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हैप्पी बर्थडे रिकी पोंटिंगः जानिए इस महान खिलाड़ी के बार में अनसुनी बातें

नई दिल्ली। क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर का मुकाम आज सबसे ऊपर है। उन्हें क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। सर डॉन ब्रैडमैन के बाद अगर किसी क्रिकेटर ने उपलब्धियां हासिल की हैं तो सचिन ही माने जाते हैं। लेकिन इस बीच एक क्रिकेटर और भी है जिसे किसी से कम नहीं आंका जा सकता। उसने जो हासिल किया है वह सचिन कभी भी हासिल नही कर पाए। आज भले ही सचिन के नाम वनडे, टेस्ट में सबसे ज्यादा रन और शतक हैं लेकिन उनकी झोली में केवल एक ही क्रिकेट वर्ल्डकप है।

एमएस धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने 2011 में फाइनल में श्रीलंका को हराते हुए वर्ल्ड कप जीता था। लेकिन रिकी पोटिंग ने अपनी कप्तानी में दो बार ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्डकप जितवाया है। जबकि एक बार वे वर्ल्डकप विजेता टीम के हिस्सा थे। ये कारनामा क्रिकेट के इतिहास में आज तक कोई भी बल्लेबाज नहीं कर पाया है।

संक्षेप में रिकी पोटिंग

संक्षेप में रिकी पोटिंग

27483 इंटरनेशनल रन, 71 इंटरनेशनल शतक, 146 इंटरनेशनल अर्धशतक, 3 आईसीसी वर्ल्डकप, 2 आईसीसी चैपिंयस ट्रॉफी। ये रिकी पोटिंग की महानता दर्शाने के लिए काफी है।

पोटिंग के बारे में रोचक बातें

पोटिंग के बारे में रोचक बातें

रिकी पोटिंग का निक नेम 'पंटर' है। उन्हें साथी खिलाड़ी पंटर के नाम से बुलाते हैं। रिकी पोंटिंग अपनी बल्लेबाजी के लिए तो जाने ही जाते साथ ही वे विरोधी टीम के खिलाड़ियों पर फब्तियां कसने के लिए भी क्रिकेट जगत में मशहूर हैं। पोटिंग फील्ड पर काफी चुलबुले अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। पोंटिंग ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला शतक इंग्लैंड के खिलाफ लिड्‍स में 1997 में लगाया था। इसमें पोंटिंग 127 रन बनाकर आउट हुए थे। अपने डेब्यू टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ 96 रन बनाकर विवादित निर्णय पर एलबीडब्ल्यू हुए थे। बॉलर थे चामिंडा वास। पोंटिंग ने जिम्बाब्वे के खिलाफ वर्ल्ड कप के मैच में रन आउट होने के बाद गुस्से में आकर टीम के ड्रेसिंग रूम में लगा एलसीडी टीवी तोड़ दिया था।

जमकर हुई है पोटिंग की ओलोचना

जमकर हुई है पोटिंग की ओलोचना

रिकी पोटिंग का करियर काफी विवादास्पद रहा था। उनकी बहुत आलोचना की जाती रही। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उनका विरोधियों के प्रति उपशब्दों का प्रयोग करना। कई बार वे अम्पायरों की बात न मानते हुए उनसे बहस करने को लेकर भी विवादों में रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 2005, 2009 और 2010-11 में 3 एशेज श्रंखलाएं हारी जिसके कारण पोटिंग की बहुत आलोचना हुई। खासकर 2005 एशेज के दूसरे टेस्ट के बाद जिसमें टॉस जीत कर रिकी ने कई आलोचकों के अनुसार गलत निर्णय लिया। उनकी टीम ने वह मुकाबला 2 रनो से गवाया था। ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से वह श्रंखला हारनी पडी। टी20 क्रिकेट में उनकी कप्तानी की बहुत आलोचना हुई क्यूँ कि 2007 के विश्व कप में उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ज़िम्बाब्वे जैसी कमजोर टीम से हारा।

पोटिंग की कमजोरी, भज्जी ने किया था परेशान

पोटिंग की कमजोरी, भज्जी ने किया था परेशान

पोटिंग को स्पिन गेंदबाजों का सामना करते हुए, खास कर ऑफ स्पिन गेंदबाजों को खेलते हुए उन्हें कभी कभी बहुत कठिनाई होती थी। हरभजन सिंह और ग्रेमी स्वनं का सामना करते हुए उन्हें जो परेशानी होती थी वह इस बात को स्पष्ट करती है। अपने कैरियर के अंत की ओर, अधिक उम्र होने के कारण वह पुल और हुक शॉट खेलने में असमर्थ होने लगे। सफलता के दौर में शॉर्ट पिच गेंद उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। वे इस प्रकार की गेंदबाजी खेलने के मास्टर माने जाते थे।

पोटिंग के रिकॉर्ड

पोटिंग के रिकॉर्ड

पोंटिंग के नाम सबसे अधिक एकदिवसीय मैच विजयों में टीम का हिस्सा होने का विश्व रिकॉर्ड है - वे 262 एकदिवसीय मैचों में विजयी पक्ष का हिस्सा थे। उन्होंने एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास में सर्वाधिक एकदिवसीय मैचों के लिए टीम की कमान संभाली है (230 मैच)। पोंटिंग टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने 167 टेस्टों में 13,366 रन बनाए हैं।

Story first published: Tuesday, December 19, 2017, 11:32 [IST]
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