नई दिल्लीः डैरेन लेहमान को ऑस्ट्रेलिया का एक ऐसा कोच माना गया जिसने टीम की कल्चर को खराब किया और किसी भी कीमत पर जीतने की जिद टीम में भरी। इन बातों में कितनी सच्चाई है इसके बारे में पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन लेहमान के जमाने में ही सैंड पेपर कांड हुआ था जिसने ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट की प्रतिष्ठता को धूल में मिला दिया था। इसके बाद जस्टिन लैंगर को नेशनल क्रिकेट टीम की कमान सौंपी गई और टीम उभरती चली गई।
पूर्व सलामी बल्लेबाज और ऑस्ट्रेलिया टीम के कोच जस्टिन लैंगर को एक फाइटर और सख्त कोच के रूप में जाना जाता है। एक खिलाड़ी के रूप में भी वह बिना किसी लड़ाई के कभी हार नहीं मानते थे और कठिन समय में हमेशा धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन करते थे। एक कोच के रूप में भी लैंगर ने टीम में खिलाड़ियों में वही गुण पैदा किए हैं और हमेशा निरंतरता के लिए प्रयास करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक खिलाड़ी अब नाखुश हैं और जस्टिन लैंगर और टीम मैनेजर गेविन डोबे की संचालन शैली से संतुष्ट नहीं हैं। 2021 में ऑस्ट्रेलिया के भारत के हाथे 2-1 से हारने के बाद ये खबरे आई थीं। हाई-प्रोफाइल श्रृंखला के दौरान, यह पता चला था कि खिलाड़ियों को लैंगर के कोचिंग करने के बारीक तरीकों से परेशानी है।
सीजन के अंत में जब टीम का रिव्यू किया गया तब लगभग 40 खिलाड़ियों और स्टॉफ का मानना था कि उनको ड्रेसिंग रूम में थोड़ा ज्यादा नियंत्रण और आजादी चाहिए। ये सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड की रिपोर्ट में कहा गया था।
एक और समीक्षा बैठक हुई, जिसका नेतृत्व टीम के नेतृत्व सलाहकार टिम फोर्ड ने किया, जिसका उद्देश्य खिलाड़ियों के दृष्टिकोण को देखना था। फोर्ड ने खिलाड़ियों का साक्षात्कार लिया और आगे बढ़ने के लिए वे कौन से बदलाव चाहते थे, इस पर उनके मूल्यवान इनपुट लिए। रिपोर्ट अब ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्व समूह-टिम पेन, एरोन फिंच और पैट कमिंस के सामने पेश की जाएगी।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) ने अब दावा किया है कि लैंगर पर फोर्ड की समीक्षा बैठक खिलाड़ी की समीक्षा जितनी कठिन नहीं थी और 50 वर्षीय मुख्य कोच का मूल्यांकन जल्द ही किया जाएगा। लैंगर का चार साल का अनुबंध 2022 में समाप्त हो रहा है।