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टेस्ट मान्यता से वंचित श्रीलंका ने दूसरे विश्वकप में हरा दिया था भारत को

By अशोक कुमार शर्मा

नई दिल्ली। 1979 तक भारत टेस्ट क्रिकेट में कुछ नाम कमा चुका था लेकिन एकदिवसीय मैचों के हिसाब से वह ढल नहीं पाया था। इस मामले में टीम प्रबंधन का रवैया भी बहुत ढीला था। तेज तर्रार खिलाड़ियों की न तो खोज हो रही थी न युवा जोश पर भरोसा किया जा रहा था। 1979 में दूसरे विश्वकप के लिए जब भारतीय टीम का चयन हुआ तो कप्तानी 34 साल के वैंकटराघवन का सौंप दी गयी। वैंकटराघवन भारत के नामी स्पिन गेंदबाज रहे थे लेकिन तब उनका करियर ढलान पर था। टीम में गावस्कर, विश्वनाथ जैसे खिलाड़ी थे लेकिन उनको तरजीह नहीं दी गयी। वैंकट पहले विश्वकप में भी भारत के कप्तान थे। चार साल बाद भी टीम प्रबंधन ने उन्हीं पर भरोसा जताया। दूसरे विश्वकप में भारत का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि वह श्रीलंका से भी हार गया। तब श्रीलंका को टेस्ट खेलने की मान्यता भी नहीं मिली थी।

कैसी थी श्रीलंका की टीम ?

कैसी थी श्रीलंका की टीम ?

श्रीलंका को 1981 में टेस्ट क्रिकेट खेलने की मान्यता मिली थी। 1982 में उसने इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट खेला था। 1979 के दूसरे विश्वकप क्रिकेट के समय श्रीलंका आइसीसी का केवल एसोसिएट मेम्बर था। नन टेस्ट प्लेईंग नेशन होने के बावजूद श्रीलंका में तब प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की भरमार थी। वेंदुला वार्नापुरा टीम के कप्तान थे जो अच्छे बल्लेबाज थे। सिद्धार्थ वेट्टीमुनी, रॉय डायस, दिलीप मेंडिस, रंजन मधुगाले जैसे मंझे हुए बल्लेबाज थे जिनकी क्षमता विश्वस्तरीय थी। सोमचंद्र डिसिल्वा की स्पिन गेंदबाजी का तब कोई जवाब नहीं था। टोनी ओपाथा भी अच्छे तेज गेंदबाज थे। ये दुर्भाग्य था कि उस समय श्रीलंका को टेस्ट नेशन का दर्जा नहीं मिला था, वर्ना उसकी टीम बहुत दमदार थी।

श्रीलंका की लाजवाब बल्लेबाजी-

श्रीलंका की लाजवाब बल्लेबाजी-

1979 के दूसरे विश्वकप में नौवां मैच भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया। भारत ने टॉस जीता और पहले फील्डिंग का फैसला लिया। श्रीलंका के कप्तान वर्नापुरा और सिद्धार्थ वेट्टीमुनी ने पारी की शुरुआत की। इस मैच में श्रीलंका ने दिखा दिया कि उसके पास कितने उच्चस्तरीय बल्लेबाज हैं। वर्नापुरा को मोहिंदर अमरनाथ ने आउट किया। वार्नापुरा ने 18 रन बनाये। इसके बाद वेट्टीमुनी और रॉय डायस ने दूसरे विकेट के लिए 116 रनों की साझेदारी की। वेट्टीमुनी से 67 तो डायस ने 50 रन बनाये। दिलीप मेंडिस ने विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने 57 गेंदों पर 64 रन बनाये जिसमें एक चौका और तीन छक्के शामिल थे। श्रीलंका ने 60 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 238 रन बनाये। भारत के शूरमा स्पिनर माने जाने वाले वैंकटराघवन और बिशन सिंह बेदी पसीना बहाते रहे लेकिन एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके। कपिल देव को एक और मोहिंदर अमरनाथ को तीन विकेट मिले।

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भारत की शर्मनाक हार-

भारत की शर्मनाक हार-

टेस्ट क्रिकेट में स्थापित भारत की टीम मैदान पर उतरी। टेस्ट मान्यता से वंचित श्रीलंका के गेंदबाजों ने मोर्चा संभाला। भारत के किसी भी बल्लेबाज ने अपने नाम के मुताबिक खेल नहीं दिखाया। सबसे अधिक स्कोर 36 का रहा जो दिलीप वेंगसरकर के बल्ले से निकला। गावस्कर 26, आंशुमन गायकवाड़ 33, विश्वनाथ 22, ब्रजेश पटेल 10, कपिलदेव 16, मोहिंदर अमरनाथ 7 रन बना कर आउट हुए। इस दौरे के लिए विकेटकीपर सुरेन्द्र खन्ना का चयन किया था जिनके बारे में मशहूर था कि वे तेज बल्लेबाजी करते हैं। लेकिन वे भी नाकाम रहे। उन्होंने 10 रन बनाये। आखिरकार भारत की टीम 191 रनों पर आउट हो गयी। इस तरह श्रीलंका ने भारत को 47 रनों से हरा दिया। इसके पहले भारत अपने पहले मैच में वेस्टइंडीज से हार गया था। वेस्टइंडीज ने भारत को 9 विकेट से हराया था। दूसरा मुकाबला न्यूजीलैंड से हुआ था जिसमें न्यूजीलैंड ने भारत को 8 विकेट से हराया था। भारत अपने ग्रुप के तीनों मैच हार गया था।

Story first published: Thursday, May 16, 2019, 17:28 [IST]
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