
होल्कर महाराज ने दिया निमंत्रण और बदल गई नायडू की जिंदगी
31 अक्टूबर 1895 को नागपुर में जन्मे नायडू उस उम्र तक क्रिकेट खेले थे, जिसके बारे में सोचना भी मुश्किल है। दरअसल नायडू 1923 में होल्कर महाराज के आमंत्रण पर इंदौर आए थे। लेकिन उसके बाद वे ताउम्र इंदौर के ही होकर रह गए। होलकर महाराज ने उनकी कद काठी को देखते हुए उन्हें अपनी सेना में कैप्टन बनाया और यहीं से वह कर्नल सीके नायडू बन गए।

यहां की थी प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत
सीके नायडू ने अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत सिर्फ 7 साल की उम्र में कर दी थी। तब ये अपने विद्यालय में क्रिकेट खेला करते थे। इन्होंने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत 1916 में बॉम्बे ट्रेंगुलर ट्रॉफी में की थी।

जिस उम्र में खिलाड़ी संन्यास लेते हैं नायडू ने कप्तानी संभाली थी
सीके नायडू भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान थे। 1932 में भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला था। मजेदार बात ये है, कि जिस उम्र में खिलाड़ी रिटायरमेंट लेते हैं, उस उम्र में कर्नल को टेस्ट टीम की कमान मिली। इंग्लैंड के खिलाफ जून 1932 में जब उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच खेला, तब उनकी उम्र 37 साल हो चुकी थी। उन्होंने भारत की ओर चार साल में कुल 7 टेस्ट मैच खेले। लेकिन ऐसा नहीं है कि वह इतना खेलते ही रुक गए। उन्होंने अपने जीवन में कुल 207 फर्स्ट क्लास मैच खेले। अपने 7 टेस्ट मैच के करियर में उन्होंने 350 रन बनाए। 207 फर्स्ट क्लास के मैच में उन्होंने दस हजार रन बनाए।

संयोग था कप्तानी मिलना!
कर्नल का पूरा नाम कोट्टारी कनकैया नायडू था। माना जाता है कि टीम इंडिया की कप्तानी भी उन्हें संयोग से मिली थी। दरअसल 1932 में भारतीय टीम की कमान पोरबंदर के महाराज के हाथ में थी। लेकिन अंतिम क्षणों में उनकी तबीयत खराब हो गई और वह नहीं जा पाए, इसलिए टीम की कप्तानी करने का मौका कर्नल सीके नायडू को मिला।

116 मिनट में 153 रन 11 छक्के
1926-27 में मुम्बई के जिमखाना मैदान पर हिन्दुस्तानी टीम के लिए उनकी आखिरी पारी पर उन्हें चांदी का बल्ला भी भेंट किया गया था। इस मैच में उन्होंने 116 मिनट में 153 रन बनाए थे जिनमें 11 छक्के शामिल थे।

नाम से दिया जाता है अवॉर्ड
सीके नायडू को 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। बाद में उनके नाम से सीके नायडू अवॉर्ड की भी शुरुआत की गई थी।

ऐसा था प्रथम श्रेणी करियर
नायडू दाएं हाथ के बल्लेबाज और एक ऑफ ब्रेक गेंदबाज थे। उन्होंने प्रथम श्रेणी मैचों में आंध्र, मध्य भारत, हैदराबाद, राजपूताना और यूनाइटेड प्रोविंस का प्रतिनिधित्व किया था। 207 प्रथम श्रेणी मैचों में 35.94 के औसत से 11825 रन बनाए, जिनमें 26 शतक 58 अर्धशतक शामिल है। प्रथम श्रेणी मैचों में उनका उच्चतम स्कोर 200 रन रहा था।


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