नयी दिल्ली। क्रिकेट की 272 साल की पुरानी परंपरा खत्म हो गई। यहां मैच से पहले आपको हेड या टेल सुनने को नहीं देता। यहां सिक्का उछालकर ये फैसला नहीं किया जाता कि कौन सी टीम पहले उतरेगी? यहां क्रिकेट में टॉस नहीं होता। ऐसा होता है इंग्लिश और वेल्स बोर्ड में। जहां टॉस की परंपरा को खत्म कर दिया गया। इंग्लैंड में चार दिनों तक चलने वाले काउंटी क्रिकेट मैचों में टॉस को अनिवार्य नहीं किया गया। T20 में किसने लगाए सबसे ज्यादा छक्के, जानें कौन हैं टॉप 10 खिलाड़ी
आप सोच रहे होंगे फिर फैसला कैसे होता है? यहां टॉस के बिना ही ये तय कर लिया जाता है कि मेहमान टीम गेंदबाजी करेगी। अगर मेहमान टीम ने गेंबाजी से इंकार करता है तो फिर टॉस करना पड़ता है।
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने क्रिकेट से टॉस खत्म का फैसला पिछले साल ही लिया। ऐसा इसलिए ताकि इंग्लिश स्पिनरों को बढ़ावा दिया जा सके। साथ ही टॉस के बिना पहले बल्लेबाजी का मौका घरेलु टीम को मिलेगा, अगर मेहमान टीम ने दखल नहीं दिया तो। क्रिकेट में पिच की अहम भूमिका होती है। मेजबान टीम के पास हमेशा यह विशेषाधिकार होता है कि वह अपने हिसाब से पिच का निर्माण करा सकता है। ऐसे में अगर टॉस के बजाए बल्लेबाजी भी अपने हाथों में हो तो उसका फायदा टीम को मिलना तय होता है।