नई दिल्ली। आज चारों ओर सचिन तेंदुलकर की किताब 'प्लेइंग इट माई वे' के उस खुलासे कि बातें हो रही है जिसमें तेंदुलकर ने लिखा है कि भारत के सीनियर खिलाड़ी चैपल के जाने से बहुत खुश थे क्योंकि उन्होंने कप्तान गांगुली के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया था। टीम के किसी भी सदस्य को चैपल के बर्खास्तगी को लेकर निराशा नहीं थी।
यहां तक कि सचिन ने चैपल को रिंगमास्टर कहकर संबोधित किया है और कहा है कि वो अपनी हर एक इच्छा टीम पर थोपना चाहते थे, जिस पर तिलमिलाये आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ग्रैग चैपल ने हैरानी जताते हुए कहा कि सचिन ने इस तरह की फालतू बात कैसे कह दी, वो झूठ बोल रहे हैं।
चैपल हमेशा अपने विचार खिलाड़ियों पर थोपने की कोशिश करते थे
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बार इल्जाम उस इंसान ने लगाया है जिसे दुनिया भारत रत्न कहती है, जिसने अपने 21 साल के करियर में बेदाग क्रिकेट खेला है या यूं कह ले जिसने क्रिकेट को ही जिया है यानी कि सचिन तेंदुलकर, जिनको अब इस वक्त झूठ बोलने की क्या जरूरत पड़ गई। सचिन और चैपल दोनों ही आज भारतीय क्रिकेट के लिए बीता हुआ कल हो गये हैं।
वैसे सचिन की बात पर गुस्से में उबल रहे आस्ट्रेलिया के ग्रैग चैपल ने आज से तीन साल पहले अपनी आत्मकथा 'फियर्स फोकस' में सचिन तेंदुलकर को मानसिक रूप से कमजोर और निर्णय ना ले पाने वाला व्यक्ति बताया था। तब सचिन ने उनकी बात पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी थी लेकिन आज जब सचिन ने अपनी किताब में चैपल का जिक्र किया तो ग्रैग चैपल को मिर्ची लग गई और वो उन्हें झूठा बता रहे हैं।
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