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'निराश हूं कि हार्दिक पांड्या को श्रीलंका सीरीज के लिए कप्तान नही बनाया गया'

नई दिल्लीः हार्दिक पांड्या श्रीलंका के सीमित ओवरों के दौरे के दौरान भारत के लिए सबसे बड़े नामों में से एक होंगे। तूफानी ऑलराउंडर पीठ की समस्याओं के कारण भारतीय टीम के अंदर और बाहर रहा है और लंका में अब बल्ले और गेंद से योगदान देने की उम्मीद कर रहा होगा। हार्दिक अनुभवी भी हैं और जोशीले भी लेकिन उनको इस दौरे पर कप्तान की भूमिका के लिए नहीं माना गया था। उनके बचपन के कोच जितेंद्र सिंह ने इस मुद्दे पर बात की।

'हार्दिक में सफलता के सारे गुण मौजूद'

'हार्दिक में सफलता के सारे गुण मौजूद'

हार्दिक ने टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर 11 टेस्ट (18 पारियों) में 31.29 की औसत से एक शतक और 4 अर्द्धशतक के साथ 532 रन बनाए हैं। उनकी बेहतरीन टेस्ट पारियों में से एक 2018 में केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आई, जब उन्होंने 7वें नंबर पर बैटिंग करते हुए सिर्फ 95 गेंदों में 93 रन बनाए। हार्दिक को ऐसे खतरनाक निचले क्रम के टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर पहचान मिली जो आक्रामकता के साथ सावधानी बरत सकता है।

हार्दिक के बचपन के कोच, जितेंद्र सिंह को बल्ले से ऑलराउंडर के कौशल पर कोई संदेह नहीं रहा है और उन्होंने कहा कि उनके पास टेस्ट बल्लेबाज के रूप में पूरी तरह से सफल होने की तकनीक, कौशल और स्वभाव है।

जितेंद्र ने क्रिकेटनेक्स्ट के साथ बातचीत में कहा, "वह योगदान दे सकता है। उसके पास तकनीक, स्वभाव और मैच्योरिटी है और अगर उसे मौका मिले तो वह खुद को साबित कर सकता है। उनके लिए परिस्थितियां मायने नहीं रखतीं क्योंकि उनकी तकनीक अच्छी और सरल है।"

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कप्तानी ना मिलने से बचपन के कोच हुए निराश-

कप्तानी ना मिलने से बचपन के कोच हुए निराश-

जितेंद्र हालांकि बहुत निराश थे कि टीम प्रबंधन ने श्रीलंका में कप्तानी के लिए हार्दिक के नाम पर विचार नहीं किया। वह इस अनुभवहीन टीम के उन कुछ खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है उनको लंबे समय तक भारतीय टीम के सदस्य के तौर पर देखा जाता है।

जितेंद्र ने बताया, "निश्चित रूप से, मैं निराश था। वह एक अच्छा विकल्प हो सकता था क्योंकि वह पांच से सात साल तक खेल सकता है। उसके पास नए विचार हैं और उसमें बहुत ऊर्जा है। वह (कप्तानी में) एक अच्छा निवेश हो सकता था, खासकर सफेद गेंद के प्रारूप के लिए।"

बतौर ऑलराउंडर और प्रदर्शन की अभी दरकार-

बतौर ऑलराउंडर और प्रदर्शन की अभी दरकार-

जितेंद्र का मानना ​​है कि स्टारडम ने खिलाड़ी या व्यक्ति हार्दिक को नहीं बदला है।

वह कहते हैं, "हार्दिक क्लब के दिनों से वही अंडर-16 लड़का है। सच कहूं तो उसने बाद में खुद मुझे बहुत कुछ सिखाया है जो भी उसको इंटरनेशनल लेवल पर कोचों और खिलाड़ियों से सीखने को मिला। अगर आप एक अच्छे इंसान हैं तो आप एक अच्छे क्रिकेटर भी होंगे। क्रिकेट आपके व्यक्तित्व का बाईप्रोडक्ट है।"

जितेंद्र अब चाहते हैं कि हार्दिक एक ऑलराउंडर के तौर पर और बढ़िया प्रदर्शन करें। इसके लिए उनका बॉलिंग एक्शन और एलाइनमेंट अहम रहेगा। कोच के मुताबिक हार्दिक अपनी बॉलिंग को लेकर बहुत सीरियस हैं।

Story first published: Wednesday, July 14, 2021, 12:33 [IST]
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