India Vs Australia: कप्तान विराट कोहली की गैरमौजूदगी में उपकप्तान अजिंक्या रहाणे टीम की कमान संभालेंगे। चार टेस्ट मैचों की सीरीज में एक मैच पहले हार चुकी भारतीय टीम के लिए वापसी करना बड़ी चुनौती है। कप्तान कोहली की गैरमौजूदगी, रोहित शर्मा का दूसरे टेस्ट के लिए उपलब्ध ना होना, पृथ्वी शॉ का फॉर्म, मोहम्मद शमी का चोटिल होने की वजह से सीरीज से बाहर होना, इन तमाम मुश्किलों के बीच अजिंक्या रहाणे के सामने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज में वापसी करने की चुनौती है।
अजिंक्या रहाणे ने दिग्गज क्रिकेटर राहुल द्रविड़ की छाया में बल्लेबाजी की बारीकियां सीखी हैं, ऐसे में उनसे लोगों को काफी उम्मीद है। खुद राहुल द्रविड़ ने तकरीबन चार साल पहले अजिंक्या रहाणे के बारे में बात करते हुए कहा था कि पूरी दुनिया का दौरा करने के बाद रहाणे इस बात को लेकर काफी अच्छा महसूस कर रहे होंगे कि वह टॉप लेवल पर हैं। द्रविड़ ने कहा कि एक साल तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने के बाद मुझे लगा था कि मैं कर सकता हूं। मैं जानता था, मुझे एक साल लग गए थे। मैंने कर्टली एंब्रोस, एलन डोनाल्ड, कोर्टनी वॉल्श का सामना किया। मुझे अच्छा लगा, मैंने वनडे में शतक लगाया, मैं दौरों पर गया, मैंने दौरों को अलग तरह से देखा. मुझे लगा मैं यहीं के लिए बना हूं। लेकिन फिर मैंने अलग तरह से सोचना शुरू किया, अब मुझे लगता है कि मुझे टीम के लिए और कुछ करना है, अब मैं मैच विजेता बनना चाहता था, मैं ये तब करना चाहता था जब सबसे मुश्किल हो।
क्या कहना है द्रविड़ का
द्रविड़ ने कहा कि कभी-कभी आपको सफलता की जरूरत होती है, और जब यह मिलती है तब आपको लगता है कि हां मैं यहीं के लिए बना हूं। रहाणे ने अपना आक्रामक खेल विकसित किया है, उसे अब यह पता है कि अगर कड़ी मेहनत करता है, अच्छा अभ्यास करता है तो वह इस स्तर पर सफलता हासिल कर सकता है। इस तरह की भावना बहुत अच्छी होती है और इस तरह का महसूस होने में समय लगता है, लेकिन जब ये आपके भीतर आता है तो आपको पता होता है कि आप यहीं के लिए बने हैं।
शुरुआती टेस्ट करियर जबरदस्त
सचिन तेंदुलकर के सन्यास लेने के बाद अजिंक्या रहाणे सबसे मेहनती बल्लेबाजों में से एक हैं। जबकि चेतेश्वर पुजारा डिफेंस में एक बेहतरीन दिग्गज बल्लेबाज हैं। विराट कोहली हर फॉर्मेट के जीनियस हैं तो रोहित शर्मा सीमित ओवर के महानतक खिलाड़ियों में शुमार हैं। रहाणे की बात करें तो 13 मौकों पर वह स्क्वॉड का हिस्सा थे लेकिन प्लेइंग 11 में जगह नहीं बना सके। 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरकार उन्हें दिल्ली में मौका मिला। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका,इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने विश्वस्तरीय बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। इसके बाद रहाणे लगातार 11 टेस्ट मैच में टीम का हिस्सा रहे।
पहले 13 टेस्ट में रहाणे शानदार
पहले 13 टेस्ट सीरीज की बात करें तो सिर्फ एक मैच में रहाणे का औसत 29.66 के नीचे रहा। 9 पारियों में रहाणे का औसत 50 के करीब रहा। इसके बाद वह टीम का अहम हिस्सा बन गए। लेकिन इसके बाद श्रीलंका के खिलाफ 2017 की सीरीज में रहाणे का औसत महज 3.4 का रहा, जिसके चलते दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए 2018 में रहाणे का चयन टीम में नहीं हुआ।
रहाणे की दिक्कत
कप्तान धोनी और कोहली को आराम देकर 2015 में रहाणे को जिम्बाब्वे दौरे पर टीम का कप्तान बनाया गया। जिसके बाद उन्हें टेस्ट टीम की बजाय वनडे टीम में मौका दिया गया और नंबर चार पर बल्लेबाजी करने का अवसर मिला। टीम मैनेजमेंट ने रहाणे को टेस्ट की बजाए सीमित ओवर के लिए अधिक महत्ता दी। लेकिन एक सीरीज के बाद एक बार फिर से रहाणे को टेस्ट टीम में मौका दिया गया और वनडे टीम में उन्हें जगह नहीं मिली। दक्षिण अफ्रीका के दौरे के बाद रहाणे ने 23 टेस्ट मैच में सिर्फ दो शतक लगाए और औसत 40 के भीतर रहा जबकि स्ट्राइक रेट 45 का रहा। इससे पहले 43 टेस्ट मैच में रहाणे के नाम 9 शतक थे और औसत 44 क था जबकि स्ट्राइक रेट प्रति 100 गेंद 53 का था।
अच्छी शुरुआत बड़े स्कोर में नहीं तब्दील हो रहे
रहाणे के सामने सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि शुरुआत में सेटल होने के बाद वह इसे बड़े स्कोर में नहीं बदल पा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका दौरे (2018) से पहले रहाणे अगर 20 रन का स्कोर पार कर लेते थे तो उनकी पारी का औसत स्कोर 86 रन का होता था। लेकिन बाद में यह गिरकर 61 हो गया जोकि कोहली, पुजारा, हनुमा विहार, मयंक अग्रवाल, पृथ्वी शॉ और होति शर्मा से कहीं कम है। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि जब कोहली टीम में मौजूद नहीं है और एक बार फिर से रहाणे को टीम की कमान मिली है तो क्या रहाणे फिर से उसी तरह से अपना लोहा मनवा सकते हैं जैसे उन्होंने अपने शुरुआती दौर में मनवाया था।