बीबीसी संवाददाता
खचाखच भरे स्टेडियमों में रोमांच भर देने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के मुकाबलों को देखना ग़ज़ब का अनुभव रहा है लेकिन दिल की धड़कनों को तेज़ कर देने वाले इस रोमांच से दूर खिलाड़ियों के लिए बने खेल गाँव में बिताई एक शाम भी कम यादगार नहीं रही.
स्टेडियमों के माहौल से एकदम अलग खेल गाँव में शाम को एकदम मस्ती सा आलम रहता है. पोस्ट ऑफ़िस, एटीएम मशीन, म्यूज़िक स्टोर, फूल वाला....सब सुविधाएँ यहाँ मौजूद हैं. किराने की दुकान या कहें कि जनरल स्टोर में विदेशी खिलाड़ी रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ें खीरदते नज़र आए.
दुकान के मालिक ने बताया कि सबसे ज़्यादा माँग डिटरजेंट पाउडर और पीने वाले पदार्थों की है. यहाँ का डाकघर भी काफ़ी दिलचस्प लगा. विदेशी खिलाड़ी और अधिकारी यहाँ से यादगार के तौर पर डाक टिकट खरीद कर ले जा रहे थे. लोगों के बीच सबसे ज़्यादा पसंदीदा चीज़ रही 10 रुपए वाले विशेष पोस्ट कार्ड जिसपर राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े चित्र छपे हैं. मालिक के मुताबिक रोज़ाना 200 पोस्ट कार्ड तो बिक ही जाते हैं.
सलून, डिस्को और बार भी
कुछ लोग फ़ोटो स्टूडियो जाकर वहाँ पहले सी रखीं भारतीय पोशाकें पहनकर फ़ोटो खिंचवा रहे थे. दुकानदार ने पहले से ही कुछ पारंपरिक भारतीय पोशाकें वहाँ रखी हुई हैं. मैदान पर अपना दमखम दिखाने वाले खिलाड़ी अपनी ख़ूबसूरती का भी पूरा ध्यान रखते हैं.
अफ़्रीकी देशों के कई खिलाड़ी सलून में हेयर कट तो कुछ मालिश करवा रहे थे. सैलून की मालकिन ने बताया कि सब लोगों को यहाँ के दाम काफ़ी सस्ते लग रहे हैं, ख़ासकर जो लोग डॉलरों को रुपए में बदलते हैं. मर्चेन्डाइज़िंग की दुकान पर भी भारी भीड़ थी..टीशर्ट, टोपी धड़ाधड़ बिक रही थी.
लेकिन एक चीज़ जिसकी सबसे ज़्यादा माँग थी वो ग़ायब थी,...शेरा. शेरा अभी तक बाज़ार भी आया ही नहीं है. हस्तशिल्प के कई सारे शोरूम गेम्स विलेज में बनाए गए हैं...ज़ाहिर है विदेशियों के बीच ये ख़ासे लोकप्रिय हैं. एक दुकान के मालिक ने बताया कि विशेष ऑर्डर इतने ज्यादा हैं कि कारीगर रात भर काम करते रहे.
खेल गाँव में शाम को कनाडा के कुछ खिलाड़ी ज़ोर ज़ोर से कैनेडा-कैनाडा चिल्लाकर चक्कर लगा रहे थे. इन लोगों ने अपने सीने पर लाल रंग से अंग्रेज़ी में कैनेडा लिखा हुआ था. कहने की ज़रूरत नहीं कि खेल गाँव में बने डिस्को रूम और बार में सबसे ज़्यादा भीड़ थी...
डिस्को रूम में विदेशी खिलाड़ी बॉलीवुड के गानों पर थिरक रहे थे..गाना बज रहा था- मैं बारिश कर दूँ पैसे की जो तू हो जाए मेरी. और बार का हाल तो पूछिए ही मत. वहाँ तो अंदर जाकर खड़े होने की जगह ही नहीं थी.
विदा की बेला
डिस्क से बाहर निकली तो देखा कि एक जगह काफ़ी भीड़ है और लोगों ने किसी को घेरा हुआ है, फ़ोटोग्राफ और ऑटोग्राफ़ के लिए ताँता लगा हुआ है.पास जाकर पता चला कुश्ती में स्वर्ण जीतने वाले हरियाणा के अनिल कुमार थे. हमने उनसे लंबी बातचीत की.
अनिल बोले कि वे जहाँ निकलते हैं लोग उन्हें घेर लेते हैं. अब तक गुमनामी में रहने वाले अनिल इससे काफ़ी हैरान नज़र आए. दिन भर की थकान के बाद शाम को रंगीन बनाने के लिए कलाकार खिलाड़ियों के लिए गेम्स विलेज में प्रस्तुति देते हैं.
मंगलवार शाम रही शिवमणि और हरिहरन के नाम. शिवमणि ने अपने परदर्शन से लोगों का दिल जीत लिया. उनके वाद्यों से निकली एक एक थाप, एक एक गूँज पर लोग तालियाँ बजाकर, नारे लगाकर प्रतिक्रिया दे रहे थे. मीडिया सेंटर में अलग गहमागहमी रही.
भारत-इंग्लैंड मैच का भरपूर आनंद उठा रहे थे लोग. ये गेम्स विलेज नहीं बल्कि एक छोटा सा बसा-बसाया शहर लगा जहाँ दुनिया के हर कोने के लोग बसे हुए हैं. खेल 14 अक्तूबर को ख़त्म हो रहे हैं...विदाई के आलम भी झलक भी विलेज में दिखाई थी. लोग फिर मिलेंगे कहकर विदा ले रहे थे..कुछ ऐसे भी हैं जो दो-तीन रुककर दिल्ली, आगरा और अन्य जगहों का आनंद उठाएँगे.