
48वें से शुरू हुआ 'असली' खेल-
हालांकि डेथ ओवर के खतरनाक गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने भारतीय पारी का 48वां ओवर जबरदस्त किया और स्टोइनिस की एक ना चलने दी। लेकिन आपको यह बता दें कि उस समय स्टोईनिस के दिमाग में कुछ चल रहा था और उन्होंने जानबूझकर बुमराह के इस ओवर में केवल एक ही रन लिया था। उसके बाद अगला यानी 49वां ओवर करने के लिए मोहम्मद शमी आए जिनके ओवर में सब ठीक-ठीक चल रहा था लेकिन अंतिम गेंद पर शमी ने चार रन दे दिए। जिसके चलते ऑस्ट्रेलिया को अंतिम ओवर में जीत के लिए 11 रन चाहिए थे और स्ट्राइक पर थे स्टोइिस।

शंकर ने ऐसे किया यह 'कमाल'-
ठीक यही वह पल था जब शंकर की धड़कने तेज हो रही थी क्योंकि बुमराह के ओवर का कोटा पूरा हो चुका था। ऐसे में कप्तान कोहली के पास शंकर को गेंद थमाने और उन पर भरोसा करने के सिवा कोई और बेहतर विकल्प नहीं था। इससे पहले शंकर ने अपने कोटे से एक ओवर किया था और तब उनको 13 रन पड़े थे। लेकिन शंकर ने अपनी नर्व पर कंट्रोल रखा और कप्तान के भरोसे पर खरा उतरने के इरादे से 50वें ओवर की पहली गेंद फेंकी। गेंद फुल लेंथ पर गिरी थी लेकिन अच्छी बात यह थी कि विकेटों की लाइन में थी। या तो बल्लेबाज इसको 6 रन के लिए भेजता या फिर पगबाधा होता। यहां स्टोईनिस पगबाधा हुए। इस पगबाधा ने भारत की जीत में एक बड़ी बाधा को भी पार कर लिया था।

स्टोईनिस के बाद जांपा को बोल्ड किया-
अब क्रीज पर आए बल्लेबाज थे एडम जांपा। जिन्होंने शंकर की दूसरी गेंद को दो रन के लिए भेज दिया। लेकिन शंकर ने जांपा को तीसरी गेंद विकेटों की लाइन में यॉर्कर फेंकी। जिसको लंबा शॉट मारने के फेर में रूम बनाकर जांपा अपने विकेट में ले गए और भारत मैच 8 रनों से जीत गया। इस तरह शंकर ने केवल तीन गेंदों के अंदर ही दो विकेट निकालकर कंगारूओं को 8 रनों से शिकस्त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
INDvsAUS 2nd ODI: शंकर ने अंतिम ओवर में किया कमाल, भारत को मिली 8 रनों से जीत

बल्लेबाजी में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से आउट हुए-
इससे पहले भी शंकर ने बतौर बल्लेबाज भी शानदार प्रदर्शन करके मैच को अपने लिए यादगार बनाया था। उन्होंने केवल 41 गेंदों में 46 रनों की पारी खेली और वे आउट भी इस तरह हुए जिसमें उनका कोई दोष नहीं था। यह कोहली के बल्ले से निकला हुआ झन्नाटेदार शॉट था जिसने किसी तरह से जांपा की अंगुलियों को छूआ और बाद में गेंद सीधे विकेट पर लगी। इसका खामियाजा दूसरे छोर पर खड़े शंकर को भुगतना पड़ा। उनको क्रीज पर वापस आने के लिये बेहद ही कम समय मिला था और वे दुर्भाग्यपूर्ण तरीके रन-आउट हो गए।

'मैं ये करूंगा तभी तो लोगों को पता लगेगा'
लेकिन कहते हैं ना कि तकदीर भी जज्बेदारों का साथ देती है। कुछ ऐसा ही शंकर के साथ हुआ। शंकर ने मैच के बाद कहा है कि वे इस चुनौती के लिए तैयार थे। शंकर ने कहा, 'अगर मैं इस तरह की चुनौतियों को स्वीकार ही नहीं करूंगा तो लोगों को कैसे पता चलेगा कि मैं ये कर सकता हूं या नहीं।'


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