सिडनी टेस्ट: 'चित्त के ईश्वर' से 'सीमेंट' के पर्याय तक, हर ओर चर्चा का केंद्र बने चेतेश्वर पुजारा
नई दिल्ली। भारतीय टीम सिडनी में हो रहे सीरीज के चौथे और अंतिम मैच में शानदार शुरूआत कर चुकी है। भारत की बेहतरीन शुरूआत के लिए जिस बल्लेबाज का योगदान सबसे ज्यादा रहा है- वह हैं चेतेश्वर पुजारा। पुजारा ने चट्टानी इरादों के साथ खेलते हुए जिस तरह से कंगारूओं को छकाया उससे हर ओर पुजारा के नाम की चर्चा हो रही है। केवल भारत और ऑस्ट्रेलिया ही नहीं बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट गलियारों और खेल पंडितों से इस पारी की वाहवाही सुनी जा सकती है।
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टेस्ट क्रिकेट में जान फूंकने वाली बल्लेबाजी
दरअसल पुजारा की यह इस सीरीज में इस तरह की अकेली पारी नहीं है। वह अब तक कुल तीन शतकीय पारी सीरीज में जड़ चुके हैं और तीनों की पारियां अलग-अलग हालातों में खेली गई थी। इसका मतलब साफ है कि पुजारा का यह अवतार सभी तरह की परिस्थितियों उभरा है। दुर्भाग्य से पुजारा सिडनी में अपना दोहरा शतक जड़ने से केवल 7 रन से चूक गए। उन्होंने 193 रन की पारी खेलकर टीम को जरूर ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया है जहां से टीम इंडिया मैच हार नहीं सकती है। इसी के साथ पुजारा के लिए तारीफों की बरसात भी शुरू हो चुकी है।
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युवाओं को सीख देने वाली पारी
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क ने इस पारी को टेस्ट मैचों का सबसे बड़ा आनंदित करने वाला क्षण बताया, तो वहीं श्रीलंका के महानतम बल्लेबाजों में शामिल कुमार संगकारा ने इस पारी को सबको सीख देने वाली बताया है।
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पुजारा बने 'सीमेंट' के पर्याय
सहवाग ने भगवान शिव के एक नाम से पुजारा की तुलना करते हुए कहा है कि इस पारी ने ऑस्ट्रेलिया के सीरीज में सभी चांस खत्म कर दिए। जबकि भारत के क्रिकेट कमेंटेटर और खेल विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने पुजारा को सीमेंट का पर्याय बताते हुए कहा कि सीमेंट का विज्ञापन करने के लिए पुजारा से बेहतर कोई नहीं हो सकता है।
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