नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अपनी भारी-भरकम उपस्थिति दर्ज करवाने वाले इंजमाम-उल-हक को अब आप पहचान नहीं पाएंगे। उन्हें देखकर लगता है कि मानो मस्जिद से नमाज पढ़कर कोई नमाजी निकला हो। अब उन्होंने लंबी से दाढ़ी रख ली है। आमतौर पर वे सलवार कमीज ही पहनते हैं। सिर पर चोटी तो होती ही है। खैर यह पाकिस्तानी क्रिकेटर भारत का अचानक कैसे फैन बन गया और इनका इंडिया से क्या नाता है, यह हम आपको आगे बताने जा रहे हैं।
इंजमाम को उम्मीद है कि आगामी विश्व कप में भारत का प्रदर्शन आला दर्जे का रहेगा क्योंकि उसके पास महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और शिखर धवन जैसे बेहतरीन बल्लेबाज हैं। वे मानते हैं कि ये सभी 14 फरवरी से शुरू हो रहे आईसीसी विश्व कप टूर्नामेंट में भारतीय टीम के लिए अहम साबित होंगे।
इंजमाम के मुताबिक संभावना है कि मौजूदा चैम्पियन भारत खिताब बचाने में सफल रहेगा। कभी दर्शकों के बीच आलू के नाम से पुकारे जाने पर नाराज हो जाने वाले इंजी अब बेहद शांत दिखते-लगते हैं। उन्हें इस बात की हैरानी है कि भारतीय टीम में युवराज सिंह को जगह नहीं मिली। युवराज को वे अपना भाई कहते हैं। कहने लगे उसके साथ तो मैं पंजाबी में ही बात करता हूं।
इंजमाम का भारत कनेक्शन
उनकी भारी भरकम शख्सियत को देखकर हमने उनसे उस टोरंटो में खेले गए मैच का तो जिक्र नहीं किया, जिसमें वे कुछ दर्शकों को मारने के लिए दर्शक दीर्घा तक पहुंच गए थे। तब उन दर्शकों ने उन्हें आलू ही कहा था। उसके बाद तो आलू उनका मिडिल नेम ही हो गया था।
इंजी से बात हो और हिसार का जिक्र ना हो, ये हो नहीं सकता। वे बताने लगे कि उनके पुरखे 1947 में हांसी, हिसार से मुल्तान गए थे। हमारा हांसी के मुगल मौहल्ले में घर था। काफी भावुक हो गए हिसार का जिक्र होने पर पर आलू माफ कीजिए इंजी।
क्रिकेट कान्क्लेव में क्या बोले थे इंजमाम
देश के प्रमुख समाचार चैनल न्यूज 24 के क्रिकेट कॉनक्लेव कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आए इंजमाम ने कहा कि टीम इंडिया करीब 70 दिनों से आस्ट्रेलिया में है और इसका फायदा उसे मिलेगा।
टीम इंडिया के त्रिकोणीय श्रृंखला में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन पर इंजमाम ने कहा, "टीम कोई भी हो लेकिन विश्व कप नजदीक आते-आते एक नया माहौल बनने लगता है। यही माहौल हर खिलाड़ी को जीत के लिए प्रेरित करता है। ऐसे में सभी पुराने हार-जीत पीछे छूट जाते हैं।"
इंजी काफी शर्मिले किस्म के इंसान है। सेंसर बोर्ड के पूर्व सदस्य और हिन्दी की कथाकार डा. अरुणा मुकिम से बात करते हुए वे कांप से रहे थे। लग रहा था कि वे हमारे खिलाड़ियों की तरह तो नहीं हैं।
रफ्तार के सौदागरों के छक्के-छुड़ा देने वाले इंजी ने बाद में हमारे साथ लजीज भोजन के साथ पूरा इंसाफ किया। कुल जमा तीन-चार फ्राई चिकन तो उनके पेट में चले ही गए थे। हमने पूछा, आपकी सबसे पसंदीदा डिश कौन सी है,तो बड़े मासूमियत से कहने लगे, मुझे तो बैंगन का भर्ता बहुत पसंद है। अम्मी के हाथ का बना मिल जाए तो मैं छोड़ता नहीं हूं।