Happy Bday Ganguly: खिलाड़ी, मेंटर, कैप्टन आखिर क्या हैं बंगाल के महाराजा........

By Ankur Singh
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नई दिल्ली। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का आज जन्मदिन है, वह आज 46 वर्ष के हो गए हैं। सौरव गांगुली को टीम इंडिया के सफलतम कप्तान के तौर पर गिना जाता है, लोग उन्हें दादा के नाम से भी जानते हैं। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सौरव गांगुली एक अलग पहचान रखते हैं। टीम इंडिया के लिए वह लंबे समय तक मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के साथ सलामी बल्लेबाजी के लिए मैदान पर आते थे। उन्हें उनके आतिशी छक्कों के लिए हमेशा याद किया जाता है।

ऑफ साइड के भगवान

जिस तरह से टीम इंडिया की अगुवाई दादा ने की और टीम को नई बुलंदियों पर पहुंचाया उसके लिए वह हमेशा याद किए जाते हैं। दादा ऑफ साइड के सफलतम बल्लेबाजों के तौर पर गिने जाते हैं। खुद राहुल द्रविड़ ने एक बार उनके बारे में कहा था कि ऑफ साइड में सबसे पहले भगवान हैं उसके बाद सौरव गांगुली। जिस तरह से दादा ने टीम की कप्तानी की और टीम को बुलंदियों पर पहुंचाया उसकी वजह से लोग उनके व्यक्तिगत खेल को भूल जाते हैं, दादा मैदान में जिस तरह से तेज गेंदबाजों को ऑफ साइड में मारते थे और लेग स्पिनर को क्रीज से बाहर निकलकर छक्का जड़ते थे उसे देखना अपने आप में ही जबरदस्त अनुभव था।

जबरदस्त रिकॉर्ड
टेस्ट क्रिकेट में दादा ने क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान में अपनी शुरुआत की। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भारत ओर से सर्वाधिक रन बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज है, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 18575 रन बनाए हैं, जबकि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की बात करें सर्वाधिक रन बनाने वाले दादा 12वें बल्लेबाज हैं। वह एकमात्र ऐसे वनडे बल्लेबाज हैं जिन्होंने लगातार मैन ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम किया है, टेस्ट क्रिकेट में उनका औसत कभी भी 40 रन से कम नहीं रहा।

बुरे दौर से टीम को बाहर निकाला
सौरव गांगुली ने टीम इंडिया के सबसे बुरे दौर को भी देखा है, जिस तरह से टीम इंडिया को मैच फिक्सिंग के दौर से गुजरना पड़ा उसके बाद उन्होंने टीम को एक बार फिर से शिखर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। टीम और क्रिकेट के प्रति जिस तरह से लोगों का गुस्सा बढ़ा और लोगों ने इसका बहिष्कार करना शुरू किया उस दौर में दादा ने टीम को एक बार फिर से खड़ा किया और उसे नई पहचान दिलाई। जिस दौर में खुद सौरव गांगुली अपने व्यक्तिगत कैरियर के निचले स्तर पर थे, उस वक्त भी उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखी और एक बार फिर से टीम में अपनी जगह बनाई। 2007 में उन्होंने वनडे में 1000 से अधिक रन बनाए, टेस्ट में सर्वाधिक एक कैलेंडर वर्ष में 2346 रन बनाए। अगले वर्ष वह एशियन क्रिकेट और एशियन बैट्समैन बने।

भविष्य की टीम की रखी बिसात
दादा ने टीम में एक नई खिलाड़ियों की फौज को तैयार करने में भी विशेष योगदान दिया है, उन्होंने वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जहीर खान, एमस धोनी, युवराज सिंह जैसे खिलाड़ियों को टीम में जगह दी और उनपर भरोसा जताया, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपना अलग मुकाम कायम किया। गांगुली में एक विशेष योग्यता यह थी कि वह खिलाड़ी के भीतर की प्रतिभा को पहचान लेते थे और उसे टीम में लेने के लिए सेलेक्टर से भिड़ जाते थे। अधिकतर खिलाड़ियों ने दादा के भरोसे पर खरा उतरते हुए उन्हें कभी शर्मिंदा नहीं होने दिया।

टीम को नई पहचान दिलाई
गांगुली को टीम इंडिया के अबतक के सफलतम कप्तान के रूप में गिना जाता है। बतौर कप्तान विदेशी धरती पर दादा का रिकॉर्ड काफी बेहतर है, उन्होंने 2003 में टीम इंडिया को विश्व कप के फाइनल तक पहुंचाया और नेट वेस्ट ट्रॉफी में भी टीम की जीत में अगुवाई की। दादा ने टीम की उस सोच को बदला जिसमे यह सोचा जाता था कि विदेशी धरती पर टीम बेहतर नहीं करती है और यह घर के शेर हैं। दादा हमेशा मैदान में लड़ने के लिए तैयार रहते थे। उन्होंने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव वॉ को टॉस के दौरान इंतजार कराया था।

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    Story first published: Sunday, July 8, 2018, 13:30 [IST]
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