
1.कोहली का फ्लाॅप प्रदर्शन
दोनों टेस्ट मैचों में 'रन मशीन' कहे जाने वाले विराट कोहली का बेहद खराब प्रदर्शन रहा है। इतिहास गवाह है कि कोहली ना चलें तो फिर भारत का जीतना मुश्किल होता है। इस टेस्ट सीरीज में फिर ये साबित हुआ। कोहली के फ्लाॅप प्रदर्शन के कारण टीम जीत के लिए तरस गई। कोहली वेलिंगटन में हुए पहले टेस्ट की पहली पारी में 2 जबकि दूसरी पारी में सिर्फ 19 रन बना सके थे। परिणाम ये रहा कि टीम 10 विकेट से मैच हार गई। इसके बाद दूसरे टेस्ट में भी कोहली का बल्ला शांत रहा। वह पहली पारी में 3 तीन तो दूसरी पारी में 14 रन रन बनाकर आउट हो गए और भारत तीसरे दिन ही मैच हार गए।

रोहित की खली कमी
इस सीरीज में विस्फोटक ओपनर रोहित शर्मा कमी साफ-साफ खली है। रोहित होते तो शायद मैच के नतीजे भी कुछ और रहते क्योंकि वह माैजूदा समय फाॅर्म हैं और हर सीरीज में रन बरसा रहे हैं। लेकिन चोटिल होने के कारण उन्हें टेस्ट टीम में शामिल नहीं किया गया था। उनकी जगह पृथ्वी शाॅ को चुना गया जो दूसरे टेस्ट को छोड़कर पहले मैच में फ्लाॅप हुए। उन्होंने वेलिंगटन में हुए पहले मैच में 16,14 रनों की पारियां खेलीं। रोहित वनडे टीम में भी शामिल नहीं थे। तीन वनडे मैचों की सीरीज में भी भारत को 3-0 से सीरीज गंवानी पड़ी थी।

3. काईल जैमिसन का गजब प्रदर्शन
भारत को सीरीज से दूर करने में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज काईल जैमिसन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। 25 वर्षीय इस गेंदबाज ने बल्ले से भी भारतीय गेंदबाजों के नाक में दम किया। उन्होंने कुल 9 विकेट लिए साथ ही सीरीज में 44, 49 रनों की पारियां खेलीं। पहले टेस्ट में जैमिसन ने भारत की पहली पारी के 4 विकेट झटके। इसमें विराट कोहली व चेतेश्वर पुजारा का विकेट भी शामिल था। साथ ही उन्होंने पहली पारी में 45 गेंदों में 44 रनों की पारी भी खेली थी। इसके बाद दूसरे टेस्ट में फिर जैमिसन ने भारतीय बल्लेबाजों को परेशान करते हुए 5 विकेट लिए, साथ ही पहली पारी में 49 रन बनाए। जैमिसन के प्रदर्शन से कीवी कप्तान केन विलियमसन भी काफी खुश नजर आए।

4. रिषभ पंत नहीं आए काम
युवा विकेटकीपर रिषभ पंत एक बार फिर नाकाम साबित हुए हैं। उन्हें दोनों मैचों में सातवें नंबर पर उतारा गया ताकि तेज खेलकर स्कोर बढ़ा सकें लेकिन वो उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। आलोचनाओं का शिकार होने के बावजूद पंत पहले टेस्ट की पहली पारी में 19 तो दूसरी पारी में सिर्फ 25 रन ही बना सके। वहीं जब आखिरी टेस्ट में उन्हें एक बार फिर माैका मिला तो वह इससे भी खराब प्रदर्शन कर बैठे। उन्होंने पहली पारी में 12 जबकि दूसरी पारी में सिर्फ 4 रनों का योगदान दिया जो भारत को हार के करीब ले गए। उनका ना चलना चिंता का विषय बन चुका है।

5. रिद्धिमान साहा को बाहर बैठाना
यह बेहद चाैकाने वाला फैसला रहा कि आखिर रिद्धिमान साहा को क्यों नहीं प्लेइंग इलेवन में रखा गया। इस अनुभवी विकेटकीपर से ज्यादा पंत पर टीम मैनेजमेंट ने भरोसा जताया जो गलत साबित हुआ। पहले मैच में मिली हार के बाद उम्मीद थी कि साहा को माैका मिलेगा, लेकिन कप्तान कोहली व कोच रवि शास्त्री ने फिर पंत को प्लेइंग इलेवन में रख लिया। साहा को नजरअंदाज करना टीम को टेस्ट क्रिकेट में भारी पड़ रहा है। भारत के लिए स्ट में फिलहाल साहा से अनुभवी विकेटकीपर कोई नहीं है। लेकिन उन्हें पंत के कारण बाहर रखने के फैसले आगे भी गलत साबित हो सकते हैं।


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