
आम एशियाई खिलाड़ियों की तरह हैं विराट कोहली
पाकटीवी डॉट टीवी की यूट्यूब चैनल के साथ बात करते हुए जावेद ने अपने विचार रखे हैं और कहा कि विराट कोहली के लिये ऑस्ट्रेलिया में सफल होना अब बड़ी मुसीबत नहीं रही है जबकि इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका की सरजमीं पर रन बनाना भारतीय कप्तान के लिये अभी भी बड़ा काम नजर आता है।
उन्होंने कहा,' कोहली एक आम एशियाई खिलाड़ी की तरह है जो कि ऑस्ट्रेलिया में तो सफल हो सकते हैं लेकिन इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका जैसी जगह जहां पर गेंद को स्विंग और सीम करते देखा जाता है, वहां पर वो गेंद का पीछा करते हैं और कंट्रोल्ड स्विंग के खिलाफ अपना विकेट गंवा देते हैं।'

कोहली से बेहतर है जो रूट की तकनीक
इंग्लैंड में जारी मौजूदा सीरीज की बात करें तो भारतीय कप्तान विराट कोहली कुछ खास लय में नजर नहीं आ रहे हैं। पहले 3 मैचों की 5 पारियों में कप्तान विराट कोहली 24.80 की औसत से महज 124 रन ही बना सके हैं और ऑफ स्टंप से निकल रही गेंदों को छेड़ने के चक्कर में कई बार अपना विकेट गंवाते नजर आये हैं।
वहीं पर विराट कोहली के विपक्ष में खड़े कप्तान जो रूट के लिये यह सीरीज किसी सपने की तरह गुजर रही है, जिसमें इस दिग्गज खिलाड़ी ने 3 शतक और एक अर्धशतक की मदद से अब तक 126.75 की औसत से 507 रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। जावेद ने इसको लेकर जो रूट की तकनीक की तारीफ की और कहा कि सीमिंग कंडीशन्स में रूट की तकनीक कोहली से काफी बेहतर नजर आ रही है।
उन्होंने कहा,' जो रूट की देर से खेलने की तकनीक उन्हें इन परिस्थितियों में कोहली से ज्यादा सुरक्षित बताती है और वो जानते हैं कि गेंद को कैसे खेलना चाहिये।'

बल्लेबाजों पर पड़ता है भौतिक परिस्थितियों का असर
जावेद ने आगे कहा कि उपमहाद्वीप के बल्लेबाज जब गेंद ज्यादा स्विंग नहीं करती है तो गेंद की लाइन में जाकर शॉट मारते हैं, हालांकि सेना देशों के बल्लेबाज स्पिन के खिलाफ खेलने में मुश्किलात का सामना करते हैं।
उन्होंने कहा,' क्रिकेट में किसी खिलाड़ी के विकास में उसके देश की भौतिक परिस्थितियां काफी अहम रोल निभाती हैं, उदाहरण के तौर पर इंग्लैंड में गेंद अक्सर घूमती नजर आती है और मैच के अंत में गेंद स्पिन भी होती है, इसके चलते ही खिलाड़ी ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में खेलने के आदी होते हैं। वहीं पर उपमहाद्वीप से आने वाले खिलाड़ी गेंद के ज्यादा घूमने की चिंता नहीं करते हैं और लाइन में जाकर खेलते हैं। वहीं पर सेना देश के खिलाड़ी घूमती गेंदों को मारने के आदी होते हैं। लेकिन जैसे ही गेंद थोड़ा घूमने और नीचे रहने लगती है वो बेअसर होते नजर आते हैं।'


Click it and Unblock the Notifications