिन्होंने 482 रन बनाए जिसमें 1 शतक और 4 अर्धशतक शामिल थे वहीं अजिंक्य रहाणे ने भी इस दौरे पर मिचेल जॉनसन जैसे तूफानी गेंदबाज की बखिया उधेड़ दी थी और 4 मैचों में एक शतक और 2 अर्धशतक के साथ 399 रन बनाए थे। ये तीनों खिलाड़ी अब भी टीम में मौजूद हैं और किसी भी टीम की गेंदबाजी को ध्वस्त करने का माद्दा रखते हैं। टीम इंडिया की मजबूत बल्लेबाजी ऑस्ट्रेलिया के लिए हार की पहली वजह बन सकती है, शायद इसलिए ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज भी इस बैटिंग ऑर्डर को 'सबसे बड़ा खतरा' मान रहे हैं।
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क्या है ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी कमजोरी ?
बॉल टेम्परिंग विवाद के बाद ऑस्ट्रेलिया को 'सबसे कमजोर' टीम की संज्ञा दी जा रही है लेकिन क्या ऑस्ट्रेलियाई टीम वाकई इतनी कमजोर है जितना शोरगुल मच रहा है। डाउन अंडर दौर पर ऑस्ट्रेलियाई टीम के दो खिलाड़ी ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी और वो दोनों टीम में नहीं है। ये दो दिग्गज कोई और नहीं बल्कि स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर हैं। 4 टेस्ट में 769 रनों का अंबार लगाने वाले स्मिथ और 427 रन बनाने वाले वार्नर की गैरमौजूदगी इस टीम के लिए बड़ी चिंता है लेकिन उस्मान ख्वाजा का शानदार फॉर्म और एरॉन फिंच के आक्रमक खेल से भारत को सावधान रहना होगा। ऑस्ट्रेलियाई टीम का मध्यम क्रम भी उतना मजबूत नहीं है जितना यह चार साल पहले था, हाल के दौरे में पाकिस्तान ने भी इस टीम को टी-20 और टेस्ट में पटखनी दी है जिसके बाद इनका मनोबल थोड़ा डाउन माना जा रहा।

पेस अटैक भारत का 'हथियार'
क्रिकेटिंग लीजेंड इयान चैपल ने भारत के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया को जीत का प्रबल दावेदार बताया है हालांकि उन्होंने इसकी वजह तो नहीं बताई लेकिन उन्हें लगता है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत से मजबूत है। हालांकि इनसे अलग एडम गिलक्रिस्ट ने कहा यह गेंदबाजी अटैक किसी भी टीम को ध्वस्त कर सकती है वहीं डेमियन फ्लेमिंग के शब्दों में "यह ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर आई भारतीय टीम की सबसे इम्प्रेसिव बॉलिंग अटैक है ' विराट ने खुद भी इसे सबसे धारदार गेंदबाजी अटैक माना है। क्या भारतीय गेंदबाजी इतनी ही दमदार और शानदार है जितना ये क्रिकेट एक्सपर्ट, फैंस और विश्लेषक मानते हैं।

बुमराह ने बदला समीकरण
अगर डाउन अंडर 2014 के दौरे की बात करें तो कोई भी भारतीय गेंदबाज उस दौरे पर बहुत सफल नहीं हुआ था, मोहम्मद शमी एकलौते सफल गेंदबाज थे जिन्होंने 3 मैच में 35.80 की औसत से 15 विकेट लिए थे वहीं अश्विन 3 मैचों में 584 रन लुटाकर मात्र 12 विकेट लेने में सफल हो पाए थे लेकिन वर्तमान समय में भारतीय पेस अटैक को सबसे बड़ा खतरा माने जाने की वजह अब बदल चुकी है। टीम इंडिया की पेस बैटरी में एक ऐसा खिलाड़ी शामिल हुआ है जो भारतीय टीम के आंकड़े और रिजल्ट दोनों में बदलाव कर रहा है। वो हैं जसप्रीत बुमराह।

एक साल मे हुआ कमाल
अगर पिछले एक साल में टीम इंडिया के प्रदर्शन पर नजर डाली जाए तो दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और विंडीज के खिलाफ पिछले एक साल में खेले गए 9 टेस्ट मैचों में भारतीय गेंदबाजों ने 20 विकेट लिए हैं और यह आंकड़ा ही ऑस्ट्रेलिया के डर की बड़ी वजह बनकर उभरी है। उमेश यादव, मोहम्मद शमी और बुमराह की पेस तिकड़ी के साथ कुलदीप और अश्विन की घूमती गेंदें ऑस्ट्रेलियाई खेमे चिंता बढ़ा रहा है। इतना ही नहीं टीम इंडिया के गेंदबाजों ने पिछले एक साल में (01 जनवरी 2018 से अब तक) खेले गए 11 टेस्ट मैचों में दूसरा सबसे अधिक 197 विकेट लिए हैं। भारतीय गेंदबाजों ने ये 3.07 की इकॉनमी रेट और 24.21 की औसत से ये विकेट चटकाए हैं जो पिछले एक साल किसी भी टेस्ट टीम की दूसरी सबसे शानदार गेंदबाजी है।

इन दो गेंदबाजों को करना होगा सुधार
अगर टीम इंडिया के गेंदबाजों की बात करें तो दो गेंदबाज ऐसे हैं जिनके नाम के आगे ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर ऐसे रिकॉर्ड जुड़े हैं जिन्हें वो इस दौरे में ठीक करना चाहेंगे। इशांत शर्मा और आर अश्विन दो ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया में सबसे अधिक रन देकर सबसे खराब गेंदबाजी की है। सबसे खराब गेंदबाजी करने के मामले में इशांत नंबर-1 पर हैं जिन्होंने 2109 गेंदों में 20 विकेट लिए हैं और उनक औसत 62.05 रहा वहीं आर अश्विन ने 2038 गेंदों में 21 विकेट लिया है। ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर इशांत को लगभग 17.5 ओवर में एक विकेट मिला वहीं अश्विन को 15.5 ओवर में एक सफलता मिली। भारतीय टीम के ये दो दिग्गज अपनी इस पुरानी गलती को ठीक करना चाहेंगे। इन दोनों गेंदबाजों ने इस दौरान 3.5 की औसत से रन लुटाए हैं। टीम इंडिया बल्लेबाजी और गेंदबाजी में पिछले एक साल में काफी मजबूत हुई है अब यह देखना दिलचस्प होगा कि छोटी-छोटी गलतियों को ठीक कर क्या विराट की टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीत पाएगी।


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