इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर और समाचार पत्र 'द टेलीग्राफ' के स्तंभकार डेरेक प्रिंगल ने लिखा है कि मैच के पांचवें दिन टूटी हुई पिच पर 387 रनों का लक्ष्य हासिल करके भारतीय टीम अपने खेल के स्तर को एक नई ऊंचाई देने में सफल रही है।
प्रिंगल के मुताबिक यह मैच तेंदुलकर के लिए भी महत्वपूर्ण रहा जो अपनी शतकीय पारी के दौरान बिल्कुल अलग तरह के बल्लेबाज नजर आए। सबसे खास बात यह रही कि अपनी पारी के साथ-साथ तेंदुलकर अपने साथी बल्लेबाज युवराज सिंह की पारी संवारने में मदद करते रहे।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक आर्थटन ने भी तेंदुलकर की जमकर तारीफ की है। 'द टाइम्स' में प्रकाशित अपने लेख में आर्थटन ने लिखा है, "अपनी शतकीय पारी के दौरान तेंदुलकर ने अपने सभी साथियों को प्रेरित किया। एक मैच जिताऊ पारी खेलकर तेंदुलकर ने भारतीय जनमानस के दिलो-दिमाग पर गहरा असर छोड़ा है।"
आर्थटन के मुताबिक इंग्लैंड टीम का भारत जाकर खेलने का फैसला सराहनीय है और सबसे अहम बात यह है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद चेपॉक स्टेडियम में जबरदस्त भीड़ उमड़ी, जो क्रिकेट के लिए शुभ लक्षण है।
समाचार पत्र 'गार्जियन' ने चेन्नई टेस्ट के दूसरे पक्ष को उठाया है। पत्र के मुताबिक भारत और खासकर चेन्नई के लोगों ने साबित कर दिया है कि भारत में क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित है। तमाम अनिश्चितताओं के बावजूद जिस तरह 95 हजार लोग मैच देखने के लिए मैदान में पहुंचे उससे साबित हो गया कि भारत में क्रिकेट को रोक पाना आतंकवादियों के वश में नहीं।
पत्र के मुताबिक मैच के बाद तेंदुलकर का आतंकी हमलों पर दिया गया बयान राष्ट्र के नाम संबोधन सरीखा लगा। सबसे अहम बात यह है कि तेंदुलकर ने अपनी टीम की जीत और अपना शतक मुंबईवासियों के नाम कर करोड़ों भारतवासियों का दिल जीत लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**