चंडीगढ़, 22 जुलाई: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के साथ वही लोग रह सकते हैं, जो चापलूसी में निपुण हों। यही कारण है कि एक से एक दिग्गज होने के बावजूद हम टीम इंडिया के लिए उपयुक्त कोच नहीं तलाश पाए हैं। इस तरह से देखें तो बीसीसीआई को भी सिर्फ चापलूस चाहिए।
इन शब्दों के साथ चंडीगढ़ में मीडिया के सामने टीम इंडिया के पूर्व कप्तान कपिल देव ने बीसीसीआई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कपिल ने बीसीसीआई पर आरोप लगाया है कि बोर्ड को सभी ने परिजनों का दर्जा दिया और देश के हित में उसके साथ काम करने की इच्छा जताई, लेकिन बोर्ड ने उन्हें अपने साथ रखने से इनकार कर दिया।
कपिल ने कहा कि उनके कई साथी भारतीय क्रिकेट की बेहतरी के लिए काम करने के इच्छुक हैं, लेकिन बोर्ड इसकी इजाजत नहीं दे रहा है। शायद उसे डर है कि मेरे और मेरे साथियों की मौजूदगी में वह बिना सिर-पैर वाले निर्णय नहीं ले सकेगा।
इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) पर कपिल ने कहा कि उन दोनों के बीच किसी भी प्रकार की प्रतिद्वंद्विता नहीं है। कुछ लोग षड़यंत्र के तहत आईपीएल और आईसीएल के बीच दूरियां बनाये रखना चाहते हैं। जबकि ऐसा करना क्रिकेट के लिए अच्छा नहीं है।
कपिल देव ने श्रीलंका दौरे के लिए युवराज सिंह को भारतीय टीम में शामिल नहीं किए जाने को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को लेकर युवराज का नजरिया ठीक नहीं है। वह हमेशा किसी न किसी विवाद में उलझे रहते हैं। उन्हें कम से कम 10 वर्ष तक विवादों से दूर रहना चाहिए। कम से कम अपने टैलेंट के सही इस्तेमाल करने के लिए तो उन्हें इस दिशा में जरूर सोचना चाहिए।