सचिन ने खुद के बारे में बताया कि जब मैं 10 साल का था तो मुझे नहीं पता था कि 20-25 साल बाद क्या होगा? लेकिन मैं क्रिकेट खेलना चाहता था और अब जब मैं सन्यास ले चुका हूं तो मुझे लगता है कि क्रिकेट खेलकर जो मुझे खुशी मिली वो कुछ और करने पर कभी न मिलती।
ड्रेसिंग रूम में कम्प्यूटर नहीं चाहते थे तेंदुलकर
सचिन ने बताया कि जब ड्रेसिंग रूम में कम्प्यूटर रखा गया तो मुझे इसका कारण समझ में नहीं आया। मैं जानता था कि कम्प्यूटर मेरी जगह बैटिंग नहीं करेगा और न ही जहीर और हरभजन की तरह गेंदबाजी करेगा, बाद में मुझे समझ में आया कि इसकी मदद से हम अपने मकसद को बेहतर ढंग से प्लान कर सकते हैं। इसकी मदद से किसी भी साल के आंकड़े हमारी नजरों के सामने होते हैं। हम किसी भी खराब शॉट या अच्छे शॉट का विश्लेषण कर अगली बार ऐसी गलती करने से बच सकते थे। वक्त के साथ मुझे ड्रेसिंग रूम में कम्प्यूटर की अहमियत का पता चला और अब यह टीम की जरूरत बन चुका है।