Happy Birthday Sachin: तेंदुलकर की वो पारियां जिसने भारत में क्रिकेट को बदल दिया

Happy Birthday Sachin Tendulkar: The batting style that changed the Indian cricket for forever

नई दिल्ली। आज 24 अप्रैल यानी की 'क्रिकेट के भगवान' का जन्मदिन है। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर आज 46 साल के हो गए हैं। 24 साल के ख्यातिपूर्ण क्रिकेट करियर के बाद सचिन ने साल 2013 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। मौजूदा समय में वे आईपीएल फ्रेंचाइजी मुंबई इंडियंस के साथ जुड़े हुए हैं। भारत में 1983 की विश्व कप जीत और विराट कोहली की अगुवाई वाले मौजूदा दौर के बीच सचिन ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने क्रिकेट की दीवानगी को इस देश में जुनून की हद तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। आज उनके 46वें जन्मदिन के मौके पर पेश है उनके खेल की वो शैली जिसने भारत में क्रिकेट खेलने के ढंग को फिर से परिभाषित किया।

शारजहां में रेगिस्तानी आंधी के बाद सचिन का 'तूफान'-

शारजहां में रेगिस्तानी आंधी के बाद सचिन का 'तूफान'-

ये पारी जिस समय सचिन ने खेली थी, तब क्रिकेट में शुरुआती ओवर में भी शीर्ष क्रम पर आक्रामक बल्लेबाजी भारतीय क्रिकेट की शैली बन ही रही थी और इस शैली के अगुवा थे खुद सचिन तेंदुलकर। सचिन की इस तूफानी शैली के सबसे पराक्रमी रूपों में एक था शारजहां में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई उनकी पारी। इस मैच में भारत जीत नहीं सका था लेकिन सचिन ने 131 गेंदों पर 143 रन बनाकर ऐसी बल्लेबाजी की कि भारत रन रेट के आधार पर फाइनल मैच में पहुंचने में सफल रहा। आपको बता दें इस मैच के बीच में ही रेगिस्तानी आंधी के चलते मैच रोकना पड़ा था लेकिन बाद में जब मैच हुआ तब सबको सचिन के तूफान से गुजरना पड़ा। आज भी यह पारी वनडे क्रिकेट की बेस्ट पारियों में गिनी जाती है।

इस पारी का यह हुआ असर-

इस पारी का यह हुआ असर-

सचिन भारत के पहले ऐसे पूर्ण परंपरागत बल्लेबाज थे जिन्होंने ओपनिंग करने के साथ तमाम किताबी शॉट्स खेलते हुए गेंदबाजो को बखिया उधेड़ने का काम किया। सचिन की इस पारी के बाद देश के युवाओं ने सही मायनों में कुछ ही घंटे में खेल को बदल देने वाले गेम की अहमियत जानी। इसी का नतीजा था कि हमने बाद की पीढ़ी में वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, धोनी आदि जैसे विस्फोटक युवा क्रिकेटरों का उभार देखा। बाद में शिखर धवन, रोहित शर्मा से लेकर टीम इंडिया के कप्तान कोहली तक के खेल को इसी आक्रामक शैली का एक विस्तार माना जा सकता है।

पाकिस्तान को विश्व कप में पस्त करने वाली पारी-

पाकिस्तान को विश्व कप में पस्त करने वाली पारी-

2003 के विश्व कप में सचिन ने भारत के चिर-परिचित प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के खिलाफ एक ऐसी पारी खेली जो शतक ना होने के बावजूद भी प्रभाव में उससे कहीं ज्यादा साबित हुई। उस समय पाक की टीम में वसीम अकरम, शोएब अख्तर और वकार युनूस जैसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज होते थे। उस समय क्रिकेट में 300 रन रोज-रोज नहीं बनते थे और पाक ने सईद अनवर की शतकीय पारी की बदौलत भारत को जीत के लिए 274 रनों का टारगेट दिया था। जिसके बाद सचिन ने सहवाग के साथ मिलकर ऐसी शुरुआत दी कि उनके आउट होने के बाद द्रविड़ और युवराज को लक्ष्य तक पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

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भारत के पहले 'हिटमैन'-

भारत के पहले 'हिटमैन'-

आधुनिक क्रिकेट में टी-20 के आगमन से और फील्डिंग में किए गए नए बदलावों के तहत बल्लेबाजों के पास खेलने के लिए अनेको तरह के गैर-परंपरागत शॉट्स होते हैं। इसके अलावा 'मसल्स' के चलन ने पॉवर गेम को इतना बढ़ावा दिया है कि बल्लेबाज रनों के अंबार लगा देता है। लेकिन 2010 में ऐसी स्थिति नहीं थी और तब सचिन ने गेम वनडे गेम का पहला दोहरा शतक बनाया था। यह मैच ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुआ था। इस पारी ने क्रिकेटरों को एक ऐसा रास्ता दिखाया जिस पर आधुनिक क्रिकेट में रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी बखूबी चल रहे हैं।

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Story first published: Wednesday, April 24, 2019, 11:09 [IST]
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