
विश्व कप क्रिकेट की पहली हैट्रिक
1987 के विश्व कप में 24 वां मुकाबला भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। न्यूजीलैंड के कप्तान ज्यॉफ क्रो ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी चुनी। 41 ओवर तक मैच न्यूजीलैंड के लिए ठीक ठाक चल रहा था। प्रोजेक्टेड स्कोर 250 के आसपास पहुंचता दिख रहा था। उस समय पांच विकेट के नुकसान पर 181 का स्कोर था। रदरफोर्ड 26 रन बना कर क्रीज पर थे। तभी कप्तान कपिलदेव ने चेतन शर्मा को गेंद थमायी। इसके पहले वे पांच ओवर कर चुके थे। कोई खास प्रभावशाली नहीं रहे थे। लेकिन चेतन के बारे में ये मशहूर था कि वे कभी भी लय में आ सकते हैं और अपनी शार्प इनडीपर गेंदों से तहलका मचा सकते हैं। बस दिन उनका होना चाहिए। 1986 में चेतन इंग्लैंड में ये कमाल दिखा चुके थे। चेतन अपने छठे ओवर के लिए लंबे रनअप पर पहुंचे। पहली तीन गेंदों पर रदरफोर्ड कोई रन नहीं बना सके। चेतन की चौथी गेंद ठप्पा खा कर जमीन को चूमती हुई तेजी से अंदर आयी। रदरफोर्ड डिफेंस करने के लिए आगे बढ़े कि गेंद स्टंप लेकर उड़ गयी। इसके बाद इयान स्मिथ क्रीज पर उतरे। चेतन की पांचवी गेंद भी नीची रहती हुई तेजी से अंदर आयी और स्मिथ की गिल्लियां बिखर गयीं। अब चेतन हैट्रिक पर थे। इसके पहले विश्वकप में किसी ने ये कारनामा नहीं किया था। स्मिथ के बाद चैटफील्ड मैदान पर उतरे। कप्तान कपिल देव ने चेतन शर्मा से कुछ बात की। चेतन ने अपने ओवर की छठी और आखिरी गेंद डाली। फुलर लेंग्थ की गेंद स्टम्प पर आ रही थी। चैटफील्ड गेंदबाज थे। उनको बल्लेबाजी का खास तजुर्बा नहीं था। उन्होंने एक्रॉस द स्टम्प खेलने की कोशिश की। गेंद उनकी दोनों टांगों के बीच से निकली और स्टम्प बिखर गया। चैटफील्ड के आउट होते ही चेतन खुशी से दौड़ने लगे। इतिहास बन चुका था। विश्वकप की पहली हैट्रिक लग चुकी थी। वनडे में किसी भारतीय गेंदबाज की भी यह पहली हैट्रिक थी। भारतीय़ खिलाड़ी चेतन को घेर कर बधाई देने लगे।

छोटे कद के चेतन का ऊंचा मुकाम
आम तौर पर लंबे और अच्छी डील-डौल वाले क्रिकेटर ही तेज गेंदबाज होते रहे हैं। चेतन शर्मा की ऊंचाई औसत से कम थी। लेकिन ने अपने मजबूत कंधों और स्मूथ एक्शन की वजह से अच्छी रफ्तार निकालते थे। इसी वजह से चेतन को पॉकेट साइज पावरहाउस कहा जाता था। शार्प इनडीपर उनकी सबसे खतरनाक गेंद होती थी। इन्ही गेंदों ने उन्हें विश्वकप में हैट्रिक दिलाया था। लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रहती थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि चेतन भारत के प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज रहे हैं। वे भारत के सिर्फ तीसरे गेंदबाज हैं जिन्होंने अपने डेब्यू टेस्ट के पहले ओवर में विकेट हासिल किया है। 1984 में चेतन ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले टेस्ट के पहले ओवर में ही मोहसिन खान का विकेट चटका डाला था। 1986 में उन्होंने इंग्लैंड दौरे पर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। दो टेस्ट मैचों में 16 विकेट हासिल किये। एक पारी में 10 विकेट लेने का भी गौरव प्राप्त किया। भारत ने पहली बार टेस्ट श्रृंखला में इंग्लैंड को उसके घर में 2-0 से हराया था। इसमें चेतन शर्मा का बहुत बड़ा योगदान था।
क्या खोया क्या पाया ?
चेतन शर्मा के कोच भी वही थे जिन्होंने कपिल देव को तेज गेंदबाजी के गुर सिखाये थे। देशप्रेम आजाद ने दोनों की गेंदबाजी को धार दी थी। चेतन भी चंडीगढ़ के थे। कपिल देव ने चेतन शर्मा को बहुत कुछ सिखाया और आगे बढ़ाया। भारतीय टीम में कपिल के साथ उनकी जोड़ी करीब पांच साल तक बनी रही। चोट की वजह से चेतन का करियर बहुत प्रभावित रहा। उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी थी। इस लिए उनका सफर 23 टेस्ट मैचों तक पहुंच कर रुक गया। 23 टेस्ट मैचों में उन्होंने 61 विकेट लिये। 1989 में उनका टेस्ट करियर खत्म हो गया। उन्होंने 65 एकदिवसीय मैच खेले जिसमें 67 विकेट हासिल किये। इसके अलावा उनको उस आखिरी गेंद के लिए भी याद किया जाता जिस पर मियांदाद ने छक्का मार कर पाकिस्तान को जिताया था। 1986 में शारजाह में आस्ट्रेलेशिया कप का आयोजन हुआ था। फाइनल में भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत हुई। आखिरी ओवर में पाकिस्तान को जीतने के लिए 11 रन चाहिए थे। चेतन शर्मा आखिरी ओवर फेंक रहे थे। इस ओवर में पाकिस्तान के दो विकेट गिर गये। आखिरी गेंद पर चार रन की दरकार थी और पाकिस्तान की अंतिम जोड़ी मैदान पर थी। भारत को जीत के लिए एक विकेट चाहिए था। चेतन ने यॉर्कर डालने के चक्कर में आखिरी गेंद फुलटॉस फेंक दी जिस पर मियांदाद ने छक्का जड़ दिया। इस तरह पाकिस्तान एक विकेट से जीत गया। इसके अलावा चेतन शर्मा ने एकदिवसीय मैचों में एक शतक भी लगाया है। 1989 में एमआरएफ वर्ल्ड सिरीज मैच के दौरान चेतन को इंग्लैंड के खिलाफ चौथे नम्बर पर बल्लेबाजी के लिए उतारा गया था। चेतन ने इस मैच में नाबाद 101 रनों की तेज पारी खेली थी।
अनोखा रिकाॅर्ड : 11 बल्लेबाज खाता भी नहीं खोल सके, 5 रनों का लक्ष्य 1 ओवर में हुआ हासिल


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