
यही मेरा खेल है
रोहित के खेलने का अंदाज कैसा है, इससे हर कोई वाकिफ है। बस वही चीज उन्होंने इस पारी के लिए दोहराई। रोहित ने कहा, ''पिच पर अधिक बाउंस नहीं था तो मैंने फैसला लिया गेंद के पास जाकर शाॅट खेले जाएं। बीच के ओवरों में मैं मयंक अग्रवाल से बात करता रहा कि गैप में कैसे शॉट खेलकर स्ट्राइक रोटेट करनी है। मेरा गेम ऐसा ही है कि पैड पहनकर सीधे जाकर बैटिंग करो। मेरे लिए यही सही है। मेरा दिमाग ओपनिंग करते हुए फ्रेश रहता है।'' रोहित ने आगे कहा कि आपको पता है कि नई बॉल का सामना करना है तो फील्डर कहां-कहां होते हैं। ऐसे में प्लान सिंपल होता है। मैं बोल नहीं पाऊंगा लेकिन यही मेरे गेम को सूट करता है कि पैड पहनो और अंदर जाओ। मैंने यही किया।

हालात से वाकिफ थे रोहित
शुरूआती ओवरों में गेंद क्या रंग दिखाएगी, इससे रोहित अच्छे से वाकिफ थे। रोहित ने कहा कि मैंने भारत में काफी फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला है, इसलिए कंडिशन से वाकिफ था। मेरा ध्यान नई गेंद को ध्यान से खेलने में था ताकि बाद में शाॅट लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि नई गेंद चाहे लाल या सफेद, शुरुआत में परेशानी पैदा करती है। ये और बात है कि लाल गेंद सफेद गेंद की तुलना में अधिक लंबे समय तक स्विंग करती है। ऐसे में बेसिक्स पर ध्यान देना होता है। भारत में खेलते हुए मुझे पता है कि जब गेंद की चमक चली जाती है तो क्या होता है।इसके बाद गेंद अधिक स्विंग नहीं होती और आप अपना खेल खेल सकते है।

टीम मैनेजमेंट का किया शुक्रिया
रोहित ने टीम मैनेजमेंट का शुक्रिया किया जिन्होंने उनपर ओपनिंग के लिए भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि जब आप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हैं तो मौके की तलाश में रहते हैं और ये बेहतरीन मौका था। मेरे लिए जरूरी था कि सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ध्यान दूं। मैं भविष्य और बीते हुए समय के बारे में नहीं सोच रहा था। मेरे पास ओपनिंग का सुनहरा मौका था। मुझे माैका दिया गया और मैं इसके लिए तैयार था। बता दें कि रोहित बताैर ओपनर पहले ही टेस्ट में शतक लगाने वाले चाैथे भारतीय बल्लेबाज बने हैं। उनसे पहले शिखर धवन, केएल राहुल और पृथ्वी शाॅ कर चुके हैं।


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