
1. पहली पारी में सबका फेल होना
टेस्ट फाॅर्मेट ऐसा है जहां अगर आप पहली पारी की शुरूआत करते हो तो फिर बड़े स्कोर के जरिए ही विरोधी टीम पर दवाब लाया जा सकता है। कप्तान विराट कोहली ने टाॅस जीता, लेकिन उनका यह फैसला गलत साबित हो गया। भारतीय बल्लेबाजों ने बेहद खराब प्रदर्शन किया और पूरी टीम महज 78 रनों पर ढेर हो गई। कोई भी बल्लेबाज 20 का आंकड़ा नहीं छू पाया। पहली पारी में भारतीय बल्लेबाजों का यह खराब प्रदर्शन इंग्लैंड को जीत की उम्मीद जगा गया था।

2. इंग्लैंड के गेंदबाजों का खतरनाक प्रदर्शन
जो गलती इंग्लैंड के गेंदबाजों ने दूसरे टेस्ट में की थी वो उन्होंने इस बार नहीं दोहराई। गुस्सा दिखाने की बजाय गेंदबाजों ने सटीक लाइन पर गेंदबाजी करना अपना लक्ष्य बनाए रखा। इंग्लैंड की गेंदबाजी ने दोनों पारियों में भारतीय बल्लेबाजों को टिकने नहीं दिया। सबसे ज्यादा खतरनाक दिखे ओली रॉबिन्सन, जिन्होंने मैच में 7 विकेट चटकाए। उन्होंने पहली पारी में 2 तो दूसरी पारी में पांच विकेट लेकर टीम को चाैथे दिन ही जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इनके अलावा जेम्स एंडरसन ने 4 तो क्रेग ओवरटन ने 6 विकेट चटकाए। इंग्लैंड का तेजी आक्रमण भारतीयों पर पूरे मैच में हावी रहा।

3. त्रिमूर्ति का फेल रहना
भारतीय टीम के लिए 'त्रिमूर्ति' का फेल होना चिंता का विषय बन गया है। ये त्रिमूर्ति है विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा व अजिंक्य रहाणे। भले ही पुजारा ने दूसरी पारी में 91 रनों की पारी खेली हो, लेकिन सबसे अहम था पहली पारी में रन बरसाना ताकि विरोधी टीम को दवाब में लाया जा सके। पहली पारी में कोहली 7, पुजारा 1 तो रहाणे 11 रन बनाकर आउट हो गए थे जिस कारण टीम 78 रनों पर ढेर हुई। वहीं दूसरी पारी में रहाणे ने सबसे ज्यादा निराश किया जो 10 रन ही बना सके। हालांकि कोहली ने जरूर 55 रन बनाए, लेकिन सभी को उम्मीद थी कि वो शतक लगाएंगे। सिर्फ यही बल्लेबाज नहीं, बल्कि रोहित शर्मा, केएल राहुल व रिषभ पंत जैसे धाकड़ बल्लेबाज भी दोनों पारियों में कोई कमाल नहीं कर सके जिस कारण भारत को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। पहली पारी में खुद जल्दी सिमट जाना, फिर इंग्लैंड को बड़ा स्कोर करने देना भारत की हार का मुख्य कारण बन गया।


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