
पुरानी गेंद से रणनीति
भुवनेश्वर कुमार के साथ बातचीत के दौरान शार्दुल ठाकुर ने कहा जब मैं गेंदबाजी के लिए आया तो इंग्लैंड के 3 विकेट जा चुके थे, डेविड मलान और जॉस बटलर अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे दोनों अच्छे फॉर्म में लग रहे थे, कोशिश यही थी कि उनका विकेट निकाला जाए क्योंकि वो बहुत ही डीप बैटिंग करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि उन्हें जितना जल्दी आउट कर सके उतना ही हम उनके स्कोर को रोक सकते हैं। पुरानी गेंद से गेंदबाजी को लेकर शार्दुल ठाकुर ने कहा कि सफेद गेंद में अगर आप देखोगे तो थोड़े ओवर हो जाने के बाद गेंद स्विंग नहीं होती है तो आपको पिच में से कुछ ना कुछ हेल्प निकलवाना पड़ता है, जैसे कटर का इस्तेमाल कर सकते हैं, स्लोवर गेंद और क्रॉस सीम, बाउंसर का इस्तेमाल करते हैं। काफी सारी गेंद ट्राइ करनी पड़ती है।

क्या थी रणनीति
इग्लैंड की विस्फोटक बल्लेबाजी के सामने अपनी गेंदबाजी की रणनीति के बारे में शार्दुल ने कहा कि अगर हम ये सोचेंगे कि इतनी स्ट्रॉग बैटिंग लाइनअप है, ये तो मारेंगे, मार तो पड़ेगी ही। लेकिन अगर हम ये सोचे कि विकेट ले सकते हैं और डॉट गेंद डाल सकते हैं तो यह ज्यादा अच्छी सोच है। राशिद खान के विकेट के बारे में बात करते हुए शार्दुल ने कहा वह धीमी गेंद नहीं थी, विराट ने बहुत ही अच्छा कैच पकड़ा। उस टाइम पर टीम को विकेट की जरूरत थी। मैं खुश हूं कि मेरी गेंद पर वह विकेट आया, विराट ने इतना अच्छा कैच पकड़ा, ज्यादातर हमने टी-20 में इतने अच्छे कैच देखने को मिले थे, लेकिन वनडे में यह पहला बेहतरीन कैच था।

बैट-बॉल दोनों से किया योगदान
बता दें कि फाइनल मुकाबले में शार्दुल ठाकुर ने थोड़े महंगे जरूर साबित हुए लेकिन जिस तरह से अहम मौकों पर जब टीम को विकेट की दरकार थी, उस वक्त शार्दुल ने विकेट हासिल करके मैच में टीम इंडिया की वापसी कराई। शार्दुल ने 10 ओवर में 67 रन देकर 4 विकेट अपने नाम किए। ना सिर्फ गेंद से बल्कि बैट से भी शार्दुल टीम में योगदान दिया। शार्दुल ने 21 गेंदों पर 31 रनों की पारी खेली और 3 छक्के व एक चौका लगाया


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