हरभजन सिंह बोले- चयनकर्ता मेरे खिलाफ थे, सौरव गांगुली ने मेरा समर्थन किया

नई दिल्ली। सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे प्रेरणादायक कप्तानों में से एक हैं। उनकी कप्तानी के दौरान, हमने देखा कि युवा क्रिकेटरों का एक समूह उभरा है। उन्होंने अपने दम पर एक टीम बनाई। उनकी टीम निश्चित रूप से वनडे और टेस्ट दोनों में विश्व-विजेता थी। यह बात भी सच है कि हरभजन सिंह, आशीष नेहरा, जहीर खान, युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग और महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ियों ने गांगुली की कप्तानी में अपना नाम बनाया।

एक साक्षात्कार में, हरभजन ने खुलासा किया है कि भारतीय चयनकर्ता उनके करियर के शुरू के दाैर में उनका साथ नहीं देते थे। वे उन्हें टीम में लेने के लिए तैयार नहीं थे। पंजाब के इस ऑफ स्पिनर ने पूर्व भारतीय कप्तान के प्रति आभार जताया और कहा कि गांगुली की वजह से उन्हें टीम में खेलने में मदद मिली।

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सिर्फ गांगुली ने किया समर्थन

सिर्फ गांगुली ने किया समर्थन

39 वर्षीय हरभजन ने कई बार गांगुली की प्रशंसा की है। हरभजन ने यह भी कहा कि गांगुली ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया। हरभजन ने आकाश चोपड़ा के साथ बात करते हुए कहा, ''मैं एक बार जीवन में एक ऐसी अवस्था में था जहां मुझे नहीं पता था कि कौन मेरे साथ था और कौन नहीं था। क्योंकि मेरे चेहरे पर लोग कह रहे थे कि वे मेरे साथ हैं, लेकिन उनमें से कई उस समय मेरे साथ नहीं थे। लेकिन उस समय जब कोई मेरे लिए आगे नहीं आया तोसौरव गांगुली ने मेरा समर्थन किया। चयनकर्ता मेरे खिलाफ थे, उन्होंने मुझे बहुत कुछ कहा जिनका मैं खुलासा नहीं कर सकता। मैं गांगुली की जितनी भी प्रशंसा करूं, कम है। अगर वह उस समय कप्तान नहीं होते, तो मैं नहीं जानता कि क्या कोई अन्य कप्तान मुझे उतना ही समर्थन दे सकता था।''

गेंदबाजों को देते थे स्वतंत्रता

गेंदबाजों को देते थे स्वतंत्रता

हरभजन ने अपना डेब्यू 1998 में किया था लेकिन उसके बाद टीम से बाहर हो गए। हालांकि, गांगुली के कप्तान के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, उन्होंने कुछ नए खिलाड़ियों को पेश किया। उनमें से एक युवा जालंधर के ऑफ स्पिनर थे। हरभजन ने समझाया कि बंगाल का खिलाड़ी उन्हें स्वतंत्रता के साथ गेंदबाजी करने की अनुमति देते थे। उन्होंने याद किया कि जब वह कप्तान थे तो गांगुली मैदान पर उन्हें क्या बताते थे।

चाैका पड़े तो नहीं होते थे निराश

चाैका पड़े तो नहीं होते थे निराश

उन्होंने कहा, ''अगर आपको कैच के लिए 4-5 फील्डर्स की जरूरत होती थी तो वो आपको उस जगह फील्डर्स देते थे। कई बार हम खुद से पूछते थे कि क्या हमें फील्डर को पीछे करना चाहिए। लेकिन वो कहते थे कि उसे आगे ही रहने दो। अगर हम उसे आगे रखते थे तो हमारे लिए मौके बनते थे। अगर कोई बल्लेबाज चौका मारता था तो वो कहते थे उसे मारने दो। हम उसे आउट करने की कोशिश कर रहे हैं। आपको ऐसे कप्तान की जरूरत होती है जो आपको हर मौके पर आपका समर्थन करे। वो एक ऐसे कप्तान थे जिन्होंने मुझे निडर बनायाय़ मैं उनके सामने अपनी बेहतर गेंदबाजी के लिए कुछ भी कह सकता था।'' हरभजन ने 103 टेस्ट खेले और 413 विकेट लिए। उन्होंने 236 एकदिवसीय मैचों में 269 विकेट भी लिए हैं।

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Story first published: Tuesday, June 16, 2020, 17:33 [IST]
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