
कोहली के बिना मुश्किल हालातों में जीत-
विराट कोहली के बिना विषम परिस्थितियों में मिली इस जीत ने टीम इंडिया को कई सवालों के जवाब भी दे दिए हैं। सबसे बड़ा और अहम सवाल शीर्ष क्रम की असफलता के बाद मध्यक्रम की बल्लेबाजी को लेकर था। इस मैच में भारत का बेहतरीन शीर्ष क्रम लगातार दूसरी बार फेल हुआ लेकिन इस बार मध्यक्रम ने बढ़िया बल्लेबाजी करते हुए टीम की नैया किनारे पर लगा दी। कोहली के बिना नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने उतरे शुभमन गिल एक बार फिर से असफल हुए। लेकिन अंबाती रायडू और विजय शंकर के बीच हुई साझेदारी ने भारत को मैच में नाजुक स्थिति से बाहर निकाला और बाद में रायडू ने केदार जाधव के साथ ही बढ़िया साझेदारी करके स्कोर को आगे बढ़ाए रखा।
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भारत की कीवीलैंड में बेस्ट परफार्मेंस-
वहीं हार्दिक पांड्या की आतिशी पारी ने ताबूत में अंतिम कील ठोकने वाला काम किया। इसके बावजूद भी भारत का स्कोर केवल चुनौतीपूर्ण टारगेट के आस-पास ही सेट हो पाया था लेकिन बाद में भारतीय गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के बूते भारत ने 35 रन से यह मुश्किल मैच जीत लिया। इस सीरीज से पहले भारत की कीवीलैंड में बेस्ट परफार्मेंस 2009 में वनडे सीरीज में मिली 3-1 की जीत थी। तब भारत ने धोनी की अगुवाई में यह उपलब्धि हासिल की थी।
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जीत ने दिया शानदार रिकॉर्ड-
यह भारत की न्यूजीलैंड में दूसरी वनडे सीरीज जीत भी है। इस दफा कीवियों को 4-1 से मात देन के साथ ही टीम इंडिया ऐसी तीसरी टीम बन गई है जिसने न्यूजीलैंड की धरती पर द्विपक्षीय वनडे सीरीज में चार या उससे ज्यादा मैचों में जीत हासिल की। भारत से पहले ऑस्ट्रेलिया इस कारनामे को 1999-00 में कर चुका है तब 6 मैचों की सीरीज में कंगारूओं ने कीवियों को 4-1 से मात दी थी। इसके एक साल बाद श्रीलंका ने भी 4-1 से कीवीलैंड फतह किया था। बता दें ऑस्ट्रेलिया ने 2004-05 में भी कीवियों को पांच मैचों की सीरीज में क्लीन स्वीप कर दिया था। इस प्रकार भारत ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के अलावा इस उपलब्धि को हासिल करने वाली तीसरी टीम बन गई।


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